एनजीटी के खिलाफ हाई कोर्ट में सरकार

खड्डों-बावडि़यों के 100 मीटर दायरे में क्रशर बंद करने का मामला

 शिमला –नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के खिलाफ हिमाचल सरकार ने हाई कोर्ट में अपील कर दी है। खनन विभाग ने सरकार की ओर से हाई कोर्ट में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों को चुनौती दी है। इसमें ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा था कि प्रदेश में नदियों, नालों, खड्डों, बावडि़यों व चश्मों के 100 मीटर के दायरे में स्टोन क्रशर नहीं होना चाहिए। खनन विभाग का कहना है कि नदियों व नालों से तय दूरी को सुनिश्चित बनाया गया है, लेकिन राज्य में नाले, बावडि़यां व चश्मे बरसात के दिनों में जगह-जगह उफन जाते हैं। यह पता नहीं है कि यहां पर बरसात में कितने चश्मे कहां पर हो जाते हैं और कितनी बावडि़यां तैयार हो जाती हैं। राज्य सरकार की ओर से इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी, जिसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को वहां से हिमाचल का पक्ष दोबारा से सुनने को कहा गया था। दोबारा से पक्ष रखने के बाद भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल प्रदेश की बात को नहीं माना है और आदेश दिए हैं कि नदियों, नालों, बावडि़यों, चश्मों के 100 मीटर के दायरे में स्टोन क्रशर नहीं होने चाहिए। ऐसे में संकट यह पैदा हो गया है कि इन आदेशों की अनुपालना की जाए तो प्रदेश में सभी स्टोन क्रशर बंद करने पड़ेंगे। यहां पर 250 से ज्यादा क्रशर चल रहे हैं। नदियों व खड्डों के नजदीक स्टोन क्रशर नहीं हैं, जिनको पहले से सुनिश्चित बनाया गया है, क्योंकि यह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के नियमों में है। इस पर अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बावडि़यों व चश्मों को भी जोड़ दिया है, जिससे हिमाचल बुरी तरह से फंस चुका है। स्टोन क्रशर बंद हुए तो नदियों, नालों का खनिज बाहर नहीं निकल सकता और सबसे अहम यह है कि आम आदमी को फिर निर्माण सामग्री नहीं मिल पाएगी। यहां पर निर्माण सामग्री का संकट हो जाएगा और दूसरे राज्यों से यहां महंगी दरों पर यह सामग्री आएगी। ऐसे कुछ तथ्यों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने रखा गया था, लेकिन उसने प्रदेश की बात नहीं मानी। लिहाजा अब हाई कोर्ट में अपील करने के अलावा प्रदेश के पास कोई विकल्प नहीं था। यहां से सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प भी प्रदेश सरकार के पास है। हाई कोर्ट में जल्दी ही इस मामले पर सुनवाई की तारीख तय होगी।

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