कार्पल टनल सिंड्रोम का संकेत

कलाई में लगातार हो रहा यह दर्द कार्पल टनल सिंड्रोम का संकेत भी हो सकता है, जो लगातार 8-9 घंटे तक कम्प्यूटर पर काम करने से हो रहा है। इसके कारण कलाई में दर्द कई बार इतना बढ़ जाता है कि सहन करना ही मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, दर्द की ज्यादा अनदेखी करना सर्जरी की नौबत भी ला सकता है…

आजकल लोगों में रात के समय हाथ सुन्न पड़ जाने की शिकायत काफी देखने को मिल रही है, खासकर महिलाओं में। कलाई में लगातार हो रहा यह दर्द कार्पल टनल सिंड्रोम का संकेत भी हो सकता है, जो लगातार 8-9 घंटे तक कम्प्यूटर पर काम करने से हो रहा है। इसके कारण कलाई में दर्द कई बार इतना बढ़ जाता है कि सहन करना ही मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं, दर्द की ज्यादा अनदेखी करना सर्जरी की नौबत भी ला सकता है।

क्या है कार्पल टनल सिंड्रोम

कार्पल टनल हड्डियों और कलाई की अन्य कोशिकाओं द्वारा बनाई गई एक संकरी नली होती है, जो मीडियन नर्व की सुरक्षा करती है। मीडियन नर्व अंगूठे, मध्य और अनामिका अंगुलियों से जुड़ी होती है। जब कार्पल टनल में अन्य कोशिकाएं (लिगामेंट्स और टेंडन) सूज या फूल जाते हैं, तो इसका असर मध्य कोशिकाओं पर भी पड़ता है। इस दबाव के कारण हाथ सुन्न सा महसूस होने लगता है।

महिलाओं में अधिक है समस्या

इस बीमारी के सबसे अधिक शिकार 18 से 35 साल के लोग होते हैं। शोध के मुताबिक करीब एक लाख लोगों में से 120 महिलाओं और 60 पुरुषों को इस सिंड्रोम ने जकड़ रखा है क्योंकि वह दिनभर कम्प्यूटर और लैपटॉप पर काम करते रहते हैं।

ज्यादा देर टाइपिंग करने वालों को अधिक खतरा

जो लोग की-बोर्ड पर लगातार 8-9 घंटे टाइपिंग करते हैं उन्हें इसकी संभावना अधिक होती है। टाइपिंग के वक्त अंगुलियां और कलाई ज्यादा मुड़ती है, जिससे हाथ और कलाई सुन्न और सूज जाती है, जिसके कारण आप इस सिंड्रोम का शिकार हो जाते हैं। बाद में ये दर्द बढ़कर बाहों तक पहुंच जाता है। हालांकि यह गंभीर बीमारी नहीं है, लेकिन दर्द की अनदेखी सर्जरी की नौबत ला सकती है।

इन लोगों को भी है खतरा

वैसे तो ज्यादातर आफिस में टाइपिंग करने वाले लोग ही इसका शिकार हो रहे हैं, लेकिन इसके अलावा कारपेंटर, मजदूर, संगीतकार, मैकेनिक, माली, घंटों तक सूई का यूज करना, गोल्फ  खेलने और नाव चलाने वाले लोगों को भी इसका खतरा रहता है। साथ ही कुछ हैल्थ कंडीशन जैसे डायबिटीज, अर्थराइटिस या थाइराइड आदि के कारण भी यह समस्या हो सकती है।

बीमारी के लक्षण

यह रोग सबसे पहले इंडेक्स (तर्जनी) या मिडिल फिंगर (मध्य) को प्रभावित करता है। इसके कारण हाथों व कलाई में तेज दर्द और सूजन के साथ जलन भी होती है। धीरे-धीरे यह समस्या बाजूओं और कंधों तक पहुंच जाती है। दिन की तुलना में रात के समय यह समस्या ज्यादा परेशान करती है। कोई भी वस्तु उठाते समय अधिक परेशानी होना। अंगूठे में कमजोरी महसूस करना।

कैसे करें बचाव

सबसे पहले तो कम्प्यूटर पर काम करते समय कलाई को सही मुद्रा में रखें। की-बोर्ड या माउस को यूज करते समय ज्यादा न मोड़ें। साथ ही कलाई को सपोर्ट देने वाले माउस पैड का इस्तेमाल करें। इसी तरह काम करते समय आपकी कोहनियां शरीर के दोनों ओर आराम की स्थिति में होनी चाहिए। अगर दर्द बढ़ जाए, तो तुरंत अपने डाक्टर से चैकअप करवाएं। साथ ही अपने काम करने के तरीके और लाइफस्टाइल में भी कुछ बदलाव करें, ताकि आप इस समस्या से बचे रहें। एक घंटा लगातार टाइपिंग करने के बाद पांच मिनट का ब्रेक लें। रोजाना व्यायाम करें और 10 मिनट हाथ खोलने-बंद करने पर जोर दें। काम करते वक्त छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें, ताकि शरीर की अकड़न को भी दूर किया जा सके। एक हाथ से काम करने की बजाय दोनों हाथों का इस्तेमाल करें।

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