केंद्र सरकार को फंड देने के लिए चार हफ्ते की मोहलत

शिमला – माता चिंतपूर्णी मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए फंड हेतु केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की है। पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को यह बताया गया था कि माता चिंतपूर्णी मंदिर की डीपीआर तैयार कर ली गई है। केंद्र सरकार से इसके जीर्णोद्धार बाबत फंड दिए जाने की मांग की गई है। प्रदेश उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को अतिरिक्त समय देते हुए मामले पर सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। इसके अलावा सात अगस्त, 2018 को पारित आदेशों की अनुपालना करने के लिए प्रदेश उच्च न्यायालय ने चार सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है। प्रदेश के मंदिरों पर हिंदू पब्लिक रिलिजियस इंस्टीच्यूशन्स एंड एंडोमेंट्स अधिनियम के प्रावधानों की अनुपालना सुनिश्चित किए जाने को लेकर दायर याचिका में मुख्य न्यायाधीश वी रामासुब्रमनियन व न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने उपरोक्त आदेश पारित किए। हाई कोर्ट ने प्रथम अनुसूची में आने वाले मंदिरों की धनराशि कानून के तहत मिली छूट के अलावा किसी अन्य कार्य के लिए खर्च करने पर पहले ही रोक लगा रखी है। न्यायालय ने इस अधिनियम के तहत नियुक्त सभी आयुक्तों से उनके अधीन आने वाले मंदिरों की संख्या व सबके नाम बताने के आदेश जारी कर रखे है। कोर्ट ने उन सभी मंदिरों की पिछले 10 वर्षों की आय का ब्यौरा भी मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या मंदिरों की आय उपरोक्त अधिनियम के प्रावधानों के तहत दर्शाए गए जनहित कार्यों पर ही खर्च की जा रही है या नहीं। यदि खर्ची जा रही है, तो कितनी। कोर्ट ने आयुक्तों से यह भी पूछा है कि क्या मंदिरों की आय कानून के प्रावधानों के विपरीत भी खर्च की जा रही है। कोर्ट ने मंदिरों में नियुक्त पुजारियों सहित अन्य कर्मियों की पूरी जानकारी भी मांगी है। क्या मंदिरों के ट्रस्टी कानून के अनुसार नियुक्त हैं, क्या मंदिरों की आय का ऑडिट किया जाता है। मंदिरों की भूमि को अवैध कब्जों से छुड़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी भी मांगी गई है। उल्लेखनीय है कि उपरोक्त अधिनियम के तहत मंदिरों की आय को श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए छूट दी गई है। यह आय शिक्षण संस्थानों की स्थापना और उनके रखरखाव पर भी खर्च की जा सकती है। विद्यार्थियों के प्रशिक्षण के लिए भी मंदिरों की आय का इस्तेमाल किया जा सकता है। हिंदू धर्म के विस्तार हेतु भी इस आय का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि क्या पहली अनुसूची में दर्ज सभी मंदिर उपरोक्त काम कर रहे हैं। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पिछले 10 वर्षों में प्रदेश के मात्र 12 मंदिरों की आय 361 करोड़ से ज्यादा हुई, इसलिए यह मुद्दा वास्तव में पैदा होना लाजमी है कि क्या यह राशि कानूनन खर्च भी की जा रही है, या नहीं। कोर्ट ने कहा था कि इस अधिनियम के तहत सामाजिक बुराइयों से निपटने के लिए काम करने जरूरी है। समाज के पिछड़े व दबे कुचले वर्गों के उत्थान के जरूरी कदम उठाने की आवश्यकता है। क्या सभी मंदिर यह दायित्व निभा रहे हैं। मामले पर सुनवाई चार सप्ताह के बाद निर्धारित की गई है।

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