चले गए चाणक्य

बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी अरुण जेटली की पहचान एक विद्वान, वाकपटु और आर्थिक, कानूनी व राजनीतिक मुद्दों की गहराई तक समझ रखने वाले नेता की रही। छात्र राजनीति से सियासत में कदम रखने वाले जेटली अडिशनल सॉलिसिटर जनरल से लेकर देश के वित्त मंत्री तक की जिम्मेदारी संभाली। यूपीए शासन के दौरान बतौर नेता प्रतिपक्ष उन्होंने राज्यसभा में सत्ता पक्ष को अपने दमदार और तर्कपूर्ण भाषणों से अकसर बैकफुट पर जाने को मजबूर किया…

जेटली ने तोड़ा था मोदी-शाह के खिलाफ विपक्ष की कानूनी साजिशों का चक्रव्यूह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेबसाइट पर आज भी अरुण जेटली का 27 सितंबर, 2013 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखा वह लेटर मौजूद है, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर मोदी और अमित शाह को फंसाने की साजिशों को लेकर हमला बोला था। अरुण जेटली का यह पत्र नमो वेबसाइट पर पहली अक्तूबर, 2013 को पब्लिश हुआ था। इस पत्र में अरुण जेटली सोहराबुद्दीन, इशरत जहां, तुलसी प्रजापति एनकाउंटर को लेकर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर झूठे मामले गढ़कर फंसाने की बात कहते हैं। अरुण जेटली ने यह भी आरोप लगाया था कि कांग्रेस सरकार अपनी चर्चित मॉडस ऑपरेंडी के तहत आईपीएस संजीव भट्ट का इस्तेमाल कर मोदी-शाह को फंसाने की कोशिश कर रही है। जी हां, बीजेपी में अरुण जेटली ही वह शख्स थे, जो मोदी और शाह के बुरे दिनों में उनके साथ खड़े नजर आए। शायद इसकी वजह रही कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं थे, तब से अरुण जेटली की उनसे दोस्ती रही। गुजरात में 2005 में हुए सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ का मामला जब गरमाया था, तो केंद्र में यूपीए सरकार के रहते 2010 में अमित शाह को जेल भी जाना पड़ा था। भले ही अमित शाह की तरफ से मुकदमा जाने माने वकील राम जेठमलानी लड़ रहे थे, मगर बचाव के लिए अहम कानूनी सलाह का बंदोबस्त अरुण जेटली ही कर रहे थे। वह गोधरा दंगों पर घिरे नरेंद्र मोदी और कथित फर्जी एनकाउंटर पर जांच का सामना कर रहे अमित शाह के लिए एक साथ कानूनी तर्कों का ढाल लेकर खड़े रहे। साल 2002 के गोधरा दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट से बनी एसआइटी ने नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दिया था। वहीं, सीबीआई की जांच झेल रहे अमित शाह भी सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस से बाद में बरी हो गए। विपक्ष की ओर से बिछाए गए कानूनी चक्रव्यूह को तब अरुण जेटली ने ही तोड़ा था। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने सदन से लेकर मीडिया तक इसे विपक्ष का दमन बताते हुए आवाज बुलंद की थी।

ऐसे बढ़ी थीं नजदीकियां

यूं तो मोदी और अरुण जेटली की जान-पहचान पुरानी थी, मगर रिश्ते प्रगाढ़ होने शुरू हुए 1998 से। जब बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नरेंद्र मोदी दिल्ली आए। उनके आने के कुछ ही समय बाद अरुण जेटली भी राष्ट्रीय प्रवक्ता बने। दोनों नेताओं में एक बात कॉमन थी कि अब तक वे कोई चुनाव नहीं लड़े थे। हालांकि बाद में वाजपेयी सरकार में मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली गुजरात से ही राज्यसभा गए। उसके कुछ ही समय बाद में जब गुजरात में भूकंप से भारी तबाही हुई, तो कुप्रबंधन के कारण केशुभाई पटेल के हटने के बाद नरेंद्र मोदी को बीजेपी ने मुख्यमंत्री बना दिया। गोधरा दंगे के बाद जब 2002 का विधानसभा चुनाव हुआ तो दिल्ली से अरुण जेटली को राज्य का चुनाव प्रभारी बनाकर भेजा गया था। कहा जाता है कि मोदी से अच्छे रिश्ते होने के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन्हें गुजरात भेजा था, ताकि दोनों नेताओं के मिलकर काम करने से पार्टी को विधानसभा चुनाव में लाभ हो। हुआ भी वही, मोदी के नेतृत्व और जेटली के चुनाव प्रबंधन ने 2002 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी के लिए सत्ता का बंदोबस्त कर दिया।

मोदी पर नहीं होने दिया था एक्शन

बताया जाता है कि जब गुजरात मे गोधरा के दंगे हुए तो वाजपेयी नरेंद्र मोदी को हटाने के पक्ष में थे। तब गोवा में आयोजित पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में एक्शन होना था। मगर यह जेटली ही थे, जिन्होंने आडवाणी के साथ मिलकर मोदी के पक्ष में पार्टी के ज्यादातर नेताओं को खड़ा कर दिया, जब बैठक में वाजपेयी ने देखा कि पार्टी के नेता मोदी के पक्ष में हैं तो उन्हें अपने कदम खींचने पड़े थे। बैठक से एक दिन अरुण जेटली अहमदाबाद जाकर नरेंद्र मोदी से मिले भी थे। यहीं से अरुण जेटली के साथ मोदी के रिश्ते प्रगाढ़ता के चरम बिंदु पर पहुंच चुके थे।

अमृतसर चुनाव हारे पर सरकार में कद बढ़ा

2014 में अरुण जेटली ने अपने राजनीतिक करियर में पहली बार लोकसभा का चुनाव अमृतसर से लड़ा। इस चुनाव में उन्हें कैप्टन अमरेंदर सिंह ने हरा दिया। इस हार से जेटली के कद पर कोई असर नहीं पड़ा और मोदी कैबिनेट में उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। वित्त मंत्री के तौर पर पीएम मोदी ने अरुण जेटली का ही चयन किया और राज्यसभा में भी उन्हें ही नेता सदन बनाया गया।

नम हुई हर आंख

उनकी मृत्यु देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है और व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए भी। मेरे पास अपना दुख व्यक्त करने के लिए कोई शब्द नहीं है।          एम वेंकैया नायडू , उपराष्ट्रपति

मैं अरुण जेटली जी के निधन से अत्यंत दुःखी हूं, जेटली जी का जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है। उनके रूप में मैंने न सिर्फ संगठन का एक वरिष्ठ नेता खोया है, बल्कि परिवार का एक ऐसा अभिन्न सदस्य भी खोया है, जिनका साथ और मार्गदर्शन मुझे वर्षों तक प्राप्त होता रहा।      अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री 

जेटली ने एक सार्वजनिक व्यक्ति, सांसद और मंत्री के रूप में एक लंबी पारी खेली और उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष 

अरुण जेटली एक कुशल वक्ता, सफल अधिवक्ता और सौम्य राजनीतिज्ञ के रूप में सदैव स्मरणीय रहेंगे। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि और शोकाकुल परिजनों के प्रति हार्दिक संवेदना।   अखिलेश यादव, अध्यक्ष (समाजवादी पार्टी) 

श्री जेटली का निधन भारतीय राजनीति बड़ी क्षति है। वह कुशल वक्ता, कानून के जानकार प्रसिद्ध वकील थे। उनके भाषण जीव के पत्थर साबित होंगे। दूसरे दलों में रहते हुए भी वह हमारे घनिष्ठ थे।     मुलायम सिंह यादव

राजनीतिक मतभेद के बावजूद उनके बीच स्वस्थ चर्चा होती थी और एकदूसरे के प्रति आदर था। उनके निधन को भारत के लिए बड़ी क्षति बताया।       शशि थरूर, कांग्रेस नेता 

देश और पार्टी ने श्री जेटली के रूप में बड़ा राजनेता खो दिया है। वह उनके भाई की तरह थे। वह अकसर उनसे कानूनी सलाह भी लेती थीं।    सुमित्रा महाजन

जेटली जी को अर्थव्यवस्था को निराशा के दौर से बाहर निकालने और वापस पटरी पर लाने के लिए हमेशा याद किया जाएगा।      राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री 

अरुण जेटली जी के निधन से बेहद दुखी हूं। एक बेहतरीन सांसद एवं बेमिसाल वकील, सभी दल उनका सम्मान करते थे। भारतीय राजनीति में उनका योगदान याद किया जाएगा।    ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री (पश्चिम बंगाल)

अरुण जेटली के निधन से न केवल उनके परिवार को, बल्कि उनकी पार्टी और पूरे देश को एक बड़ी क्षति पहुंची है।     के. पलानीस्वामी, मुख्यमंत्री (तमिलनाडू)

शादी में आशीर्वाद देने पहुंचे थे अटल बिहारी और इंदिरा

अरुण जेटली की शादी कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की पुत्री से हुई थी। जेटली कांग्रेस के पूर्व सांसद और जम्मू-कश्मीर के मंत्री रहे गिरधारी लाल डोगरा के दामाद थे। उनका विवाह 24 मई, 1982 को डोगरा की बेटी संगीता से हुआ था। उनकी ससुराल कठुआ जिला के हीरानगर के पैया गांव में है। जेटली की शादी में बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी तो शामिल हुए ही, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इस मौके पर नवदंपति को आशीर्वाद देने पहुंची थीं। यह वो समय था, जब जेटली को राजनीति में आए कुछ ही वर्ष हुए थे।

जहां उनके बच्चे पढ़े, वहीं ड्राइवर के बच्चे भी पढ़ाए

पूर्व वित्तमंत्री अरुण जेटली की शख्सियत का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि जिस स्कूल से उनके बच्चों ने पढ़ाई की उसी स्कूल में उन्होंने अपने ड्राइवर और निजी स्टाफ के बच्चों को भी पढ़ाया। पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली अपने निजी स्टाफ के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए कई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते थे। उनके परिवार की देखरेख भी अपने परिवार की तरह ही करते थे, क्योंकि वह इन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते थे। दूसरी ओर, कर्मचारी भी परिवार के सदस्य की तरह जेटली की देखभाल करते थे। उन्हें समय पर दवा देनी हो या डाइट, सबका बखूबी ख्याल रखते थे। अरुण जेटली ने एक अघोषित नीति बना रखी थी, जिसके तहत उनके कर्मचारियों के बच्चे चाणक्यपुरी स्थित उसी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां अरुण जेटली के बच्चे पढ़े थे। अगर कर्मचारी का कोई प्रतिभावान बच्चा विदेश में पढ़ने का इच्छुक होता था तो उसे विदेश में वहीं पढ़ने भेजा जाता था, जहां जेटली के बच्चे पढ़े हैं। ड्राइवर जगन और सहायक पद्म सहित करीब दस कर्मचारी जेटली परिवार के साथ पिछले दो-तीन दशकों से जुड़े हुए हैं। इनमें से तीन के बच्चे अभी विदेश में पढ़ रहे हैं।

सहयोगी का एक बेटा इंजीनियर दूसरा डाक्टर

श्री जेटली परिवार के खान-पान की पूरी व्यवस्था देखने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं। संसद में साए की तरह जेटली के साथ रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा इंजीनियर और दूसरा डाक्टर बन चुका है। इसके अलावा समूचे स्टाफ में सबसे अहम चेहरा सुरेंद्र थे। वह कोर्ट में जेटली के प्रैक्टिस के समय से उनके साथ थे। घर के आफिस से लेकर बाकी सारे काम की निगरानी इन्हीं के जिम्मे थे। जिन कर्मचारियों के बच्चे एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते थे, उसमें जेटली फीस से लेकर नौकरी तक का मुकम्मल प्रबंध करते थे। जेटली ने 2005 में अपने सहायक रहे ओपी शर्मा के बेटे चेतन को लॉ की पढ़ाई के दौरान अपनी 6666 नंबर की एसेंट कार गिफ्ट दी थी।

सैलरी हो या मदद सबकुछ चैक से

श्री जेटली वित्तीय प्रबंधन में सावधानी बरतते थे। एक समय वह अपने बच्चों (रोहन व सोनाली) को जेब खर्च भी चैक से देते थे। इतना ही नहीं, स्टाफ को वेतन और मदद सबकुछ चे से ही देते थे। उन्होंने वकालत की प्रैक्टिस के समय ही मदद के लिए वेलफेयर फंड बना लिया था। इस खर्च का प्रबंधन एक ट्रस्ट के जरिए करते थे। जिन कर्मचारियों के बच्चे अच्छे अंक लाते हैं, उन्हें जेटली की पत्नी संगीता भी गिफ्ट देकर प्रोत्साहित करती हैं।

पिता की तरह ही वकील हैं बेटा-बेटी

अरुण जेटली के पिता का नाम महाराज किशन जेटली था, जो एक वकील थे और जबकि माता रतन प्रभा जेटली थीं।  जेटली की पत्नी का नाम संगीता है। उनकी शादी साल 1982 को हुई। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी। बेटे का नाम रोहन है और बेटी का नाम सोनाली। अरुण जेटली की बेटी और बेटा दोनों अपने पिता की तरह वकील हैं। ये तीसरी पीढ़ी है, जिसने वकालत में अपना करियर बनाया है।

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