जल प्रलय से सैलानियों में खौफ

मणिकर्ण के होटल खाली; कुल्लू में पर्यटन व्यवसाय को लगा झटका, तीन दिनों में कम हुए 80 प्रतिशत टूरिस्ट

कुल्लू -देश-विदेश पर्यटन के लिए विख्यात जिला कुल्लू में पर्यटन को झटका लग गया है। जिला कुल्लू के अधिकतर होटल खाली हो गए हैं, जिससे पर्यटन कारोबारी मायूस हो गए हैं। कुल्लू, मनाली और मणिकर्ण की बरसात ने जिला कुल्लू को डरा दिया है। पर्यटकों का पसंदीदा पर्यटन स्थल मणिकर्ण के पर्यटन को तीन दिनों में हुई बारिश ने पूरी तरह से चौपट कर दिया है। सड़क की बदहालत को देखते हुए पर्यटक मणिकर्ण आने बंद हुए हैं। सरसाड़ी नामक स्थान पर संकरी सड़क क्षतिग्रस्त होने से मणिकर्ण-भुंतर के बीच बडे़ वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। ऐसे में इस ओर पर्यटक नहीं आ रहे हैं। यही नहीं, यहां पर सड़क बदहाल होने से घाटी के लोगों को मुश्किल हो गया है। पर्यटन व्यवासायियों के मुताबिक तीन दिनों की बारिश ने मणिकर्ण घाटी का 80 प्रतिशत पर्यटन कारोबार घट गया है। बता दें कि घाटी में मात्र 20 प्रतिशत टूरिस्ट रहे हैंं, जो सरसाड़ी के पास सड़क की दशा खराब होने से घाटी के कुछ होटलों में रुक गए हैं, लेकिन पिछले दो दिनों में घाटी की ओर कोई भी देशी-विदेशी पर्यटक नहीं आ पाए। मिनी स्विर्ट्जलैंड के नाम विख्यात पर्यटन स्थल कसोर, धार्मिक स्थल मणिकर्ण, पर्यटकों का पसंदीदा बना तोष, तुलगा, पुलगा, कालका में दस प्रतिशत भी पर्यटन नहीं है। ऐसे में होटल व्यवसासियों में मायूसी छा गई है, जहां 15 अगस्त के बाद मणिकर्ण घाटी की तरफ काफी संख्या में पर्यटक पहुंचते थे और होटलों की आनलाइन बुकिंग भी जमकर होती थी, लेकिन इस बार 15 अगस्त के बाद का पहला सप्ताह ने ही होटल कारोबारियों को मायूसी हाथ लगी है। बरसात के सितम ने घाटी की सड़कों को जोखिम भरा बना दिया, जिससे पर्यटक यहां आने से कतरा रहे हैं।  वहीं, मणिकर्ण घाटी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन ठाकुर का कहना है कि बरसात से 80 प्रतिशत पर्यटन कारोबार चौपट हो गया है। सड़क ठीक नहीं होने से पिछले दिनों से पर्यटक घाटी की ओर नहीं आ पा रहे हैं। पर्यटक डरे हुए हैं। हालांकि पर्यटकों ने आनलाइन बुकिंग भी कर रखी है, लेकिन पिछले तीनों में लगातार हुई बरसात से पर्यटक डरा हुआ है। अध्यक्ष ने कहा कि मणिकर्ण घाटी की सड़क की हालत को सुधारने में सरकार, प्रशासन और लोक निर्माण नाकाम साबित हुए हैं, जिसका खमियाजा पर्यटन कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि किसान-बागबानों के साथ-साथ आम जनता को भी झेलना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते सरकारी तंत्र सड़क की दशा को सुधारने में जाग जाता तो आज यह सितम देखने को नहीं मिलता। अध्यक्ष ने कहा कि कई बार सरकार और प्रशासन और विभाग को सरसाड़ी में सड़क को चौड़ा करने  के लिए लिखित रूप में पत्र भेजें हैं, लेकिन उन पर कोई उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अध्यक्ष ने कहा कि  जो पैसा जिस खतरनाक प्वाइंट पर खर्च होना था, उसे विभाग ने आगे-पीछे सड़क की कटिंग के लिए खर्चा है, लेकिन जोखिम भरे इस प्वाइंट पर कुछ नहीं किया है। उनका कहना है कि इस प्वाइंट के क्षतिग्रस्त होने से बड़े वाहनों के लिए मार्ग दो दिनों से बंद पड़ा, जिससे पर्यटन कारोबार को 80 प्रतिशत घट गया, जबकि किसानों-बागबानों को भी झटका लगा है। उन्होंने सरकार, प्रशासन और लोक निर्माण से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द इस प्वाइंट के लिए अस्थायी हल ढूंढा जाए, ताकि घाटी के लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

बंजार की सड़कों पर ल्हासे गिरने से सहमे लोग

बंजार । भारी बारिश होने पर उपमंडल बंजार के कई सड़क मार्गों पर भारी ल्हासों का आलम बिछ गया है। ल्हासेे  गिरने से उपमंडल के लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतें हो रही है। कई क्षेत्रों से लोग कई किलोमिटर पैदल चल कर अपनी मंजिल को पा रहे हैं। ज्यादातर स्कूली बच्चों को सड़कों पर गिरे ल्हासे से मुश्किल आ रही है। वहीं पर सहायक अभियंता लोनिवि के आरएल ठाकुर का कहना है कि विभाग के कर्मचारी सड़कों को बहाल करने में जुटे  हैं।

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