ट्रिब्यूनल के सभी मामले हाई कोर्ट शिफ्ट

कर्मचारियों के 21 हजार से ज्यादा केसों की अब उच्च न्यायालय में सुनवाई 

शिमला – हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण (ट्रिब्यूनल) के सभी लंबित मामले हाई कोर्ट को हस्तांतरित कर दिए गए हैं। करीब 21 हजार से ज्यादा मामले एक साथ हाई कोर्ट को हस्तांतरित किए गए हैं, जिसके लिए राज्य सरकार ने अध्यादेश लाया है। राज्यपाल की मंजूरी से यह अध्यादेश लाया गया है, जिसके बाद विधानसभा में संशोधित विधेयक लाया जाएगा। चूंकि अभी विधानसभा का सत्र नहीं चल रहा है, लिहाजा सरकार के लिए जरूरी था कि ट्रिब्यूनल भंग होने के बाद उसके मामलों को हाई कोर्ट को हस्तांतरित किया जाए। इसके लिए अध्यादेश लाना जरूरी था। विधानसभा के आने वाले मानसून सत्र में संशोधित विधेयक लाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को भंग कर नई व्यवस्था शुरू होगी। बता दें कि इससे पहले भी ट्रिब्यूनल को भंग किया गया था और तब सीधे हाई कोर्ट ही कर्मचारी तबादलों के मामले देख रहा था। पूर्व वीरभद्र सरकार के समय में ट्रिब्यूनल की बहाली हुई थी, लेकिन वर्तमान जयराम सरकार ने भी इसे भंग कर दिया। ट्रिब्यूनल में कर्मचारियों के तबादलों व उनकी भर्ती व पदोन्नति से जुडे़ मसले आते हैं और इस समय 21 हजार से अधिक मामले उसके पास लंबित पड़े हुए थे। अधिकांश मामलों में ट्रिब्यूनल ने स्टे लगा रखा था। हाई कोर्ट को मामले हस्तांतरित करने के लिए कानूनी प्रक्रिया ही अपनानी पड़ती है, जिस पर विधानसभा में एक्ट में संशोधन किया जाएगा, जिससे पहले सरकार ने अध्यादेश लाकर सभी मामलों को हस्तांतरित कर दिया है। अब इन मामलों पर हाई कोर्ट ही आगामी सुनवाई करेगा और उसके माध्यम से ही फैसले आएंगे। इस अध्यादेश का नाम हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण (विनिश्चित मामलों और लंबित आवेदनों का अंतरण अध्यादेश, 2019)है। इसमें लिखा गया है कि जो मामले हाई कोर्ट से ट्रिब्यूनल को भेजे गए थे और जो नए मामले ट्रिब्यूनल के पास चल रहे थे, उन्हें हाई कोर्ट ही देखेगा। इसके साथ ट्रिब्यूनल का स्टाफ भी जरूरत के अनुसार हाई कोर्ट को हस्तांतरित हो गया है। कुछ कर्मचारियों को सरकार दूसरे विभागों में भी भेज सकती है। वहीं ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार को पहले ही ओएसडी लगा दिया गया है, जो सभी मामलों के हस्तांतरण तक यह काम देखेंगे।

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