तलासी में लड़की नहीं देना चाहते परिजन

बरसात में एक तरफ खड्डली नाला तो दूसरी तरफ शुक्कर खड्ड करती है घेराबंदी

हमीरपुर –उपमंडल बड़सर की ग्राम पंचायत धनेड़ के गांव तलासी में कोई भी अपनी लड़की नहीं देना चाहते। कारण साफ है कि बरसात में इस गांव का संपर्क पूरी दुनिया से कट जाता है।  एक तरफ खड्डली नाला तो दूसरी तरफ से शुक्कर खड्ड गांव की घेराबंदी कर देती है। तीन महीने तक यह गांव पूरी तरह दो खड्डों का गुलाम बन जाता है। हालात ऐसे हैं कि इस गांव के करीब 450 ग्रामीण नारकीय जीवन जी रहे हैं। गांव को कहीं से भी सड़क की सुविधा नहीं है। गांव में बनाई कई एक सड़क का कहीं भी लिंक नहीं। आजादी के 73 साल बाद भी यह गांव पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हो पाया है। बरसात में एक तरफ से खड्डली नाला तो दूसरी तरफ से शुक्कर खड्ड गांव की घेराबंदी कर देती है। बरसात के करीब तीन महीने यह गांव खुद को गुलाम समझता है। अगर गांव में कोई बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बनता है। खड्ड पार करने के लिए ग्रामीण ही एक दूसरे का सहारा बनते हैं। जब शुक्कर खड्ड पूरे उफान पर होती है, तो मरीज की जान जाए तो जाए, इसे पार करना किसी के वश में नहीं। अब आप सहज की अंदाजा लगा सकते हैं कि ये गांव कैसा जीवन जी रहा है। तलासी गांव में आज तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। नाले पर पुल न होने के कारण बरसात में लोग जान हथेली पर रखकर घर से निकलते हैं। स्कूली बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार प्रशासन और स्थानीय नेताओं को इसके बारे जानकारी दी गई। उन्हें बताया कि कि यहां पर सड़क और पुल की व्यवस्था की जाए, ताकि बरसात के दिनों में लोगों को परेशानी का सामना न हो।  ग्रामीणों अमरनाथ, अनिल कुमार, चंदू राम, गरीब दास, राम रत्न, दीवान चंद, जुल्फी राम, सुभाष, ओम प्रकाश, ज्ञान चंद, संजीव कुमार, विमला देवी, उर्मिला देवी, सुनीता देवी, संतोष कुमारी, कमला देवी, अंजना कुमारी, विनोद कुमार का कहना है कि उनका सरकार से विश्वास उठ चुका है। ताउम्र नर्क भरा जीवन जीएंगे, लेकिन मताधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे।

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