तालाब सूखे…पेयजल योजनाओं पर सकंट

गगरेट -पुराने जमाने में बेशक वैज्ञानिक पद्धति इतनी विकसित नहीं थी लेकिन हमारे बुजुर्ग जल के महत्त्व से भली-भांति परिचित थे। परंपरागत जल स्रोत री-चार्ज रहें शायद इसलिए भी देश में तालाबों को विकसित किया गया और ये तालाब ही कई स्थानों पर पशुओं और प्राणियों के लिए पेयजल स्रोत के भी महत्त्वपूर्ण साधन रहे। बदलते परिवेश में वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल कर बेशक हमने नलकूप तो स्थापित कर लिए लेकिन परंपरागत तालाबों का रखरखाव करना ही भूल गए। यही वजह है कि जिले में कई गांवों में बुजुर्गों द्वारा बनाए गए तालाब या तो समतल मैदान में बदल गए या इनका अस्तित्व विकास कार्यों की बलि चढ़ गया। गर्मी के मौसम में पेयजल योजनाओं का जल स्तर नीचे गिर जाने का एक बड़ा कारण तालाबों के प्रति उदासीन रवैया भी है। जिले में शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां पर पुराने समय से ही तालाब विकसित न हुए हों। हालांकि जब तक इन तालाबों की तरफ ध्यान दिया गया तब तक ये तालाब भी पानी से लबालब रहते थे लेकिन जैसे-जैसे व्यक्तिगत हित हावी हुए वैसे-वैसे ये तालाब भी अस्तित्व की जंग लड़ने को मजबूर हो गए। गगरेट कस्बे में ही जहां अब आलीशान बस अड्डा है, वहां कभी तालाब हुआ करता था लेकिन बस अड्डा निर्माण के लिए इस तालाब की बलि ले ली गई। महज गगरेट कस्बा ही नहीं बल्कि जिले में अधिकांश गांवों में कई तालाब अपना वजूद ही गंवा बैठे हैं। हालांकि कभी ये तालाब गर्मी के मौसम में लोगों की पानी संबंधी जरूरत पूरी करने के साथ पशुओं के लिए भी वरदान साबित होते थे लेकिन इनके तिरस्कार के साथ ही आम जनमानस को भी कई समस्याओं के रू-ब-रू होना पड़ रहा है। भू-जल वैज्ञानिकों ने भी जिले में भूमिगत जलस्तर गिरने की पुष्टि की है। इसका एक बड़ा कारण तालाबों की अनदेखी भी माना जा रहा है। हालांकि तालाब जब तक सुरक्षित थे तब तक सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग की सिंचाई एवं पेयजल योजनाएं भी पूरा डिस्चार्ज देती थीं लेकिन तालाबों के सूख जाने के कारण इन योजनाओं के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि महत्त्वाकांक्षी मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों के रखरखाव पर बल तो दिया गया लेकिन यह प्रक्रिया भी महज खानापूर्ति तक सीमित रही।  उधर खंड विकास अधिकारी हेमराज का कहना है कि मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों को तालाबों के निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि तालाबों में जल संग्रहण भी हो सके इस पर भी ध्यान दिया जाएगा। वहीं सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहायक अभियंता अश्विनी बंसल का कहना है कि तालाबों के संरक्षण के लिए विभाग के पास फिलहाल कोई योजना नहीं है। स्थानीय लोग भी अपने स्तर पर इनके संरक्षण के लिए आगे आएं तो बेहतर होगा।

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