दरकते पहाड़-उफनती नदियां

खतरे के साए में जी रहे देवभूमि के लोग, कुल्लू में नदी-नाले कभी भी मचा देते हैं तबाही

कुल्लू –वर्ष 1992 से शुरू हुए बाढ़, बादल फटना और भू-स्खलन का सितम जिला कुल्लू के लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है। पिछले 27 वर्षों से बरसात रौद्र रूप धारण करती जा रही है। बरसात के मौसम में कैसे निपटा जाए, इसका गंभीर सेल्यूशन सरकार और सरकार का आपदा प्रबंधन भी ढूंढ नहीं पाया है। लिहाजा, जिला कुल्लू के लिए बरसात लगातार आफत बनती जा रही है। प्रदेश के कुल्लू जिला के शाटनाले में 1992 में पहली बादल फटा था और यहां पर तबाही मचाई थी। इसके बाद यह क्रम जारी है। पर्वतारोहियों और पर्यटकों के लिए स्वर्ग कहलाए जाने वाले जिला कुल्लू के नदी-नाले दुनिया के लोगों को खौफ  सा मंजर दिखा रहे हैं। हाल ही में अगस्त में हुई बारिश से जिला कुल्लू के नदी-नालों ने तबाही कर दी है। पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, संपर्क मार्ग टूट गए है। सितंबर, 2018 की तबाही को जिलावासी भूल नहीं पाए थे। पिछले चार-पांच दिनों पहले हुई बारिश से जगह-जगह बाढ़ आने और भू-स्खलन होने से दस करोड़ का नुकसान हुआ है। सड़कें ध्वस्त हो गई हैं। रास्ते टूट गए हैं। भू-स्खलन होने से कई जगह खतरा बढ़ गया है। 16 घर, स्कूल बाढ़ और भू-स्खलन की चपेट में आ गए हैं।

कभी भी आ जाता है पागल नाला

सैंज घाटी का पागलनाला लोगों को पिछले तीन दशकों से लगातार परेशान कर रहा है। साल में करीब बीस से अधिक बार पागलनाले में बाढ़ आ जाती है। सैंज घाटी के लोग जान-जोखिम में डालकर यहां से आरपार होते हैं। हैरानी की बात यह है कि बारिश के दौरान इस नाले से किस तरह से निपटा जाए इसके लिए न सरकार और न ही जिला प्रशासन हल ढूंढ पाया है। यही नहीं, सैंज घाटी में बिजली परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन परियोजना प्रबंधन भी यहां पर विफल हो गया है, जिसका खामियाजा यहां की जनता को भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि इसी वर्ष फरवरी माह में बाढ़ आने से एक जीप भी बह गई है। सड़क 100 मीटर दायर में दलदल बनती है।

एक साल में करोड़ों बहे

बता दें कि वर्ष 2018 में जिला कुल्लू में बाढ़ आने से 160 करोड़ से अधिक का नुकसान आंका गया है। इस तबाही को लगभग एक साल बीत गया और वर्ष 2019 के इस अगस्त माह के चार दिनों में दस करोड़ का नुकसान हुआ है। हालांकि अभी तक वर्ष 2018 में कई जगह बाढ़ की भेंट चढ़े पुलों का निर्माण तक नहीं हुआ है। जान-जोखिम भी डालकर लोग खड्ड, नालों को आर-पार कर रहे हैं। इसका एक उदाहरण पुंथल पंचायत का खनौड़ नाला भी है। सितंबर, 2018 में नाले में आई बाढ़ से दो पुल बह गए हैं, लेकिन इसके बाद आज दिनों तक पुल निर्माण के लिए कोई योजना तैयार तक नहीं की गई है।

ये नाले कभी भी मचा देते हैं तबाही

जिला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी का कटागला नाला, पतलीकूहल में बड़ग्रां नाला, फोजल नाला, सैंज में पागल नाला, आनी का कोटनाला, सैंज की न्यूली खड्ड, काइस नाला आदि शामिल हैं।  ब्रह्मगंगा, मलाणा नाला, गड़सा नाला, पुंथल पंचायत का खनौड़नाला सहित जिला के अन्य नालों में बाढ़ आने से लगातार तबाही मच रही है।

क्या कहता है प्रशासन

उपायुक्त कुल्लू डा. ऋचा वर्मा का कहना है कि हाल ही में जिलाभर में हुई बारिश से नुकसान हुआ है। पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। घरों को नुकसान पहुंचा है। नुकसान का जायजा अधिकारियों ने लिया है। सारी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। लोगों को मुसीबत न हो आपदा प्रबंधन के साथ अधिकारी और कर्मचारी अलर्ट रहते हैं।

दोहरना नाला भी बना रोद्र

जिला का दोहरानाला भी रौद्र रूप धारण कर लेता है, जिससे तबाही मच रही है। बता दें कि पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्र की दो पुलियां बह गईं। हरीपुर में एक मकान पर पहाड़ी का मलबा गिर गया। एक गाय इसमें दबकर मर गई। बजौरा नाले के साथ बना गोसदन भी पानी में बह गया।

बड़ाग्रां नाले की दहशत

पतलीकूहल में बड़ाग्रां नाले में बादल फटने से बाढ़ आ गई। इस नाले में लगातार बाढ़ आ रही है। पहलीकूहल क्षेत्र की जनता सहमी हुई है। हाल ही में यहां पर घरों में घुस गया। पतलीकूहल ट्राउट फार्म को भी नुकसान पहुंचा।  बड़ाग्रां नाले में बादल फटने से जब रात को बाढ़ आई तो लोग अपने घरों में सो रहे थे। बारिश के दौरान लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हो जाते हैं। अब हालात ये हैं कि पतलीकूहल के लोगों में बाढ़ के नाम का डर बैठ गया है। पिछले साल भी इसी नाले में बाढ़ आई थी, जिससे पतलीकूहल के लोगों के सभी घरों में पानी घुस गया था और बाढ़ ने पतलीकूहल पुल भी क्षतिग्रस्त कर दिया था।  वर्ष 2018 में भी यहां पर तबाही मची है। कुछ लोग क्षेत्र से पलायन करने के बारे में सोच रहे हैं।

 

भुंतर का कांगड़ी नाले से नुकसान

वर्ष 2018 से पारला भुंतर क्षेत्र में कांगड़ी नाला भी लोगों को खूब डरा रहा है। बता दें कि इस बार जुलाई और चालू इस अगस्त महीने में कांगड़ी नाले में तीन बार बाढ़ आई। गत दिनो भुंतर क्षेत्र के अंबेडकर नगर में भारी बारिश के कारण आए कांगड़ी नाले ने तबाही मचाई थी। बाढ़ आने से नाले का मलबा स्थानीय लोगों के घरों,  दुकानों व अनार के बागीचों में घुस गया था तो प्राथमिक पाठशाला बड़ा भुइन के प्रांगण व भवन में भी नाले का मलबा जा घुसा था। नाले में आई बाढ़ के कारण आधा दर्जन से अधिक बागबानों के बागीचों को भी भारी नुकसान पहुंचा था और अनार की फसल को इसने चपेट में लिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ समय से यहां पर नाला लगातार परेशान कर रहा है। इसका कोई भी समाधान न होने से यहां के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की बारिश ने जिला में अपना रौद्र रूप दिखाना आरंभ कर दिया है तो ऐसे में यहां के लोगों के लिए नाला सरदर्द बन रहा है।

कटागला नाले में बाढ़ से सहमें लोग

मणिकर्ण घाटी के कटागला नाले में सितंबर, 2018 से बादल फटने शुरू हो गए हैं, जिससे ग्रामीण सहमें हुए हैं। बादल फटने से कटागला जलमग्न हो रहा है। हाल ही में भी यहां पर आई बाढ़ से भारी नुकसान हो गया है। सितंबर, 2018 की बारिश ने तो यहां गांव को खड्ड की तरह रूप दे दिया है। उस दौरान यहां पर तीन विदेशी पर्यटक तक फंस गए थे। मणिकर्ण घाटी की कसोल पंचायत के कटागला गांव में एक बार फिर आई बाढ़ ने 200 लोगों को दहशत में डाल दिया है। यहां आई बाढ़ में वन विभाग द्वारा दी गई क्रेटवाल बाढ़ की भेंट चढ़ गई है।

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