धीरे-धीरे सरक रहे लटके चार प्रोजेक्ट

शिमला – सालों से लटके बिजली बोर्ड के चार नए प्रोजेक्ट धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। बोर्ड कई साल से विदेशी फंडिंग एजेंसी से वित्तीय मदद लेने को हाथ-पांव मार रहा है, जिसमें अभी तक उसे सफलता नहीं मिल पाई है। हालांकि विदेशी बैंक केएफडब्ल्यू उसे पैसा देने के लिए तैयार है, लेकिन अभी तक औपचारिकताएं ही पूरी नहीं हो पाई हैं। सूत्रों के अनुसार चार प्रोजेक्ट्स की डीपीआर कंसल्टेंट एजेंसी ने तैयार कर दी है। इसमें कुछ आपत्तियां बोर्ड प्रबंधन ने दर्ज की हैं, जिन्होंने कंसल्टेंट एजेंसी को इन्हें दूर करने के लिए कहा है। बताया जाता है कि अगले महीने केएफडब्ल्यू बैंक का मिशन दिल्ली आ रहा है, जहां इकोनॉमिक अफेयर विभाग से बातचीत होगी। उम्मीद की जा रही है कि इस बार प्रोजेक्ट्स की सबसे बड़ी बाधा दूर हो जाएगी। बोर्ड को इन प्रोजेक्ट्स का निर्माण करने के लिए 700 करोड़ की जरूरत है। चारों परियोजनाएं, जिनमें साईकोठी-वन, साईकोठी-टू, देवीकोठी व हेल शामिल हैं, की कुल क्षमता 70 मेगावाट की है।  इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार है और केएफडब्ल्यू की सैद्धांतिक मंजूरी भी है। फिर भी ये प्रोजेक्ट लटके हुए हैं। वैसे बिजली बोर्ड अब उत्पादन का काम नहीं करता, जिसके पास संचारण का ही काम रह गया है, लेकिन फिर भी पिछली सरकार ने उसे ये परियोजनाएं निर्माण के लिए दी थीं। ऊहल परियोजना के निर्माण में लगातार देरी उसकी कार्यप्रणाली पर पहले ही सवाल उठा चुकी है, ऐसे में यह प्रोजेक्ट लटकने से भी मामला गड़बड़ाया हुआ है। केएफडब्ल्यू के साथ यह मसला जल्द नहीं सुलझता, तो इसका नुकसान बिजली बोर्ड को होगा, क्योंकि फिर सरकार उससे यह प्रोजेक्ट वापस ले सकती है।

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