नशे के खिलाफ जंग लड़ने को रोडमैप

शिमला में होगी उत्तरी भारत के मुख्यमंत्रियों की तीसरी क्षेत्रीय बैठक, फिलहाल तिथि तय नहीं

शिमला – नशे के खिलाफ जंग लड़ने के लिए उत्तरी भारत के मुख्यमंत्रियों की तीसरी क्षेत्रीय बैठक अब शिमला में होगी। हालांकि अभी तिथि तय नहीं की गई है, लेकिन पिछले दिनों चंडीगढ़ में हुई अहम बैठक के दौरान सभी उत्तर क्षेत्रीय राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सहमति जताई है। ऐसे में तीसरी बैठक शिमला में होनी सुनिश्चित हुई है। बताया गया कि हिमाचल प्रदेश की सीमाएं कई अन्य राज्यों से लगती हैं, इसलिए अंतरराज्यीय स्तर पर नशा तस्करी से निटपने के लिए एक संयुक्त कार्य योजना तैयार की जाएगी।  प्रदेश में ड्रग्स का तंत्र अपने पांव न पसार सके, इसके लिए प्रदेश सरकार ने उच्चाधिकारियों के साथ मंथन किया और फिर पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा एकजुट होकर कारगर रणनीति बना दी है। हालांकि अब तक दो बार चंड़ीगढ़ में ऐसी अहम बैठकें हुई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। बताया गया कि पंचकूला में रीजनल कमांड सेंटर की स्थापना हुई थी, जिसे अब और सुदृढ़ करने के लिए सभी उत्तरी क्षेत्र के राज्यों की भूमिका सुनिश्चित की गई। इस रीजनल कमांड केंद्र में प्रदेश के दो अधिकारियों को नियुक्त कर दिया जाएगा। प्रदेश में उठाए गए कारगर कदमों के कारण हिमाचल प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी से संबंधित गिरफ्तारियों में इजाफा हुआ है। बॉर्डर एरिया में सूचनाओं के आदान-प्रदान का तंत्र मजबूत करने के लिए सभी पड़ोसी राज्यों में तालमेल बनाए रखने पर भी मंथन हुआ। ऐसे में अब आने वाले समय में उत्तरी भारत के राज्यों की क्षेत्रीय बैठक की मेजबानी हिमाचल करेगा।

सात महीने में 1622 मामले हुए दर्ज

प्रदेश में अब तक सात महीने के अंतराल में यानी जुलाई तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 1622 मामले दर्ज हुए। इस अवधि में 141.776 किलो चरस, 7.095 किलो अफीम 3.599 किलो हेरोइन, 5810 नशे की गोलियां और 50 हजार 700 कैप्सूल पकड़े गए। कुल 789 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 27 महिलाएं व दो विदेशी शामिल थे। गिरफ्तार हुए लोगों में 40 प्रतिशत पंजाब के व 25 प्रतिशत हरियाणा राज्य से संबंधित थे।

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