पहले ही दिन विपक्ष आक्रामक

रायजादा के पीएसओ-ड्राइवर पर कार्रवाई के खिलाफ हंगामा

शिमला – ऊना सदर के विधायक सतपाल रायजादा के पीएसओ-ड्राइवर पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस ने मानसून सत्र के पहले दिन जमकर हंगामा किया। इस मुद्दे को विधायकों के इंस्टीच्यूशन का मामला बताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने नियम-67 के तहत चर्चा का प्रस्ताव रखा। इसकी अनुमति न मिलने पर कांग्रेस ने पहले ही दिन आक्रामक रवैया अपनाते हुए सत्तापक्ष के खिलाफ लगातार दो घंटे तक सदन के भीतर जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान विपक्ष के विधायक बेल में पहुंचकर धरने पर भी बैठ गए। इस दौरान विपक्षी विधायक दो बार सदन से बाहर भी चले गए। हंगामे के साथ शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही हालांकि पूरा दिन चलती रही, बावजूद इसके कांग्रेस के विधायक अंतिम क्षण तक सदन के भीतर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे और उनका दो बार सदन से बाहर जाना वाकआउट भी नहीं माना गया। शोकोद्गार के बाद नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार को विधायकों के इंस्टीच्यूशन का ध्यान रखना चाहिए। ऊना में कांग्रेस विधायक सतपाल रायजादा के चालक तथा निजी सुरक्षा अधिकारी के खिलाफ बदले की भावना से पुलिस केस बनाया गया। ऊना में दर्ज इस एफआईआर का हवाला देते हुए मुकेश अग्निहोत्री हाउस में बोलने के लिए अभी खड़े ही हुए थे कि विस अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल ने उन्हें रोक दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि नियम-67 के तहत इस नोटिस पर सरकार से जवाब मांगा है। इस आधार पर इसकी चर्चा के लिए विचार किया जाएगा। इससे नाराज विपक्ष ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष के सभी सदस्य अपनी कुर्सियों से उठकर सदन के बीचोंबीच बेल में खड़े होकर सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। पक्ष-विपक्ष के काफी विधायक काफी देर तक आमने-सामने नारेबाजी करते रहे। विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं चलने दी। काफी देर तक भी जब नारेबाजी नहीं रुकी तो अध्यक्ष ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया। इसके बाद विपक्ष भी नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गया। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में मुद्दा उठाया था कि ऊना के विधायक सतपाल रायजादा के खिलाफ साजिश रची गई।

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