बरसात में खून की प्यासीं हो रहीं खौफनाक खड्डें

2014 की रात आज तक नहीं भूल पाए लोग, किनारों पर रहने वाले लोगों को हरदम रहता है हादसे का डर

हमीरपुर –हमीरपुर जिला में करीब एक दर्जन से अधिक ऐसी खड्डें और नाले हैं, जो बरसात के मौसम में काफी रौद्र रूप दिखाती हैं। इनके किनारे रहने वाले लोग हरदम खतरे के साए में जीवनयापन कर रहे हैं। वर्ष 2014 की अगस्त माह की रात को हुई भारी बारिश को लोग आज तक नहीं भूल पाए हैं। जब भी लोगों को वह मंजर याद आता है, तो उनकी आंखों से आंसू तक निकल आते हैं, क्योंकि उन्हें हर बरसात वही जख्म झेलने पड़ रहे हैं। कुनाह खड्ड, बाकर खड्ड, पुंग खड्ड, सीर खड्ड और मान खड्ड ने जिलाभर में काफी तबाही मचाई थी। भोरंज उपमंडल के जाहू में सीर खड्ड ने वर्ष 2014 में जहां ब्रिज वैली पुल बहा दिया था, वहीं तीन लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। इसके अलावा नादौन में बहने वाली कुनाह खड्ड उसी वर्ष एक डेरी फार्म को बहाकर ले गई थी। डेरी फार्म में बंधी आधा दर्जन से अधिक भैंसें मौत का ग्रास बन गई थीं। नादौन में ही बहने वाली मान खड्ड का पानी भी काफी उपद्रव मचाते हुए गौना करौर में एक दर्जन से अधिक दुकानों में घुस आया था। इसके चलते दुकानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। हाल ही में हुई भारी बारिश से मान खड्ड में जहां हड़ेटा स्कूल का एक छात्र व दो अध्यापक पानी के तेज बहाव में फंस गए थे। वहीं, सालों से बंद पड़ी निजी कालेज की बिल्डिंग का आधा हिस्सा भी पानी के तेज बहाव में कागज के पत्ते की तरह बह गया। इसके अलावा टौणीदेवी क्षेत्र में बहने वाली कुनाह खड्ड, बाकर खड्ड और पुंग खड्ड में भी वर्ष 2014 में बारिश से कई श्मशानघाट बह गए थे। यहां तक कि खड्डों को जाने वाले रास्ते भी गायब हो गए थे। इसके अलावा लोगों की उपजाऊ भूमि तक बह गई थी, जिसके चलते किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इन खड्डों के किनारे जीवन बसर कर रहे लोगों की उपजाऊ भूमि हर वर्ष बरसात में बह रही है। इसके अलावा खड्डों का पानी फसलों को बुरी तरह से तबाह कर रहा है। यही नहीं, जब ये खड्डें उफान पर होती हैं, तो कई गांवों का कनेक्शन जिला से कट जाता है। उन्हें खड्डों का पानी शांत होने के उपरांत ही घरों से बाहर निकलना पड़ता है। जिलाभर में नजर दौड़ाई जाए, तो भोरंज उपमंडल में सीर, चैंथ, कुनाह, सुनैहल, लिंडी इत्यादि खड्डें बरसात में खूब कहर बरपाती हैं। खासकर सीर, चैंथ और सुनैहल खड्ड आगे जाकर एक जगह इकट्ठा होती हैं और ये क्षेत्र में हर वर्ष काफी तबाही मचाती हैं। इसके अलावा सीर व चैंथ खड्ड किनारे बसे नगरोटा गाजियां, खड्ड बाजार, बधानी व चंदरुही बाजार में वर्ष 2014 में बाढ़ से कई लोगों के घरों व दुकानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा था। इसके अलावा सुजानपुर के वार्ड नंबर आठ में बहने वाला ब्रह्मपुरी महौला नाला बरसात में लोगों की दिक्कतें बढ़ा देता है। बीते वर्ष भी नाले का मलबा करीब 100 घरों में घुस आया था।, जबकि दो वाहन पानी के बहाव में बह गए थे। बड़सर उपमंडल में शुक्कर खड्ड, गवारड़ खड्ड व सरियाली खड्डें भी बरसात में ऊफान पर रहती हैं। हालांकि सरियाली खड्ड जब रौद्र रूप में होती है, तो झंझियाणी, नारा, दरकोटी व जजल गांव के लोगों का कनेक्शन हमीरपुर जिला से कट जाता है। लोगों को खड्ड शांत होने के उपरांत ही पार करनी पड़ती है। इसके अलावा हाल ही में हुई भारी बारिश से धंगोटा में भी शुक्कर खड्ड के तेज बहाव से करीब दस दुकानों को खतरा उत्पन्न हो गया था। बरसात के मौसम में खड्डें हर वर्ष काफी तबाही मचा रही हैं, जो कि एक चिंता का विषय है।

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