मंदिर संवारने पर ही खर्च हो चढ़ावे का पैसा

कांगड़ा -माता बज्रेश्वरी मंदिर के श्रद्धालुओं के चढ़ावे का धन अगर मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया, तो मंदिर प्रशासन को ट्रस्टियों के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। मंगलवार को मंदिर ट्रस्ट की होने जा रही बैठक में एक करोड़ रुपए की राशि मुख्यमंत्री राहत कोष में देने को लेकर फैसला लिया जा सकता है । अधिकांश ट्रस्टियों का मत है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन को मंदिर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए किए जाने  वाले विकास पर खर्च हो । दीगर  है माता के भक्त यहां सुविधाओं के लिए दान देकर जाते हैं, तो जाहिर तौर पर धन उनकी सुविधाओं पर ही खर्च होना चाहिए । लेकिन यहां माकूल सुविधाएं श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध नहीं करवाई जा सकी हैं। मंदिर ट्रस्टी पंडित राम प्रसाद शर्मा, नरेंद्र हैप्पी, उमाशंकर व पूर्व ट्रस्टी पंडित रविशंकर का कहना है कि भक्तों का पैसा उनकी सुविधाओं पर खर्च हो । इस बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अजय वर्मा ने भी चेतावनी दी है कि अगर ऐसा कोई दबाव बनाया गया,  तो सरकार को विरोध का सामना करना पड़ेगा । उल्लेखनीय है कि बज्रेश्वरी घाट को नया रूप देने का मसला खटाई में है । यात्री सदन पिछले चार माह से बंद पड़ा है और यात्री सदन की हालत खराब है । मंदिर की चारदीवारी में पानी का रिसाव हो रहा है। सामुदायिक भवन भी यहां अधूरा है, म्यूजियम भी दर्जनों बैठकों में पास होने के बावजूद नहीं बन पाया है । संस्कृत विद्यालय भी कांगड़ा में उजड़ चुका है । 12 लाख रुपए सालाना मंदिर ट्रस्ट गोसदन पर खर्च कर रहा है। बावजूद उसके बेजुबान पशु सड़कों पर हैं। पूर्व मंत्री रवि शंकर कहते हैं कि अगर एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में दिया गया, तो यह नाइनसाफी होगी । उनका कहना है कि यह धन मंदिर के विकास पर खर्च हो । उन्होंने बताया पहले भी 51 लाख रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में देने की कोशिश की गई थी, लेकिन इस मसले पर मंदिर प्रशासन को ट्रस्टियों के विरोध का सामना करना पड़ा था । मंदिर ट्रस्टी रामप्रसाद शर्मा, नरेंद्र हैप्पी व उमा शंकर कहते हैं कि श्रद्धालुओं के चढ़ावे का धन उनकी सुविधाओं और मंदिर के विकास पर खर्च हो । समाजसेवी सुनील डोगरा का कहना है कि अच्छरा कुंड से लेकर गुप्त गंगा धाम वीरभद्र मंदिर तक सौंदर्यीकरण कर श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सकता है और ऐसा कर वीरभद्र मंदिर की पवित्रता को भी कायम रखा जा सकता है। दीगर है इस मार्ग पर शुद्ध वातावरण बनाने की जरूरत है । मां के भक्तों के लिए सुविधाएं जुटानी  हैं या एक करोड़ रुपए मुख्यमंत्री राहत कोष में देना है । इस मसले पर लोगों की निगाहें मंगलवार को होने वाली बैठक पर टिकी हैं ।

 

 

 

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