मकान गिरने के आठ दिन बाद नहीं मिली मदद

गगरेट के पिरथीपुर गांव में बुजुर्ग पर टूटा मुसीबतों का पहाड़, प्रशासन ने नहीं ली सुध

दौलतपुर चौक -प्रदेश में सरकारें आती हैं और पांच वर्ष के शासनकाल के बाद चली जाती हैं। सरकार किसी की भी हो विकास की गंगा बहने की दुहाई देते देते नेता थक जाते हैं, फिर भी न जाने क्यों प्रदेश और केंद्र सरकार की जनहितकारी नीतियां आम जनता तक नही पहुंच पातीं और न ही समाजसेवा करने की दुहाई देने वाले दानी सज्जन पात्र और गरीब लोगों तक पहुंच पाते हैं। ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है, गगरेट विस क्षेत्र के पिरथीपुर गांव में। जहां एक 70 वर्षीय विधवा का कच्चा मकान गिरे हुए आठ दिन हो गए हैं, परंतु प्रशासन की तरफ से पीडि़ता को अभी सहायता के नाम पर फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है। आठ दिन पूर्व बारिश के चलते उसका पुराना गिर गया। जिससे अब उसके पास सिर छिपाने तक की जगह नहीं बच पाई है। आलम यह है कि वो आठ दिनों से किसी के घर में शरण लेने को मजबूर है। जबकि प्रशासन की तरफ से उसे एक टैंट तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। मात्र बुढापा पेंशन के तहत जीवन गुजर बसर कर रही कमला बीबी पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है। आंखों में आंसू लिए और रुंधे स्वर में बेसहारा कमला बीबी पत्नी स्वर्गीय अतरद्दीन ने बताया कि मकान गिर जाने से बुढ़ापे में अब उसके पास सिर छिपाने के लिए भी जगह नही बचीं है। कमला बीबी ने बताया कि उसके पति की मौत काफी वर्ष पहले हो चुकी है,, जबकि बेटा अपने बचपन में दुनिया छोड़ गया था। इसके अलावा उसकी दो बेटियां थी जो कि ससुराल में है। अब भारी वर्षा के चलते उसका कच्चा पुराना मकान गिर जाने से वो सिर छिपाने कहां जाए? जबकि मकान में रखा गया जरूरी सामान और अनाज इत्यादि भी दब गया है। उसने बताया कि मकान गिर जाने से उसके पास तो सिर छिपाने तक जगह नहीं बची है। साथ ही उसकी भैंस भी पिछले आठ दिनों से धूप हो या छांव खुले आसमान के नीचे है। पीडि़ता ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उसे मकान गिरने पर शीघ्र वितीय सहायता प्रदान की जाए और  केंद्र अथवा प्रदेश सरकार की आवास योजना के अधीन उसका शीघ्र मकान बनबाया जाए। उधर तहसीलदार घनारी मनीष चौधरी ने बताया कि मीडिया के माध्यम से पीडि़ता कमला बीबी का मामला उनके ध्यान में आया है। सोमवार को वह स्वयं मौका देंखेंगे और नियमानुसार पीडि़ता की मदद की जाएगी।

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