मोबाइल से चलेंगे आईपीएच के प्रोजेक्ट

नाहन – अब मोबाइल फोन को केवल बात और मैसेज भेजने तक ही सीमित नहीं रह गया है। स्मार्ट फोन को अब आईपीएच विभाग सिरमौर ने विभाग की पेयजल योजनाओं को संचालित करने के लिए सशक्त माध्यम इंजीनियर का नमूना पेश कर माध्यम बना लिया है। आईपीएच विभाग के इंजीनियरों ने जिला सिरमौर में ऑटो माइजेशन के जरिए जिला सिरमौर में 44 पेयजल योजनाओं को संचालित करने के लिए इस्तेमाल कर दिया गया है। ऑटोमाइजेशन के जरिए आईपीएच विभाग बोरवैल में एक हार्स पावर से लेकर 25 हार्स पावर तक की मशीनरी को संचालित कर रहा है, जिसमें सबसे बड़ी खूबियां यह हैं कि आईपीएच के एसडीओ, जेई और सुपरवाइजर इन पेयजल स्कीमों को आफिस बैठे, चलते-फिरते कहीं पर भी संचालित कर पा रहे हैं। आईपीएच विभाग की पेयजल स्त्रोत अथवा बोरवैल में मशीनरी में ग्राउंड वाटर कितना रह गया है। कितनी देरी और मशीनरी को चलाया जा सकता है। बिजली की कम और ज्यादा वोल्टेज से होने वाले मशीनरी के नुकसान इत्यादि को अब एक मैसेज के जरिए ही अधिकारी पता लगा पा रहे हैं। यह फार्मूला आईपीएच विभाग सिरमौर के इंजीनियर की टीम ने यूज कर जिला की 44 पेयजल बोरवेल स्कीमों में लागू कर दिया है, जिसमें आईपीएच के कर्मचारियों को स्पॉट पर जाकर मशीनरी को आपरेटर करने से भी निजात मिल गई है। वहीं विभाग जोकि फिल्ड के कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है पर भी निर्भरता खत्म हो गई है। वास्तव में है। वास्तव मे ऑटो माइजेशन का कान्सेप्ट आईपीएच के सिरमौर के इंजीनियर जिनमें एसई आईपीएच जोगेंद्र चौहान, अधिशाषी अभियंता मनदीप गुप्ता, एसडीओ जोगेंद्र चौहान ने सफलतापूर्वक लागू करवाया है। आईपीएच विभाग सिरमौर के अधीक्षण अभियंता इंजीनियर जोगेंद्र चौहान, अधिशाषी अभियंता इंजीनियर मनदीप गुप्ता ने बताया कि आईपीएच नाहन मंडल में 34 तथा जमटा उपमंडल में 10 पेयजल योजनाओं में ऑटोमाइजेशन कान्सेप्ट से पेयजल योजनाओं को मोबाइल से ही संचालित कर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हार्स पावर डिवाइस में मॉडम और सिम का प्रयोग किया गया है। डिवाइस में मोबाइल सेंसर लगाया गया है जोकि मैसेज के जरिए मशीन की वर्किंग स्थिति से अवगत करवाता है। उन्होंने बताया कि ऑटोमाइजेशन प्रक्रिया में मशीन क्यों पानी सप्लाई नहीं कर पा रही है। वाटर लेवल कितना है, कितनी देर ओर पेयजल सप्लाई वितरण के लिए छोड़ी जा सकती है। अभी छोटी पेयजल योजनाओं में इस इसका इस्तेमाल हो रहा है। 10 से 15 हजार का यह डिवाइस आगामी समय में उठाऊ पेयजल योजनाओं के लिए इस्तेमाल करने की योजनाएं तैयार की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल मशीनरी का आपरेट करने के लिए विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही, मानवीय त्रुटियों से होने वाले नुकसान की ऑटोमाइजेशन से निजात मिल गई है, जिससे मशीनरी की कार्य क्षमता और लाइफ को निश्चित रूप से लाभ होगा। वहीं विभाग का लाखों का मशीनरी रिपेयर खर्चा में भी कमी आएगी। मोबाइल फोन से पेयजल योजनाएं ऑटो माइजेशन के सेंसर के जरिए ऑन और ऑफ होगी। बोरवै से कितना ग्राउंड वाटर लेवल से पानी लिया जा सकता है के लिए टाइमर को फिक्स कर ऑटो तरीके से यह ऑफ हो जाएगा। यही नहीं आईपीएच विभाग अब सौर ऊर्जा से संचालित पेयजल योजनाओं को भी संचालित करने के लिए कार्य शुरू करने जा रहा है।

क्या कहते हैं आईपीएच के अधिकारी

आईपीएच के एसई जोगेंद्र चौहान और अधिशाषी अभियंता मनदीप गुप्ता ने बताया कि सौर ऊर्जा से आधारित ऑटो माइजेशन के जरिए पेयजल स्टोर टैंक से वितरण के लिए वाल्व में यह डिवाइस लगाने से पेयजल वितरण को सुनिश्चित बनाया जाएगा, जिससे विभाग का कर्मचारी स्पॉट पर जाकर वाल्व खोलने और बंद होने से भी छुटकारा पाएगा। विभाग की इस पहल से पेयजल की शिकायतों में कमी आएगी। चूंकि सोलर बेस्ड स्कीमें संचालित होने से वितरण में मानवीय चूक की गुंजाइश नहीं रहेगी।

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