रिखीराम कौंडल के खिलाफ केस वापस

आय से अधिक संपत्ति का था मामला, पूर्व मंत्री को एक दशक बाद राहत

शिमला – भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री रिखीराम कौंडल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला वापस हो गया है। बिलासपुर जिला की विशेष अदालत में विचाराधीन मामले को राज्य सरकार ने विड्रॉ करने की सिफारिश की थी। इस आधार पर रिखीराम कौंडल के खिलाफ स्टेट विजिलेंस एंड एंटी क्रप्शन ब्यूरो में दर्ज केस वापस हो गया है। इस अहम फैसले के बाद एक दशक से विजिलेंस की जांच से जूझ रहे रिखीराम कौंडल ने बहुत बड़ी राहत की सांस ली है। जाहिर है कि रिखीराम कौंडल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के इस मामले को खारिज करने का पिछली धूमल सरकार से प्रयास चल रहा था।  बताते चलें कि लंबी जांच प्रक्रिया के बाद विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष रिखीराम कौंडल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बिलासपुर की भ्रष्टाचार निरोधक विशेष अदालत में चालान पेश किया गया था। रिखीराम कौंडल विधानसभा क्षेत्र गेहड़वीं का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। एक आरटीआई एक्टीविस्ट ने सूचना के अधिकार के माध्यम से उनके आय-व्यय तथा संपत्तियों के बारे में जानकारियां हासिल की थीं। इन्हीं के आधार पर आरटीआई कार्यकर्ता ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत अदालत में याचिका दायर की थी। अदालत ने पूर्व उपाध्यक्ष की संपत्तियों के बारे में छानबीन करने के निर्देश भी जारी किए थे। इसके बाद यह छानबीन विजीलैंस विभाग को सौंप दी गई थी। जानकारी के अनुसार 28 नवंबर, 2007 को  कौंडल की नकदी, एफडीआर सेविंग अकाउंट तथा कृषि से आय कुल मिलाकर 11,54,000 पर बताई गई थी।

यह था पूरा मामला

विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ था कि कौंडल ने वर्ष 2007 में जो नामांकन पत्र दाखिल किया था, उसमें कुछ जानकारियां घोषित नहीं की थीं। इस पर विजिलेंस ने 28 नवंबर, 2007 से 7 अक्तूबर, 2011 तक की आय-व्यय तथा संपत्तियों के बारे में छानबीन की। इसमें इनकम एक करोड़ 21 लाख रुपए पाई गई। जांच में कुल आय 70.21 लाख पाई गई तथा चार साल में कुल खर्चा 41 लाख पाया गया। जांच में आया कि उन्होंने 35 लाख का हाउस लोन तथा पांच लाख कार लोन लिया। दोनों लोन चार वर्ष में चुकाए गए। कौंडल ने दावा किया था कि यह गाड़ी उसे भाजपा द्वारा दी गई थी, लेकिन इस गाड़ी का पंजीकरण उनके नाम ही पाया गया।

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