शारीरिक शिक्षकों के पर्याप्त पद हों

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रशिक्षक

शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों का कार्य तीन कक्षाओं में शारीरिक शिक्षा पढ़ाना, अंतर महाविद्यालय खेलों के लिए टीमों का प्रबंधन करने के साथ-साथ स्टोर कीपर व लिपिका कार्य भी स्वयं ही करना होता है। इस कालम के माध्यम से कई बार महाविद्यालय स्तर पर अनिवार्य रूप से शारीरिक शिक्षक पद हो, इसके बारे में लिखा जा चुका है। अब तो 1996 बैच के डा. भूपिंदर ठाकुर, डा. राजकुमार आदि ही वरिष्ठ प्राध्यापकों में गिने जाएंगे। पिछले तीन वर्षों में कुछ प्राध्यापक शारीरिक शिक्षा के नियुक्त हुए हैं, मगर वे इतने महाविद्यालयों को देखते हुए बहुत कम हैं। सरकार को चाहिए कि वह यूजीसी के नियमों को भी छोड़े, हर महाविद्यालय में एक शारीरिक शिक्षा का प्राध्यापक दे…

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला का शारीरिक शिक्षा व अन्य युवा गतिविधियों का निदेशालय हर वर्ष की तरह इस साल भी सत्र के शुरू होते ही प्रदेश विश्वविद्यालय शारीरिक शिक्षा व अन्य गतिविधियों की परिषद की सालाना बैठक आज कुलपति सिकंदर कुमार की अध्यक्षता में शुरू होगी। इस बैठक में राज्य में विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों व शारीरिक शिक्षकों द्वारा शिरकत की जाती है, ये सभी इस परिषद के सदस्य हैं। इस बैठक में हर वर्ष के लिए किसी प्राचार्य का अध्यक्ष  शारीरिक शिक्षक का उपाध्यक्ष के लिए चुनाव होता है। निदेशालय का निदेशक इसका सचिव होता है। डा. सुरेंद्र शर्मा पिछले तीन वर्षों से यह दायित्व निभा रहे हैं। डा. सुरेंद्र शर्मा का कार्यकाल परिषद में खेल सुधारों के लिए याद किया जाएगा। अधिकतर खिलाड़ी गरीब घरों से आते हैं।

महाविद्यालय व अंतर विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं के समय बहुत कम खुराक भत्ता मिलता था, जिससे तीन समय का खाना तो दूर, ठीक से नाश्ता भी नहीं होता था। अब हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिषद अपने खिलाडि़यों को अंतर महाविद्यालय के समय 250 रुपए दैनिक भत्ता व 50 रुपए प्रति मैच जलपान तथा अंतर विश्वविद्यालय स्तर पर 400 रुपए दैनिक भत्ता व 100 रुपए प्रति मैच जलपान दिया जा रहा है। अच्छा होगा कि विश्वविद्यालय इसे प्रतिवर्ष महंगाई को देखते हुए 10 प्रतिशत बढ़ोतरी करता रहे, ताकि खिलाड़ी विद्यार्थियों को आर्थिक तंगी न झेलनी पड़े। पानी की खेलों के लिए पहले हिमाचल केवल पड़ोसी राज्यों के विश्वविद्यालयों की प्रतियोगिताओं का दर्शक बना रहता था, अब हिमाचल विश्वविद्यालय  अपनी अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता करवा रहा है। अंतर विश्वविद्यालय प्रतियोगिताओं में विजेता टीमों व व्यक्तिगत खिलाडि़यों और उनके प्रशिक्षकों  का सम्मान भी इस बैठक में शुरू करना अच्छे सुधारों में प्रमुख है। हमारे कई शूटर ओलंपिक सहित विश्व स्तर तक पदक विजेता हैं, मगर हिमाचल में अंतर विश्वविद्यालय में ये खेल ही नहीं होते थे। अब शूटिंग, महिला कुश्ती सहित कई नए खेल अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता कैलेंडर में शामिल कर डा. सुरेंद्र शर्मा ने अपने खेल प्रबंधन का खूब परिचय दिया है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के संबद्ध महाविद्यालयों के पास इस समय शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों की बहुत कमी है। दर्जनों महाविद्यालयों के पास शारीरिक शिक्षा का प्राध्यापक ही नहीं है। हजारों की संख्या में विद्यार्थियों के लिए केवल एक पद सृजित है, जबकि यूजीसी 500 विद्यार्थियों पर एक प्राध्यापक की बात करता है। शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापकों का कार्य तीन कक्षाओं में शारीरिक शिक्षा पढ़ाना, अंतर महाविद्यालय खेलों के लिए टीमों का प्रबंधन करने के साथ-साथ स्टोर कीपर व लिपिका कार्य भी स्वयं ही करना होता है। ऐसे में वह महाविद्यालय के सैकड़ों विद्यार्थियों की सामान्य फिटनेस को कैसे देखता होगा। इस कालम के माध्यम से कई बार महाविद्यालय स्तर पर अनिवार्य रूप से शारीरिक शिक्षक पद हो, इसके बारे में लिखा जा चुका है। अब तो 1996 बैच के डा. भूपिंदर ठाकुर, डा. राजकुमार आदि ही वरिष्ठ प्राध्यापकों में गिने जाएंगे। पिछले तीन वर्षों में कुछ प्राध्यापक शारीरिक शिक्षा के नियुक्त हुए हैं, मगर वे इतने महाविद्यालयों को देखते हुए बहुत ही कम हैं। सरकार को चाहिए कि वह यूजीसी के नियमों को भी छोड़े, हर महाविद्यालय में एक शारीरिक शिक्षा का प्राध्यापक दे। पूर्व में डा. पद्म सिंह गुलेरिया, प्रो. वर्मा, प्रो. संतोष कपूर, प्रो. डीसी शर्मा व प्रो. भट्टा साहब आदि ने अपने-अपने समय में काफी अच्छा कार्य किया है। वर्तमान में  प्रो. सुशील कुमार ने अपने हमीरपुर के कार्यकाल में बहुत अच्छा खेल प्रबंधन देकर अंतर विश्वविद्यालय खेल प्रतियोगिताओं में एथलेटिक्स तथा जूडो में कई स्वर्ण पदक प्रदेश विश्वविद्यालय को निजी प्रशिक्षकों के साथ मिलकर दिलाए थे। इस सबके लिए जहां तत्कालीन प्राचार्य डा. नरेंद्र अवस्थी तथा उनके पूर्व रहे शारीरिक शिक्षा प्राध्यापक डीसी शर्मा व प्राचार्य डा. ओपी शर्मा का आधार काम आया था। इसी तरह एलएमएसएम सुंदरनगर के तत्कालीन प्राचार्य डा. सूरज पाठक व शारीरिक शिक्षक डा. पद्म सिंह गुलेरिया द्वारा प्रशिक्षक नरेश कुमार के सहयोग से शुरू किए मुक्केबाजी प्रशिक्षण केंद्र के परिणाम आजकल भी विश्वविद्यालय को मिल रहे हैं। इस समय बिलासपुर महाविद्यालय में शारीरिक शिक्षा का प्राध्यापक डा. प्रवेश मौंटी हैंडबाल व अन्य खेलों को उत्तम प्रबंधन देता देखा जा सकता है। और भी कई प्राध्यापक हैं, जो खेल प्रबंधन में अच्छा कार्य विभिन्न खेलों के लिए कर रहे हैं।

डा. राजकुमार जम्वाल भारोत्तोलन, डा. राजकुमार, डा. कुलदीप, डा. पवन वर्मा एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी अधिकारी हैं। डाक्टर पवन वर्मा प्रशिक्षण में भी अच्छा कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के एक लाख से भी अधिक विद्यार्थियों की सामान्य फिटनेस महाविद्यालय स्तर पर अगर ठीक ढंग से देखी जा सकेगी, तो उसी में से भविष्य के फिट नागरिक व कई उत्कृष्ट खिलाड़ी भी मिल जाएंगे। डा. भूपिंदर ठाकुर से वालीबाल तथा प्रो. गोपाल से कबड्डी प्रबंधन में काफी सहायता मिल रही है। महाविद्यालय स्तर पर प्राचार्य व शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक ही नहीं, अपितु हर विषय के प्राध्यापकों से उम्मीद की जाती है कि वे खिलाड़ी विद्यार्थियों को खेलों व अन्य युवा गतिविधियों के लिए अपना पूरा-पूरा सहयोग दें। विश्वविद्यालय खेल परिषद तय करे कि इस वर्ष से समर कोचिंग भी लगे तथा विश्वविद्यालय में खाली पड़े प्रशिक्षकों के पदों को भी जल्द से जल्द नई नियुक्ति से भरा जाए। प्रदेश के महाविद्यालयों में अगर अच्छा खेल वातावरण होगा, तो इस पहाड़ी प्रदेश के युवाओं को प्रदेश में पलायन की जरूरत नहीं पड़ेगी और अंतर विश्वविद्यालय खेलों में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का भी नाम होगा।

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