श्रीनगर से वापस लौटाए राहुल और विपक्षी नेता

श्रीनगर -जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के करीब 20 दिनों बाद शनिवार को हालात देखने श्रीनगर पहुंचे विपक्षी दलों के एक प्रतिनिधिमंडल को एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी के साथ गुलाम नबी आजाद, एनसीपी नेता माजिद मेमन, सीपीआई लीडर डी राजा के अलावा शरद यादव समेत कई दिग्गज नेता पहुंचे थे। शनिवार शाम करीब छह बजे ये लोग दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गए। इस पूरे घटनाक्रम पर गवर्नर सत्यपाल मलिक ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि यहां उनकी (राहुल गांधी) कोई जरूरत नहीं है। अगर यहां आकर वह राजनीति करना चाहते हैं, तो यह ठीक नहीं है। गवर्नर ने कहा कि उनकी जरूरत संसद में थी, जब उनके सहयोगी संसद में बोल रहे थे। यहां आकर वह हालात और बिगाड़ना चाहते हैं, तो यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने उनको सद्भाव के नाते बुलाया था, मगर उन्होंने इस पर राजनीति करना शुरू कर दिया। इन लोगों का यहां आना पूरी तरह राजनीति से प्रेरित  था। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा के मसलों को राजनीति से दूर रखें। दिल्ली पहुंचकर राहुल गांधी ने कहा कि कुछ दिनों पहले मुझे गवर्नर ने ही जम्मू-कश्मीर आने का न्योता दिया था। मैंने उसे स्वीकार भी कर लिया, लेकिन हमें एयरपोर्ट से आगे नहीं जाने दिया गया। हमारे साथ मौजूद मीडियाकर्मियों के साथ बदसलूकी की गई। यह साफ करता है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य नहीं है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को इससे पहले भी दो बार वापस भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हमें शहर के अंदर नहीं जाने दिया गया, मगर जम्मू-कश्मीर के हालात बेहद खराब हैं। हमारी फ्लाइट में मौजूद यात्रियों ने जम्मू-कश्मीर की जो हालत बयां की है, वह पत्थर की आंख में भी आंसू ला दे। बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद पैदा हुए हालात का जायजा लेने के लिए राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता शनिवार को श्रीनगर रवाना हुए थे। जम्मू-कश्मीर के प्रशासन ने उनसे दौरे को टालने की अपील भी की थी। नेताओं के एयरपोर्ट पहुंचने पर जमकर हंगामा हुआ। बाद में प्रशासन ने इन सभी को वापस दिल्ली भेज दिया। उधर, राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं को जम्मू-कश्मीर जाने की अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार को तो विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधि मंडल खुद वहां भेजना चाहिए था, जिससे जनता में उसके फैसलों के प्रति विश्वास बढ़ता। गहलोत ने विधानसभा में कहा कि इस सरकार को खुद चाहिए था कि वह विपक्षी दलों के नेताओं का प्रतिनिधिमंडल बनाकर भेजती और यह कहती कि जो दावे मीडिया के माध्यम से हम कर रहे हैं, उन दावों में सच्चाई है और आप जाकर देखिए।

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