श्रीराधा दामोदर मंदिर वृंदावन

प्राचीन श्रीराधा दामोदर मंदिर वृंदावन में स्थित है। इसकी चार परिक्रमाएं करने से गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा का फ ल मिलता है। साढ़े चार सौ वर्ष पुराने इस मंदिर की परिक्रमा करने से उसमें विराजमान गिरिराज शिला की स्वतः परिक्रमा हो जाती है। इसकी एक किलोमीटर से भी कम की चार परिक्रमाएं करने से श्रद्धालु गिरिराज गोवर्धन की सात कोस 25 किलोमीटर लंबी परिक्रमा का पुण्य अर्जित कर लेता है।

माघ शुक्ल दशमी के दिन श्रीरूप गोस्वामी ने यहां राधा दामोदर जी के विग्रहों की स्थापना करके उनकी सेवा का भार जीव गोस्वामी को सौंपा। किंवदंती है कि सनातन गोस्वामी नित्य गिरिराज की परिक्रमा करते थे। वृद्धावस्था में उनकी असमर्थता को देखकर भगवान ने बालक रूप में प्रकट होकर उन्हें डेढ़ हाथ लंबी वट पत्राकार श्याम रंग की गिरिराज शिला दी। उस पर भगवान के चरण चिन्ह के साथ ही गाय के खुर का भी चिन्ह है। भगवान ने गोस्वामीजी को आदेश दिया कि अब वह वृद्धावस्था में गिरिराज पर्वत की बजाय इसी शिला की परिक्रमा कर लिया करें। उनके शरीर त्यागने के बाद शिला इसी मंदिर में स्थापित कर दी गई और तब से श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर की चार परिक्रमाएं की जाने की परंपरा चल पड़ी।

यहां रूप गोस्वामी तथा जीव गोस्वामी के अलावा अंतराष्ट्रीय श्रीकृष्ण भक्ति वेदांत प्रभुपादजी की सजीव मूर्तियों के दर्शन करके श्रद्धालुओं की भक्ति सरिता में एक नया प्रवाह निकलने लगता है। प्रभुपाद ने इस स्थान पर भजन साधना की थी। गोस्वामी पाद द्वारा प्रदत्त जीव गोस्वामी पाद के सेव्य श्रीराधा दामोदरजी की प्रतिष्ठा सम्वत 1599 विक्रमी सन् 1543 माघ शुक्ल दशमी में की गई। इस मंदिर में श्रीकृष्णदास कविराज गोस्वामी द्वारा सेवित श्रीराधा छैल चिकनियांजी के श्रीविग्रह भी विराजमान हैं। सनातन गोस्वामी जी को उनके इष्ट श्रीमदनमोहनजी ने अपने चरण चिन्ह, गाय के चरण चिन्ह, वंशी एवं लकु टिया के चिन्हों से अंकित गोवर्धन शिला दी थी और साथ ही अपना विराट रूप भी दिखाया। यह शिला आज भी राधा दामोदर मंदिर में रखी है, जो दर्शनीय है। भगवान श्रीकृष्ण जी के श्रीमुख के आदेशानुसार इस मंदिर की चार परिक्रमा लगने से गोवर्धन परिक्रमा का फ ल प्राप्त होता है। अधिक मास में जो लोग गोवर्धन की सप्तकोसी परिक्रमा नहीं कर पाते वे या तो इस मंदिर में या श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित गिरिराज मंदिर की चार परिक्रमा नित्य करते हैं तो उनकी एक परिक्रमा नित्य हो जाती है।

यहां सर्वश्री रूप गोस्वामी जीव गोस्वामी तथा कृष्णदास कविराज गोस्वामी कु टी एवं इस्कान के संस्थापक श्रीभक्तिवेदांत प्रभुपादजी की प्राचीन भजन कुटी भी इसी परिसर में हैं। यह कार्तिक मास पुरुषोत्तम मास श्रीरूप गोस्वामी एवं श्रीजीव गोस्वामी तिरोभाव उत्सव, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, श्रीराधाष्टमी गोवर्धन पूजा आदि बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। वैसे तो वृंदावन में अनेकों मंदिर और दर्शनीय स्थल हैं जिनकी सुंदरता और भव्यता का अपना अलग ही महत्त्व है। राधा दामोदर मंदिर सभी संप्रदायों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का मुख्य केंद्र है, विशेषकर गौड़ीय संप्रदाय का। मंदिर में 6 साधना स्थल हैं, जो रूप गोस्वामी, जीव गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, रघुनाथ दास, गोपाल भट्ट, भक्त रघुनाथ द्वारा बनाई गई थी। मंदिर के अंदर राधा-कृष्ण की सुंदर मूर्तियां स्थापित हैं।

You might also like