हंगामेदार पहला दिन : नारों का जवाब नारों से

Aug 20th, 2019 12:06 am

मॉनसून सत्र  1

नशा माफिया पर मचे हंगामे के बीच सत्तापक्ष-विपक्ष में खूब हुई नारेबाजी

शिमला – सदन में विपक्ष के अक्रामक रवैये पर सरकार ने भी तल्खी दिखाते हुए जवाबी नारेबाजी की। सत्तापक्ष ने कहा कि नशा माफिया का पक्ष रखकर विपक्ष ने खुद को सवालों के घेरे में खड़ा कर लिया है। इसके चलते सदन में विपक्ष के नारों का जवाबी हमला करते हुए सत्तापक्ष ने भी जमकर हंगामा किया है। विपक्ष के रवैये से नाराज सत्तापक्ष के मंत्री भी नारेबाजी करने पर उतर आए। कांग्रेस विधायकों की नारेबाजी देखकर स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार अपनी सीट से उठकर आगे आ गए और विपक्ष के खिलाफ नारे लगाने लगे। इसके बाद उद्योग मंत्री विक्रम ठाकुर तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. राजीव सहजल भी अपनी सीट से आगे आकर विपक्ष के खिलाफ नारेबाजी करने में जुट गए। कुछ समय बाद जयराम सरकार के सभी मंत्रियों ने कांग्रेस के विरुद्ध जोरदार तरीके से नारेबाजी आरंभ कर दी। इसी बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी मामले को शांत करवाने के लिए मोर्चा संभाला। बावजूद इसके स्थिति नहीं संभली। इसके चलते मुख्यमंत्री ने भी अक्रामक रुख अपनाते हुए विपक्ष को अपने तीखे शब्दों से तेवर दिखाए। सीएम के बोलते ही विपक्ष ने दोबारा हंगामेदार नारेबाजी शुरू कर दी। यह देखकर सत्तापक्ष के सभी विधायक एकजुट होकर कांग्रेस के खिलाफ आग उगलना शुरू हो गए। सत्तापक्ष का कहना था कि ऊना जिला में शराब माफिया के खिलाफ कार्रवाई की गई है। एक प्राइवेट कार से शराब की अवैध खेप पकड़ी गई थी। पुलिस की इस कार्रवाई में विधायक के पीएसओ और ड्राइवर बाधा बन रहे थे। पुलिस की कार्रवाई को रोक रहे थे। इसके खिलाफ पुलिस ने उनके विरुद्ध केस दर्ज किया है। सत्तापक्ष का कहना था कि विपक्ष ने इस मामले को तूल देकर प्रदेश भर में यह साफ संदेश दिया है कि उनका शराब माफिया को संरक्षण है। विपक्ष ने ऐसा कदम उठाकर पूरे प्रदेश में गलत संदेश दिया है। यही कारण है कि विधानसभा में दो घंटे तक हंगामापूर्ण कार्यवाही के बीच सत्तापक्ष के मंत्री-विधायक भी कांग्रेस के खिलाफ जवाबी नारेबाजी करते रहे।

सत्तापक्ष का प्रहार

शराब माफिया नहीं चलेगा

नशा माफिया को नहीं बख्शेंगे

गुंडागर्दी नहीं चलेगी, नहीं चलेगी

पुलिस कार्रवाई में बाधा नहीं बनेगी

सच्चाई का गला नहीं घुटेगा

विपक्ष की दादागिरी नहीं चलेगी

15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी कार्यवाही

कांग्रेस को माफिया का साथ नहीं देना चाहिए सुनते ही लौटे कांग्रेसी

विधानसभा के मॉनसून सत्र में जमकर बरसे हंगामे के बीच 15 मिनट के लिए विधानसभा को स्थगित करना पड़ा। दोबारा शुरू हुई विधानसभा की कार्यवाही के तुरंत बाद कांग्रेस के विधायक सदन से फिर कुछ पल के लिए बाहर चले गए। हालांकि इस दौरान विपक्ष के विधायक विक्रमादित्य की नियम-62 के तहत शिमला की सड़कों पर अवैध पार्किंग की चर्चा शुरू होनी थी। इसी बीच विपक्ष सदन से बाहर चला गया। कांग्रेस विधायकों के बाहर निकलते ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि कांग्रेस को माफिया का साथ नहीं देना चाहिए। यह सुनकर कांग्रेस के विधायक तुरंत सदन में वापस आ गए। सीएम के तल्ख शब्दों से नाराज विपक्ष ने फिर नारेबाजी आरंभ कर दी। इसके बाद कांग्रेस के विधायक बेल में जाकर बैठ गए और विधानसभो की कार्यवाही समाप्त होने तक डटे रहे। हालांकि विधानसभा की कार्यवाही में कांग्रेस के विधायकों के बाहर जाने को वाकआउट की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। पहले दिन सदन के नेता जयराम ठाकुर तथा विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री दोनों ही अक्रामक दिखे। इसके अलावा सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कांग्रेस विधायकों को लीड करने का भरपूर जोश दिखाया। विपक्ष के नेता नियम-67 के तहत ऊना मामले की कार्रवाई पर अड़ गए। इसके बाद फिर से सदन के में विपक्ष की नारेबाजी शुरू हो गई और बेल में आकर सरकार के खिलाफ खूब हल्ला बोला। एसपी को बर्खास्त करने की मांग उठाई। इस दौरान विपक्ष ने माफिया व झूठे केस के विरोध में भी नारेबाजी की। ऐसे शोर हंगामे के बीच अध्यक्ष ने विधानसभा कार्यवाही को आगे बढाया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण अध्यादेश 2019 की प्रति सभा पटल पर रखी।

…और सदन में यह भी हुआ

  1. सीर खड्ड का तटीकरण

विधानसभा में एक लिखित सूचना में सरकार ने बताया कि सीर खड्ड का तटीकरण किया जाना प्रस्तावित है, जो कि तीन चरणों में किया जाएगा।

  1. बिलासपुर में वन कटान

तीन साल में बिलासपुर में अवैध वन कटान के कई मामले सामने आ चुके हैं। सदन में 2016 से 2019 तक के मामलों की जानकारी दी गई।

  1. ऊना में चिट्टा

सदन में बताया गया कि ऊना में पहली अप्रैल, 2018 से 31 जुलाई, 2019 तक सिंथेटिक ड्रग बेचने के कुल 106 मामले सामने आए हैं। वहीं, अवैध रूप से शराब बेचने के 201 मामले दर्ज किए गए हैं। अपराधियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में कार्रवाई चल रही है।

  1. वीरभद्र ने भी लगाए नारे

बुजुर्ग नेता वीरभद्र सिंह ने वैल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी के दौरान अपने साथियों का पूरा साथ दिया। काफी देर उनके साथ खड़े रहने के बाद वह दूसरी दफा भी वैल में आना चाहते थे, लेकिन तब विक्रमादित्य व अनिरुद्ध उन्हें बाहर ले गए।

  1. पहली विधायक मेरी सास

शोकोदगार में विधायक आशा कुमारी ने विक्रम जरयाल की सूचना दुरुस्त करते हुए कहा कि चंबा से पहली महिला विधायक उनकी सास थीं और उसके बाद दूसरी विधायिका उनकी ताई सास बनीं। इसके बाद राजघराने से वह चंबा जिला से तीसरी महिला विधायक हैं। उनकी ताई सास को सदन श्रद्धांजलि दे रहा था तब उन्होंने सूचना को दुरुस्त किया।

  1. विक्रम अनिरुद्ध को ले गए बाहर

बाहर जाते हुए कांग्रेस विधायकों के साथ तब विक्रमादित्य सिंह व अनिरुद्ध सिंह बाहर नहीं गए थे, जिन्हें फिर बाहर बुलाया गया। इस पर सीएम ने कहा कि विक्रमादित्य सिंह बोलना चाहते थे, जिन्हें धक्का मारकर बाहर ले जाया गया, जिस पर दोनों विधायक बाहर से लौटे और उन्होंने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्हें धक्का मारकर बाहर नहीं ले जाया गया, सीएम गलत कह रहे हैं। इस पर सीएम ने अपनी बात को दुरुस्त किया।

  1. नहीं आया अवैध पार्किंग प्रस्ताव

सदन में दो विधायकों द्वारा शिमला में सड़कों पर अवैध पार्किंग को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया जाना था, लेकिन कांगे्रस के शोरगुल में यह प्रस्ताव पेश नहीं हो सका। विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों को उस समय एबसेंट करार दिया। यह मामला सदन में नहीं उठ पाया।

सचिवालय में अब वीडियो कान्फ्रेंसिंग

शिमला – मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल की उपस्थिति में हिमाचल विधानसभा सचिवालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधा का शुभारंभ किया। इसी के साथ धर्मशाला विधानसभा तपोवन में भी इसका शुभारंभ हुआ है। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में भारी बारिश से हुए नुकसान पर तथा इसकी भरपाई के लिए जिला प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों पर मुख्यमंत्री ने कई जिलाधीशों के साथ विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से बात की। इस दौरान आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, विधानसभा उपाध्यक्ष हंसराज, मुख्य सचिव बीके अग्रवाल, अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी तथा अन्य कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे।

ट्रिब्यूनल बंदी का अध्यादेश

शिमला – मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद किए जाने और उसके मामले हाई कोर्ट को ट्रांसफर किए जाने से संबंधित अध्यादेश पेश किया। उन्होंने सदन में इसे रखते हुए कहा कि विधानसभा कार्यवाही में नहीं थी, लिहाजा सरकार ने अध्यादेश लाया है। इस अध्यादेश के बाद अब सदन आगे विधेयक लाकर इसे कानूनी रूप देगा। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही भारी शोरगुल के बीच इस सप्ताह की शासकीय कार्यवाही की सूची भी पढ़ी।

अनिल शर्मा साइलेंट मोड पर

शिमला – सदन के भीतर सबकी निगाहों का केंद्र बने पूर्व ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा ने सत्र की पूरी कार्यवाही में मौन धारण रखा। जोरदार हंगामे के बीच मंडी सदर के विधायक न सत्तापक्ष का साथ दे पाए, न ही विपक्ष की आवाज बन पाए। सदन में लगातार दो घंटे के हंगामे के बीच अनिल शर्मा इकलौते विधायक रहे, जो अपनी सीट पर डटे रहे। हालांकि अन्य सभी विधायक अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। अहम है कि शोकोदगार से लेकर अंतिम दिन की कार्यवाही के अंतिम क्षणों तक अनिल शर्मा पूरी तरह से तटस्थ दिखे। हालांकि माकपा विधायक राकेश सिंघा भी हमेशा की तरह किसी के पक्ष में नजर नहीं आए, लेकिन सदन के भीतर सभी की नजरें सिर्फ एक शख्सियत पर थी। इस समय उनके सामने कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि उन्हें भाजपा ने अभी बाहर नहीं किया है।

कुर्सी भी बदली

अनिल शर्मा पहले मंत्री की कुर्सी पर बैठते थे। अब अनिल शर्मा को सुखराम चौधरी के साथ बिठाया गया है। उनकी इस स्थिति को सभी विधायक भी चुपचाप भांप रहे थे, लेकिन किसी ने भी उन पर कोई कटाक्ष नहीं किया।

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