60 विभागों को सोलर लाइट

सरकार ने 2.5 मेगावाट क्षमता सोलर पैनल का रखा लक्ष्य, अब तक 18 विभागों की छतों को किया कवर

शिमला -राजधानी स्थित सरकारी कार्यालयों की छतों पर सोलर पैनल स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार ने 60 विभागों का चयन किया है। कुसुम्पटी से कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह द्वारा पूछे गए एक सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यह जानकारी दी है। मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में साफ कहा है कि सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए शिमला स्थित सरकारी कार्यालयों की छतों पर 2.5 मेगावाट की क्षमता के सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया था। जिसके लिए 60 विभागों का चयन कर लिया गया। गत दो वर्षों में यानी 31 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी की छत पर 250 किलोवाट की क्षमता का पैनल स्थापित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 18 सरकारी दफतरों की छतों पर भी सोलर पैनल स्थापित किए जा चुके हैं। अभी तक बाई-डारेक्शनल मीटर लगाना शेष है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शेष 42 विभागों में सोलर पैनल 2020 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। बताया गया कि ऊर्जा बचत के लिए घर की छत्त पर लगाए जाने वाले सोलर रूफ टॉप प्लांट अब लोग सस्ती दरों पर लगा सकेंगे। राज्य सरकार के उपक्त्रम हिमऊर्जा ने इसकी दरों में भी हाल ही में भारी कटौती की है। हिम ऊर्जा ग्रिड से जुडे सोलर रूफटॉप पावर प्लांट के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं, जिसमें दरें कम हो गई हैं। सरकार ने प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढावा व लोकप्रिय बनाने के लिए ग्रिड से जुडे सोलर रूफटॉप का 10 मेगावाट लक्ष्य फरवरी 2020 तक निर्धारित किया है। आम लोग बिजली स्वयं पैदा कर सकें और राज्य में सौर ऊर्जा का तीव्र दोहन हो सके। पहले ग्रिड से जुडे सोलर रूफ टॉप 0 से 10 किलोवाट की कीमत 61 हजार प्रति किलोवाट थी, जो अब 53 हजार 150 प्रति किलोवाट हो गई है।

जितना बड़ा प्रोजेक्ट,उतनी कम होगी लागत

0 से 10 किलोवाट                            53 हजार 150 रुपए

10 से 50 किलोवाट                          49 हजार 700 रुपए

50 से 100 किलोवाट                        47 हजार  रुपए

100 से 300 किलोवाट                      44 हजार  रुपए

300 से 500 किलोवाट                      42 हजार  रुपए

केंद्र सरकार भी देगी 70 फीसदी सबसिडी

हिमऊर्जा से मिली जानकारी के मुताबिक नवीन व नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा 70 प्रतिशत और राज्य सरकार की तरफ  से 4 हजार प्रति किलोवाट हिमऊर्जा के माध्यम से सबसिडी दी जा रही है। राज्य सरकार की सब्सिडी उपभोक्ता के खाते में जमा होगी, जबकि नेट मीटरिंग का खर्च अलग से देय होगा। पहले से सूचीबद्ध फर्मों को उपरोक्त दरों पर एक सप्ताह के अंदर अपनी सहमती देने के लिए कहा गया है। जिन फर्मो की सहमती हिमऊर्जा को प्राप्त होगी, उसके बाद नई सूची हिमऊर्जा की बेबसाइट पर डाल दी जाएगी। ऐसे में ऊर्जा की बचत भी होगी।

 

You might also like