62 की बजाय 272 किलोमीटर का खतरनाक सफर

आखिर कब तैयार होगा होली-उतराला रोड, पहले ही शेष दुनिया से कटा भरमौर

धर्मशाला – हिमाचल की भौगोलिक स्थिति बहुत जटिल है, लेकिन इसे अधिक खतरनाक बनाने के लिए प्रदेश की सरकारें और विभागों का सुस्त रवैया भी बड़ी भूमिका निभाता है। प्रदेश के अति जनजातीय क्षेत्र भरमौर-होली के मात्र 62 किलोमीटर सफर के बजाय लोगों को कई वर्षों से 272 किलोमीटर का खतरनाक मुसीबतों भरा सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मात्र दो घंटे में तय किए जाने वाले सफर के बजाय दस घंटे लग रहे हैं, जबकि कई बार रास्ते से ही लौटना पड़ रहा है। बरसात व बर्फबारी में जनजातीय क्षेत्र भरमौर काले पानी की सजा काट रहा है। बरसात में भारी बारिश के कारण सड़कों में गिरे लहासों के कारण भरमौर क्षेत्र पूरी दुनिया से कट गया है, जिस कारण मणिमहेश यात्रा सहित वहां गए लोग भी फंस गए हैं। होली-उतराला सड़क का निर्माण कार्य पूरा होने से स्थानीय हजारों लोगों को बड़ी सुविधा मिलनी है। अब लोग, संघर्ष समिति और संस्थाएं सवाल उठा रही हैं कि आखिर कब बैजनाथ उतराला-भरमौर होली सड़क मार्ग बनकर तैयार होगा? जिला कांगड़ा के बैजनाथ से भरमौर-होली की दूरी 272 किलोमीटर है। इसके लिए दस घंटे का खतरनाक सफर करना पड़ता है। कुल 62 किलोमीटर की दूरी वाली यह सड़क बनने से उतराला-होली जुड़ जाएगा, जिसमें बैजनाथ की तरफ से वकलूड तक 22 किलोमीटर निर्माण हो चुका है, जबकि होली की तरफ से लाके वाली माता से भी कुछ आगे तक 20 किमी तक सड़क निर्माण हो चुका है। अब दोनों तरफ से ही लगभग 30 किलोमीटर निर्माण कार्य ही शेष बचा हुआ है, जबकि वर्षों से निर्माणाधीन उतराला-होली सड़क का कार्य अब भी अधर में लटका हुआ है।

बैजनाथ से नहीं मिली फॉरेस्ट क्लीयरेंस

बैजनाथ की तरफ से अब भी फोरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिल पाई है, जिस कारण अधर में लटके हुए मार्ग का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। उतराला-होली मार्ग बन जाने से कांगड़ा, बैजनाथ से चंबा की दूरी बहुत कम रह जाएगी। जनजातीय क्षेत्र भरमौर सड़क मार्गों के बंद होने पर भी शेष दुनिया से जुड़ा रहेगा। साथ ही पर्यटन के साथ-साथ युवाओं के लिए रोजगार के द्वार भी खुलेंगे।

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