अपने छात्र को शिक्षक बनाइए

By: Sep 5th, 2019 12:05 am

शिक्षक को महज शिक्षा के तराजू में तोलना नाइनसाफी होगी, इसलिए यह पद नहीें समाज का पदक रहा है। गुरु को याद करने की वजह एक खास व्यक्तित्व का गुरुत्वाकर्षण रहा है और यह समाज की संगत में ऐसे व्यवहार की समीक्षा भी है। आधुनिक संदर्भों में काबिलीयत का मेहनताना शिक्षक को शायद उदास करता होगा, क्योंकि इसी जिरह पर रोजगार की व्यावसायिकता हमारे सामने खड़ी होती है। ऐसे में शिक्षक अपने छात्र को अध्यापक बनने का प्रेरक साबित नहीें होता है, तो फिर यह प्रोफेशन है या नौकरी पाने का अधिकार पत्र। क्यों समाज से शिक्षक बनने की प्रेरणा गायब हो रही है या शिक्षा की जमात में अध्यापक वर्ग अप्रासंगिक हो रहा है। ऐसा नहीं है, तो फिर आरंभिक शिक्षा से अंतिम करियर तक की उड़ान में स्कूल, कालेज या विश्वविद्यालय के बाहर छात्र समूहों की खोज में निजी अकादमियों के होर्डिंग क्यों ऊंचे हो गए। शिक्षा बुनियाद नहीं, मुनादी हो गई, इसलिए जिस विज्ञापन का अर्थ बड़ा है, शिक्षा का अक्स भी वहीं खड़ा है। आश्चर्य यह कि हमने शिक्षा हब बनाते-बनाते उस संयोग को खो दिया जो प्रायः शिष्य की गुरु से मुलाकात का अवसर और पैमाना बनता था। तब आंखें जिस जीवन को खोजती थी, उसकी हर बुनियाद गुरु की गरिमा से गहरी हो जाती थी। आज शिक्षा की भूमिका में जिस छोर पर शिक्षक खड़ा है, वहां बदलते परिवेश में सूचना क्रांति का आदेश और आकर्षण स्पष्ट है। जिस समाज या अभिभावकों को शिक्षा से शिक्षक का करियर जुड़ता दिखाई नहीं देता, वे जीवन की पाठशाला में बच्चों की पृष्ठभूमि बदलने में सहयोग कर रहे हैं। शिक्षक को पाठ्यक्रम बनाती शिक्षा पद्धति ने भी कर्म और लक्ष्य के बीच ‘गुरु’ को महत्त्वहीन कर दिया। कर्म अगर परिभाषित होता तो शिक्षक का दायित्व असीमित और समुदाय के बीच उसकी कर्त्तव्य परायणता इस कद्र प्रश्नांकित न होती, लेकिन वह अब एक ओर शिक्षा का लक्ष्य बन चुका है, तो दूसरी ओर छात्रों की परीक्षा में लक्ष्य का हिसाब बनाया जा चुका है। इसलिए मजमून यह नहीं कि छात्र कहां जा रहे या क्या सीख रहे, बल्कि यह है कि परीक्षा परिणाम कितने प्रतिशत तक पहुंच रहा है। इसीलिए वह मशीनरी की तरह पाठ्यक्रम को परीक्षा के क्रम से जोड़कर अपना हिसाब देता है। वह अंततः एक प्राणी है, जो नौकरी के हस्ताक्षरों में सियासत और सरकार के पन्नों को खराब नहीं करता। वह चाहे तो इन्हीं पन्नों की बदौलत पुरस्कृत हो सकता है या तरफदारी से अपनी स्कूली हाजिरी को सुरक्षित रख सकता है। उसके लिए शिक्षा नहीं, छात्र समुदाय एक जरिया है खुद को साबित करने का, इसलिए सामान्य पड़ताल में नकल को मिली ‘इज्जत’ उसके वजूद से बड़ी है। हम केवल शिक्षक के माध्यम से शिक्षा को पूर्ण नहीं कर रहे, इसलिए तकनीक अब बच्चों की विवशता है, विमर्श है। इंटरनेट के आगमन और स्मार्ट फोन की उपलब्धता ने गुरु को भी आईटी का कंकाल बना दिया। शिक्षक को अगर अपनी प्रासंगिकता बनानी है, तो अपने परिवेश में रहते वह भविष्य के शिक्षक को चुने। आज के अभिभावक इतना सामर्थ्य, रसूख और समझ रखते हैं कि अपने बच्चों के पहले कदम से प्रोफेशन व करियर की मंजिल तय कर लेते हैं, लेकिन एक क्षमतावान शिक्षक ही भविष्य का शिक्षक चुन सकता है। शिक्षा के आरोहण में दायित्व बदल रहा है, लेकिन शिक्षक के चयन की प्राथमिकता कोई अध्यापक ही अपने शिष्य में ढूंढ सकता है।

Himachal List

Free Classified Advertisements

Property

Land
Buy Land | Sell Land

House | Apartment
Buy / Rent | Sell / Rent

Shop | Office | Factory
Buy / Rent | Sell / Rent

Vehicles

Car | SUV
Buy | Sell

Truck | Bus
Buy | Sell

Two Wheeler
Buy | Sell

Polls

क्या बार्डर और स्कूल खोलने के बाद अर्थव्यवस्था से पुनरुद्धार के लिए और कदम उठाने चाहिए?

View Results

Loading ... Loading ...

Miss Himachal Himachal ki Awaz Dance Himachal Dance Mr. Himachal Epaper Mrs. Himachal Competition Review Astha Divya Himachal TV