‘इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड’ से नवाजे 18 अभियंता

Sep 17th, 2019 12:05 am

पीटरहॉफ में ‘दिव्य हिमाचल मीडिया ग्रुप’ के विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने किए सम्मानित

इंजीनियर्स-डे के विशेष अवसर पर प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ ने शिमला में 18 अभियंताओं को इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पीडब्ल्यूडी, आईपीएच, बिजली बोर्ड और अन्य विभागों में बेहतरीन सेवाएं देने वाले अफसरों को सम्मानित किया…

पीडब्ल्यूडी मैन यानि अशोक चौहान

इंजीनियर अशोक चौहान को पीडब्ल्यूडी मैन के नाम से भी जाने जाते हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से सम्मानित किया। हिमाचल में सड़कों के ढांचागत विकास में रिटायर्ड इंजीनियर-इन-चीफ अशोक चौहान का योगदान अविस्मरणीय है। वर्ष 1984 में कनिष्ठ अभियंता के पद पर उन्होंने अपनी सेवाएं शुरू कीं और विभाग के मुखिया के पद तक पहुंचे। जनजातीय क्षेत्र पांगी वैली में चंद्रभागा नदी पर पहला जीप योग्य 92 मीटर पुल उन्होंने ही बनाया था। इतना ही नहीं डलहौजी सर्किट हाउस, बचत भवन डलहौजी, गड़ाना ब्रिज, डलहौजी बकलोह रोड, संयुक्त कार्यालय भवन भरमौर, जिला अस्पताल कुल्लू, देवसदन कुल्लू, न्यायिक परिसर मनाली, डिग्री कालेज कुल्लू, डबललेन ब्रिज मनाली के अलावा बनेर खड्ड, बाथू खड्ड कांगड़ा के पुल तथा दो नेशनल हाई-वे के निर्माण की उल्लेखनीय उपलब्धियां श्रीचौहान के नाम दर्ज हैं।

नए इंजीनियर तैयार कर रहे सुनील ग्रोवर

इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियर्र्स स्किल डिवेलप्मेंट सेंटर के निदेशक एवं एसएलडीसी के एमडी इंजीनियर सुनील ग्रोवर नए इंजीनियर तैयार कर रहे हैं। इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियर्स स्किल डिवेल्पमेंट सेंटर को स्थापित करने में उनका अहम योगदान रहा। जहां पर आज की तारीख में नए इंजीनियर तैयार हो रहे हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से सम्मानित किया। 22 अगस्त, 1960 को जन्मे इंजीनियर सुनील ग्रोेवर अभियंताओं में किसी पहचान के मोहताज नहीं है। उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि थापर यूनिवर्सिटी से और मास्टर इन इंजीनियरिंग की डिग्री इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रूड़की से प्राप्त की है। वर्तमान में इंजीनियर सुनील ग्रोवर हिमाचल प्रदेश स्टेट लोड डिस्पैच अथॉरिटी के प्रबंध निदेशक के पद पर आसीन हैं और हिमाचल प्रदेश में ऑनलाइन प्रबंधन नियंत्रण एवं विद्युत के विनियमन के लिए उत्तरदायी हैं। ईं. ग्रोवर एक स्थापित पावर सिस्टम ऑपरेशन इंजीनियर हैं, जो कि वर्ष 1983 से राज्य विद्युत बोर्ड से जुड़े हुए हैं। मुख्य अभियंता सिस्टम ऑपरेशन रहते हुए 49 नंबर पीपीए, जल विद्युत, सौर ऊर्जा और कचरे से निर्मित बिजली के लिए हस्ताक्षित भी किए गए। स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर की स्थापना में उनका विशेष योगदान रहा है।

उपलब्धियां हासिल करने में जीत गए जीत सिंह

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश के चंबा जिला में सड़कों का जाल बिछाने में इंजीनियर जीत सिंह ठाकुर का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जीत सिंह ठाकुर के नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। उन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा। दो नवंबर, 1972 को पांगी में डीबी ठाकुर के घर जन्मे जीत सिंह ठाकुर ने वर्ष 1998 में सहायक कमांडेंट बीएसएफ के रूप में अपना सफर शुरू किया। उन्होंने मार्च, 2000 में सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग के रूप में इस विभाग और प्रदेश के लिए अपनी सेवाएं शुरू कीं। पंजाब इंजीनियरिंग कालेज चंडीगढ़ से बीई(सिविल) की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन डिजास्टर मैनेजमेंट किया। जीत सिंह ठाकुर ने चंबा और तीसा में नौ पुलों का निर्माण करवाया। वहीं 57.355 किलोमीटर सड़कों के निर्माण में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। उनकी बहुमूल्य सेवाओं के लिए वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री ने उन्हें राज्य स्तरीय दिवस पर सम्मानित किया है। उनके नाम सिविल सर्विसिज अवार्ड भी है।

प्रोजेक्ट तैयार करने में लाजवाब एचएल शर्मा

किसी भी प्रोजेक्ट को अंतिम चरण तक पहुंचाने में इंजीनियर एचएल शर्मा का काम लाजवाब है। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से सम्मानित किया। ऊना जिला के बंगाणा में नौ जनवरी 1970 को जन्मे इंजीनियर एचएल शर्मा वर्तमान में लोक निर्माण विभाग के भरवाईं मंडल में सेवाएं दे रहे हैं। मार्च 2000 में बतौर सहायक अभियंता उन्होंने विभाग में कार्य शुरू किया। विभाग में नियुक्ति से पहले वह सीमेंट निर्माता कंपनी एसीसी लिमिटेड में सिविल इंजीनियर के रूप में आठ साल तक कार्य कर चुके हैं। लोक निर्माण विभाग में बतौर सहायक अभियंता उन्होंने किन्नौर के मूरंग, ऊना के जोल, गगरेट व अंब में अपनी सेवाएं दी। वह स्टेट इंडस्ट्रियल कारपोरेशन, राष्ट्रीय राजमार्ग विंग हमीरपुर में भी कार्य कर चुके हैं। ईं. एचएल शर्मा ने जालंधर-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग-3 के खूनी मोड़ को दुरुस्त करवाने के लिए केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्रालय से 99 करोड़ की डीपीआर मंजूर करवाई। साथ ही रिकार्ड समय में इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा किया है।

राजेश ठाकुर ने अवैध कब्जाधारकों को दिलाई छत

पिछले 20 सालों से हिमुडा में विभिन्न पदों पर सेवाएं दे रहे अधिशाषी अभियंता इंजीनियर राजेश ठाकुर ने अपनी अलग पहचान बना ली है। ‘दिव्य हिमाचल’ ने उन्हें इंजीनियर एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इंजीनियर राजेश ठाकुर को इस अवार्ड से सम्मानित किया। जिला शिमला के सुन्नी में 1972 में जन्मे राजेश ठाकुर ने बीई सिविल की डिग्री 1996 में की थी। उसके बाद वर्ष 1990 में हिमुडा में ही जेई के पद पर नियुक्त हुए, जो आज अधिशाषी अभियंता के पद पर पहुंच गए। उन्होंने अपने सेवाकाल में हिमुडा के तहत प्रदेश में होने वाले विकास कार्यों में महत्त्वपूर्ण भूकि निभाई। हिमुडा परवाणू में एसडीओ के पद पर रहते पूर्व में उन्होंने यहां अवैध कब्जेधारकों को राहत देने के लिए व्यावसायिक परिसर का निर्माण करवा कर दिया।

अनहोनी को होनी में बदलने के माहिर एके सोनी

इंजीनियर एके सोनी अनहोनी कार्यों को भी होनी में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ते। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें इंजीनियर एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया। राजधानी शिमला में बेहतर यातायात सुविधा की व्यवस्था के लिए ढली-बाईपास  ार्ग के निर्माण के अलावा लक्कड़ बाजार में ऑकलैंड ब्रिज का निर्माण करवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इंजीनियर एके सोनी की लोक निर्माण विभाग में विशेष पहचान है। भोरंज के रहने वाले श्री सोनी इन दिनों शिमला के विंटरफिल्ड में बतौर एक्सईएन कार्य कर रहे हैं। इनकी देखरेख में आईजीएमसी का नया ओपीडी भवन और विली पार्क में गेस्ट हाउस का निर्माण करवाया जा रहा है। उन्होंने अर्की क्षेत्र में रहते हुए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की 45 डीपीआर मंजूर करवाई और करीब 250 किलोमीटर सड़कों को पक्का व नया बनवाया। अर्की क्षेत्र में अस्पताल भवन आईटीआई इंदौर स्टेडियम, सामुदायिक भवन तथा बड़े पैमाने पर सड़क के साथ खड़े अवैध निर्माण को हटवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।

एसके पठानिया ने बिजली बोर्ड को बनाया डिजिटल

प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बिलिंग व आईटी सेवाएं उपलब्ध करवाने में राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड के वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता (आईटी) इंजीनियर एसके पठानिया का अहम योगदान रहा है। उन्हें मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा। इंजीनियर एसके पठानिया ने बोर्ड के सभी विद्युत उपमंडलों को कम्प्यूट्रीकृत बिलिंग से जोड़ा है। वर्तमान में वह बोर्ड के ईआरपी प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं, जिसमें बोर्ड के 60 फीसदी कार्यालयों को आईटी सुविधा से जोड़ दिया गया है और दिसंबर, 2020 तक इस कार्य को पूरा कर दिया जाएगा। प्रदेश में स्मार्ट मीट्रिंग प्रोजेक्ट उनके द्वारा संचालित किया जा रहा है। वहीं शिमला व धर्मशाला के एक लाख 35 हजार उपभोक्ताओं को अगले दो साल में स्मार्ट मीटर योजना से लाभान्वित किया जाएगा। जोगिंद्रनगर के रहने वाले इं. एसके पठानिया ने गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक सुंदरनगर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की है। उन्होंने नवंबर, 1988 में बिजली बोर्ड में सेवाएं शुरू कीं और वर्तमान में वरिष्ठ अधिशाषी अभियंता आईटी के पद पर पहुंचे हैं।

एनएचएआई प्रोजेक्ट में चमके रॉजिफ शेख

नेशनल हाई-वे अथॉरिटी में अधिशाषी अभियंता के पद पर तैनात इंजीनियर रॉजिफ शेख ने राष्ट्रीय उच्च मार्गों के निर्माण में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है। हिमाचल प्रदेश में विश्व बैंक की सहायता से 1675 किलोमीटर सड़क मार्गों के निर्माण के लिए रणनीति बनाने में इनकी महत्त्वपूर्ण भूिमका रही। उन्होंने इस प्रोजेक्ट की स्टेटजिक ऑपशन स्ट्डी की है। इन सड़क मार्गों में सुरक्षा उपायों को लेकर ईं रॉजिफ शेख ने विशेष कार्य किए हैं। पुलों के निर्माण, विश्वविद्यालय भवन के डिजाइन व ड्राइंग तैयार करने, शॉपिंग काम्पलेक्स के अलावा रिज की सुरक्षा के लिए किए गए कार्यों में इनका बड़ा योगदान रहा है। शिमला में बीसीएस रेजिडेंशियल व कमर्शियल काम्पलेक्स तैयार करने, अस्पताल भवन, कार पार्किंग का डिजाइन बनाने तथा शिमला वाटर सप्लाई स्कीम का डिजाइन तैयार करने में उन्होंने अहम रोल निभाया है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश बायोइंजीनियरिंग फॉर रोड नेटवर्क की मैपिंग की है। वहीं रोप-वे निर्माण व रोड़ सेफ्टी के कार्यों में विशेष भूमिका अदा की है।

हर घर को पानी पहुंचाना अजय गुप्ता का लक्ष्य

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में सहायक अभियंता के पद पर तैनात इंजीनियर अजय गुप्ता को बेहतरीन सेवाएं देने के लिए इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया। चार जनवरी, 1972 को जन्मे राजकीय बहुतकनीकी विद्यालय सुंदरनगर से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद वह आईपीएच विभाग में आए। कुल्लू शहर के लिए 23 करोड़ रुपए की पेयजल योजना का प्राक्कलन तैयार करना और उसे भारत सरकार से स्वीकृति दिलाने में इंजीनियर अजय गुप्ता का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने सिराज विधानसभा क्षेत्र के लिए 214 करोड़ की पेयजल योजना का प्राक्कलन भी तैयार करवाया। अपने क्षेत्र में हर उपभोक्ता तक पेयजल की आपूर्ति का प्रयास करना उनका मुख्य लक्ष्य रहा है।

सुधीर गुप्ता हैं, तो बर्फ में भी बंद नहीं रहेंगी सड़कें

नगर निगम शिमला में अधिशाषी अभियंता के पद पर सेवाएं दे रहे इंजीनियर सुधीर गुप्ता ने राजधानी शिमला को बर्फबारी के दौरान जनता को राहत देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इंजीनियर सुधीर गुप्ता हैं, तो बर्फबारी में भी सड़कें बाधित नहीं रहतीं। जिला मंडी के चचयोट में 1965 में जन्मे इंजीनियर सुधीर गुप्ता पिछले पांच सालों से नगर निगम शिमला में अधिशाषी अभियंता के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। शिमला में भारी बर्फबारी और बारिश के दौरान सड़क व्यवस्था को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इंजीनियर सुधीर गुप्ता के सेवाकाल के दौरान राजधानी की जनता के लिए भारी बर्फबारी के दौरान भी एक दिन से अधिक सड़कें बाधित नहीं रहीं।  उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा पोलटेक्नीक कालेज सुंदरनगर से हासिल की थी।

धर्मेंद्र गिल की जल प्रबंधन में बेहतरीन भूमिका

लगभग 30 साल से जल क्षेत्र में सेवाएं दे रहे इंजीनियर धर्मेंद्र गिल आईपीएच विभाग में विशेष पहचान रखते हैं। राजधानी शिमला में जल प्रबंधन में महत्त्वपूर्ण भूिमका निभा रहे इंजीनियर धर्मेंद्र गिल को इंजीनियर एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा गया। इन दिनों वह शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड में बतौर प्रबंध निदेशक सेवाएं दे रहे हैं। शिमला शहर के लिए जल प्रबंधन निगम महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। शहर में पेयजल की बेहतरीन व्यवस्था के लिए जल प्रबंधन निगम विश्व बैंक की महत्त्वपूर्ण परियोजना को अमलीजामा पहनाने में लगा है। इसमें इंजीनियर धर्मेंद्र गिल बेहतरीन सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। आईआईटी दिल्ली से इन्वायरनमेंट इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट में एमटेक करने वाले धर्मेंद्र गिल ने आइआईटी दिल्ली से ही इंडियन रूरल वाटर सप्लाई सिस्टम पर पीएचडी कर रखी है। विभाग में उनकी उल्लेखनीय सेवाओं को देखते हुए उन्हें विश्व बैंक की महत्त्वपूर्ण परियोजना में शिमला को जल पहुंचाने का जिम्मा सौंपा गया है।

जयलाल आपदा में लोगों के साथ 

बिजली बोर्ड नेरवा में सहायक अभियंता के पद पर सेवाएं दे रहे इंजीनियर जयलाल हिमाचल के कई स्थानों पर महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। मंडी जिला के मनवाना में 1969 में जन्मे इंजीनियर जयलाल ने हाल ही में नेरवा में आई बाढ़ के दौरान क्षेत्र में विद्युत बहाली के लिए सराहनीय कार्य किए। बीते 17 और 18 अगस्त, 2019 को नेरवा में इस बार के मानसून के दौरान बाढ़ आई, जिसमें उच्च ताप की लगभग छह किलोमीटर लाइन बह गई, 41 पोल क्षतिग्रस्त हो गए। जिसे रिस्टोर करने के लिए सहायक अभियंता जयलाल की टीम ने दिन-रात महनत की। बाढ़ के अगले दिन यानी 19 अगस्त को रात नौ बजे तक जयलाल की टीम ने युद्धस्तर पर काम किया और झिकनी पुल से नेरवा तक की बिजली लाइन दुरुस्त कर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी। उसके बाद 20 अगस्त, 2019 को दवाडा तक बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। 26 अगस्त तक नेरवा क्षेत्र की बिजली पूरी तरह से बहाली कर दी। उनकी विशिष्ठ कार्यों के लिए इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा गया। नेरवा की जनता को बाधित बिजली बहाली करने में कोई कमी नहीं छोड़ी।

विकास की राह पर एक्सईएन केके कौशल 

अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी केके कौशल हमेशा से ही विकास की राह में देखते हैं। उनकी उत्कृष्ठता को देखते हुए ‘दिव्य हिमाचल’ ने इंजीनियर एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा गया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हें इस अवार्ड से सम्मानित किया। जिला ऊना के सनोली से संबंध रखने वाले इंजीनियर कृष्ण कुमार कौशल ने वर्ष 1987 में पीडब्ल्यूडी में ग्रेजुएट जुनियर ईजीनियर के तौर पर सेवाएं शुरू की और 1997 में सहायक अभियंता के पद पर पदोन्नत हुए। उसके बाद 2013 में कार्यकारी अभियंता के पद पर पदोन्नत हुए। इंजीनियर कृष्ण कुमार कौशल ने सरकारी सेवाओं के दौरान कई सराहनीय कर्य किए। आज कृष्ण कुमार कौशल द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग ने भी प्रशंसा की।

मनोज पटियाल हाइड्रो पावर के महारथी

महत्त्वपूर्ण सरकारी उपक्रमों के साथ कई मल्टीनेशनल कंपनियों में सेवाएं दे चुके चेतक इंटरप्राइसेस के प्रोजेक्ट डायरेक्टर इंजीनियर मनोज कुमार पटियाल ने हिमाचल के हाइड्रो पावर सेक्टर में क्रांति ला दी। प्रदेश में कई विद्युत परियोजनाओं का वजूद खड़ा करने वाले इंजीनियर पटियाल का नाम उत्कृष्ठ सेवाओं के लिए जाना जाता है। उन्हें ‘दिव्य हिमाचल’ ने इंजीनियर एक्सिलेंस अवार्ड से नवाजा। 15 सितंबर, 1972 को कुल्लू के बदाह गांव में जन्मे इंजीनियर मनोज कुमार पटियाल ने वर्ष 1994 में यूनिवर्सिटी ऑफ पूणे से बीई सिविल की शिक्षा ग्रहण की। पिछले 25 सालों से उनके पास राष्ट्रीय उच्च मार्ग निर्माण, पुल, टनल डैम सहित पॉवर प्रोजेक्ट में काम करने का एक लंबा अनुभव है। इंजीनियर मनोज कुमार पटियाल अब तक नौ जल विद्युत परियोजना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। 

हमेशा प्रभावितों के साथ रोहित शारदा

सैंज बिजली परियोजना में डीजीएम कम एचपीओ के पद पर सेवाएं दे रहे इंजीनियर रोहित शारदा हर मोड़ पर प्रभावितों के साथ खड़े रहते हैं। उनकी बेहतरीन उपलब्धियों के लिए ‘दिव्य हिमाचल’ ने उन्हें इंजीनियर एक्सीलेंस अवार्ड से नवाजा। एचपीपीसीएल के तहत सैंज बिजली परियोजना में डीजीएम कम एचओपी इंजीनियर रोहित शारदा ने बिजली परियोजनाओं में कई पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। जिन क्षेत्रों में बिजली परियोजनाएं तैयार होनी थी, वहां की जनता द्वारा विरोध प्रदर्शन का भी सामना कर चुके हैं। प्रभावित परिवारों को लाभ पहुंचाने सहित तय समय पर प्रोजेक्ट निर्माण कार्य शुरू करने में उनकी महनत हमेशा रंग लाती रही। इंजीनियर रोहित शारदा का जन्म ऊना के संतोखगढ़ में 1973 में हुआ। वर्ष 1994 में बंगलूर से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी। उसके बाद वे पिछले 24 सालों से बिजली परियोजना क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।

पेयजल आपूर्ति के लिए पहचाने जाते हैं लेखराज

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में अधिशाषी अभियंता सरकाघाट के पद पर तैनात इंजीनियर लेखराज शर्मा हमेशा से ही पेयजल आपूर्ति के लिए पहचाने जाते हैं। वह मंडी जिला की धर्मपुर तहसील के भंवर कलां के रहने वाले हैं। इंजीनियर लेखराज ने वर्ष 1999 में जूनियर अभियंता के तौर आईपीएच विभाग में कार्य शुरू किया था। जिन क्षेत्रों में वह तैनात रहे, वहां लोगोंं को पेयजल की दिक्कत न हों, इसके लिए उन्होंने हमेशा विशेष प्रयास किए हैं। वर्तमान में वह सरकाघाट डिविजन में तैनात हैं, जिन्होंने प्रदेश के दूरदराज के जिला किन्नौर के रिकांगपिओ में सेवाएं दी हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किन्नौर जिला में बेहतर पेयजल व्यवस्था उपलब्ध करवाने में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। इंजीनियर लेखराज ने आरईसी हमीरपुर से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की है।

स्पांसर्ज भी किए सम्मानित

शिमला – कॉफी टेबल बुक के संकलन और इसे मूर्त रूप देने में स्पांसर्ज की भी अहम भूमिका रही है। गोयल मोटर्ज सोलन के एमडी सहज शबद गोयल की ओर से सम्मान हासिल करने के लिए दूली चंद पहुंचे, जिन्हें ‘दिव्य हिमाचल’ ने सम्मानित किया। वहीं जीबीपी गु्रप की ओर से रमन गुप्ता को यहां सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही ड्यूक फैशन की ओर से सीएमडी कोमल जैन को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने नवाजा। कार्यक्रम में एमबीडी गु्रप को भी नवाजा गया।

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