इंद्रू नाग देवता एवं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच

Sep 19th, 2019 12:05 am

सुरेश शर्मा

लेखक, कांगड़ा से हैं

धर्मशाला देश में भारी वर्षा के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां के लोग अपने यहां होने वाले सुमंगल कार्यों में सर्वप्रथम अपने क्षेत्र के देवता इंद्रू नाग महाराज को आमंत्रित करते हैं। जब से यह सुंदर क्रिकेट मैदान धर्मशाला में अस्तित्व में आया है, तब से इस मैदान पर रणजी ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी, आईपीएल, 20-20, एक दिवसीय तथा अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच के भी आयोजन हो चुके हैं तथा हमेशा ही हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन सभी मैचों से पूर्व इस स्थानीय देवता को मैच से पूर्व पूजा अर्चना कर आमंत्रित कर चुकी है…

हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से जाना जाता है, जहां देवी-देवता लोगों की आस्था के प्रतीक हैं। जिस प्रदेश में कोई भी मंगल कार्य आयोजित होने से पूर्व सर्व प्रथम देवी-देवता को आमंत्रित किया जाता है, जहां प्रदेशवासियों की अगाध व अटूट श्रद्घा हो उस प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर का मैच बिना देवता के आमंत्रण व आह्वान के सफल हो पाए, आज के भौतिक समय में यह अनसुलझा सा प्रश्न है। प्रदेश के प्रत्येक घर में कुल देवता, स्थान देवता तथा क्षेत्र देवी-देवता का वास है। स्थान-स्थान पर वहां के क्षेत्र देवता हैं, हमारी देव संस्कृति, परंपरा तथा आस्था के अनुसार सर्व प्रथम कुल देवी-देवता तथा क्षेत्र देवता का आह्वान किया जाता है ताकि कोई भी आयोजित होने वाला मंगल कार्य बिना किसी विघ्न के संपूर्ण हो।

यह हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति है, जिसमें प्रत्येक प्रदेशवासी की अटूट श्रद्घा है। वर्तमान भौतिकवाद में इस तरह भावनाएं, विश्वास, लोगों में शिथिल पड़ रही हैं, लेकिन आज भी हमारी संस्कृति, हमारे विश्वास, हमारे मत, भावना व श्रद्घा प्राकृतिक चमत्कारों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती। इसका कारण है कि प्रदेश का व्यक्ति विदेश में बस जाने पर भी पारिवारिक विपदा व आपत्ति में इन देवी-देवताओं के दर पर भूल क्षमा के लिए अपना माथा रगड़ता है। सन 2002 में धर्मशाला में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की नींव रखी गई। आज यह मैदान दुनिया का सबसे सुंदर क्रिकेट का मैदान बन चुका है। धौलाधार के आंचल में बने इस स्टेडियम की सुंदरता देखते ही बनती है। इस मैदान में क्रिकेट का आनंद लेने वाले क्रिकेट प्रेमियों को ऐसा प्रतीत होता है, जैसे पूरी दुनिया की सुंदरता के दर्शन बैठे-बैठे ही हो रहे हैं और यह केवल मैदान तक ही सीमित हो गई है। खेल कैमरों के कारण बलखाते व इतराते पहाड़, पहाड़ों में श्वेत बर्फ , हरियाली से लदी पहाडि़यां प्रदूषण मुक्त नीला आसमान व तलहटी में बसे लोगों की धर्मशाला नगरी की सुंदरता पूरी दुनिया ने निहारी है। इस खूबसूरत क्रिकेट मैदान के सामने धर्मशाला के क्षेत्र देवता इंद्रनाग महाराज विराजमान हैं, जो कि भगवान इंद्र देव का ही स्वरूप हैं और इंद्र देव को वर्षा के देवता के रूप में माना जाता है।

यह सर्व विदित ही है कि धर्मशाला देश में भारी वर्षा के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां के लोग अपने यहां होने वाले सुमंगल कार्यों में सर्वप्रथम अपने क्षेत्र के देवता इंद्रू नाग महाराज को आमंत्रित करते हैं। जब से यह सुंदर क्रिकेट मैदान धर्मशाला में अस्तित्व में आया है, तब से इस मैदान पर रणजी ट्रॉफी, देवधर ट्रॉफी, आईपीएल, 20-20, एक दिवसीय तथा अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच के भी आयोजन हो चुके हैं तथा हमेशा ही हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन सभी मैचों से पूर्व इस स्थानीय देवता को मैच से पूर्व पूजा अर्चना कर आमंत्रित कर चुकी है।  15 सितंबर 2019 को भारत तथा दक्षिण अफ्रीका के मैच में हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने हमेशा की तरह इंद्रू नाग महाराज को हमेशा बुलाना आवश्यक नहीं समझा या बुलाने में भूल हो गई। बस फिर क्या था क्षेत्र देवता ने ऐसा प्राकृतिक तांडव दिखाया कि अंतरराष्ट्रीय मैच पूरी तैयारियां होने के बावजूद रद्द करना पड़ा। दोनों प्रतिस्पर्धी क्रिकेट टीम, अंतरराष्ट्रीय खेल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया, बड़े-बड़े खेल और सिनेमा जगत के सितारे धर्मशाला पहुंच चुके थे। क्रिकेट प्रेमी अपने प्रिय खिलाडि़यों की मैदान पर एक झलक पाने के लिए उनके नाम से नीली टी शर्ट में शोभायमान थे, लेकिन प्रकृति के सामने किसकी चल सकी है। कभी-कभार प्राकृतिक चमत्कारों के आगे हमें नतमस्तक होना पड़ता है। भारत-दक्षिण अफ्रीका का मैच जब तक रद्द न हुआ तब तक लोग इंद्रू नाग महाराज के तांडव को असहय होकर देखते रहे। लोगों  ने यह अनुभव किया कि यह भारी वर्षा केवल क्रिकेट स्टेडियम के दो-तीन किलोमीटर के दायरे में ही थी। जैसे की मैच रद्द होने की घोषणा हुई तेज बारिश थम गई और आसमान साफ  होने लगा।

अगले दिन फिर साफ  आसमान व तेज धूप। यह प्राकृतिक और आश्चर्यचकित कर देने वाला करिश्मा धर्मशाला के लोगों ने दूर-दूर से आए खेल प्रेमियों ने स्वयं देखा व अनुभव किया तथा अगले दिन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा बना। प्रदेश के छोटे से शहर धर्मशाला में इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन होना बहुत गर्व की बात है, परंतु इसमें प्राकृतिक विघ्न पड़ना बड़े ही दुख की बात है। हम मनुष्य हैं तथा प्राकृतिक शक्तियों के आगे हमें नतमस्तक होना ही पड़ता है, लेकिन हमें अपनी परंपराओं, संस्कृति तथा देव परंपराओं का सम्मान करना ही चाहिए। यह आशा की जा सकती है कि आयोजन से पहले हिमाचल क्रिकेट एसोसिएशन अपना भूल सुधार करे। प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन अगर चाहे व अंतरराष्ट्रीय मानक अनुमति दें, तो जहां इस सुंदर व भव्य क्रिकेट स्टेडियम के  निर्माण कई सौ करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। वहीं स्टेडियम के भीतर ही क्षेत्र देवता इंद्रू नाग देव महाराज के छोटे से मंदिर निर्माण पर भी विचार कर सकती है। क्योंकि यह हमारी देव संस्कृति की आस्था का विषय है। अगर आप मानते ही हैं तो हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन को इस आयोजन की प्राकृतिक कारणों से मिली असफलता पर अफसोस की नहीं बल्कि चिंतन की आवश्यकता है। आगे होने वाले क्रिकेट आयोजनों में आपको निश्चित रूप से सफलता मिले, ऐसी शुभकामनाएं।

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