किसानों की दुर्दशा को भाजपा जिम्मेदार

शिमला  -हिमाचल किसान सभा ने किसानों की गंभीर आर्थिक संकट की स्थिति को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा ने कहा है कि इस समय प्रदेश के किसानों के आर्थिक हालात एक गंभीर संकट के दौर में है  सिंघा ने कहा कि सेब उत्पादकों को अपनी फसल कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्हानंे कहा कि यह असाधारण परिस्थिति है। बाज़ार में सेब अधिक मात्रा में नहीं आ रहा फिर भी फलों की कीमत में पिछले वर्षो की तुलना में सबसे ज्यादा गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सरकार को इस तथ्य को स्वीकार करके स्थिति का सही आकलन करना चाहिए और उसे तत्कालिक और दूरगामी परिणामों के लिए आधार पर तत्काल और चरणबद्व तरीके से कदम उठाने चाहिए। वहीं राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने कहा कि ऐसा अनुमान है कि डॉलर की तुलना में रुपये के लगातार गिरते जाते मूल्य (71.83 रु/डॉलर) के कारण विगत वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष आयातित सेबों की कीमत मंहगी होगी जिससे आयात पर विपरीत असर पड़ेगा और कम तादाद में सेब आयात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कश्मीर की वर्तमान दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों ने सेब के स्तरीय उत्पादन और देश के प्रमुख बाजारों तक उसकी पूर्ति पर विपरीत प्रभाव डाला है। इसके बावजूद पिछले वर्षो की तुलना में हिमाचल के सेब उत्पादकों को बेहतर दाम नहीं मिल पाए हैं। डा. तंवर ने कहा कि आािर्थक सिद्धांत केवल मांग-पूर्ति के आधार पर ही नहीं चलते बल्कि किसी वस्तु के दाम इस बात से तय होते हैं कि आपूर्ति पर किसका नियंत्रण और एकाधिकार है। सचिव राकेश सिंघा ने कहा कि यह अफसोसजनक है कि फसल कटाई के बाद उसे संरक्षित करने के लिए प्रौद्योगिकी और ढांचा तैयार करने में पिछली और वर्तमान राज्य सरकारें विफल रही हैं। सिंघा ने आरोप लगाया कि सरकार आधुनिक बाजार स्थापित कर सकने में विफल रही है और ढली, परवाणू, पराला, खेगसू, खड़ापत्थर, टरकोली (कुल्लू) में जो मंडियां बनाई भी गई हैं वे भी राज्य में सेब आर्थिकी के विकास और विस्तार के अनुरूप कमीशन एजेंटों और किसानों को आकर्शित नहीं कर सकी हैं। राज्य सचिव ने कहा कि लाइसेंस जारी किए जाने की प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं है।

 

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