खुद सड़क बनाने में जुटे चाबधार के ग्रामीण

नौहराधार -नौहराधार में सरकार की बेरुखी से नाराज लोगों ने अब खुद ही श्रमदान कर रास्ता बनाने में जुट गए हैं। सरकार ने लोगों के लिए सड़क बनाने का आश्वासन दिया था, मगर सड़क तो दूर इन लोगों के लिए पगडंडी तक नहीं बन पाई। हालांकि सड़क की डीपीआर तैयार है। जी हां रास्ता बनाने में जुटे यह लोग नौहराधार पंचायत के चाबधार निवासी हैं, जहां दशकों बाद भी सड़क सुविधा नहीं मिल पा रही है। नौहराधार से चाबधार के लिए इतना खतरनाक रास्ता है कि कई लोगों को चोटें लग चुकी हैं। हर रोज दो दर्जन से अधिक स्कूली बच्चे शिक्षा ग्रहण करने नौहराधार पहुंचते हैं, जिन्हें पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। चाबधार, पांईजल के लोगों ने सड़क की मांग को लेकर सात अक्तूबर, 2018 को अनूठा विरोध किया था। यहां के ग्रामीणों ने चाबधार से लेकर शिमला तक का लगभग 124 किमी का सफर पैदल चलकर किया था, जिसमें इन्हें चार दिन का समय लग गया था। नौहराधार से चाबधार की दूरी करीब तीन किलोमीटर है। इस गांव के आसपास कई छोटी बस्तियां हैं। नौहराधार से चाबधार पहुंचने के लिए लगभग दो से अढ़ाई घंटे का समय लगता है। इसी रास्ते से हजारों की संख्या में श्रद्धालु चूड़धार के लिए रवाना होते हैं। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को घर पहुंचाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। समस्या उस समय विकराल हो जाती है जब किसी मरीज को मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। यदि कोई बीमार हो जाए तो मरीजों को चारपाई पर उठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।  ग्रामीण तपेंद्र सिंह, हरदेव सिंह, दिलावर, अमर सिंह, मोहन लाल चौहान, राजेंद्र सिंह, नरेंद्र, राकेश आदि ने सरकार से मांग की है कि इस सडक के टेंडर शीघ्र लगाए जाएं व नौहराधार से पैदल रास्ते के लिए बजट मुहैया करवाया जाए।

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