टीबी मिटाने में हिमाचल अव्वल

कांगड़ा – केंद्र सरकार के  क्षय रोग के खात्मे को लेकर किए जा रहे कार्यों में हिमाचल प्रदेश के कार्यों को बेहतर आंका गया है। देश भर में हिमाचल प्रदेश बड़े राज्यों में पहले स्थान पर पहुंचा है। हिमाचल प्रदेश ने पहली बार इस योजना में बेहतर कार्यों को लेकर पहला स्थान हासिल किया है, जबकि ओवर ऑल हिमाचल को चौथा स्थान प्राप्त हुआ है। हाल ही में सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों में प्रदेश को बड़े राज्यों (50 लाख से अधिक आबादी वाले राज्य) में फर्स्ट रैंकिंग मिली है। जानकारी के अनुसार देशभर में वर्ष 2030 तक टीबी रोग को समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं शुरू की गई है। पहाड़ी राज्य हिमाचल में भी इस रोग को समाप्त करने के लिए केंद्र के अलावा प्रदेश सरकार भी विभिन्न योजनाआें को संचालित कर मरीजों को उपचार तथा नए मरीजों की पहचान करने के लिए कार्य कर रही है। भारत सरकार द्वारा सभी राज्यों में टीबी कंट्रोल के लिए किए जा रहे कार्यों के आकलन के लिए छह पैरामीटर निर्धारित किए गए हैं, जिसके आधार पर राज्यों की परफार्मेंस को निर्धारित किया जा रहा है। सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा स्टेट टीबी स्कोर को शेयर किया है। इसमें सेंट्रल टीबी डिवीजन द्वारा इस वर्ष पहली जनवरी से लेकर 30 जून, 2019 तक किए गए कार्यों का आकलन किया गया है। देश भर में बड़े राज्यों जिनकी आबादी 50 लाख से अधिक है, उन राज्यों में हिमाचल की फर्स्ट रैंकिंग है।  जिला कांगड़ा टीबी कंट्रोल प्रोग्राम अधिकारी डा. आरके सूद ने बताया कि पहली बार हिमाचल बड़े राज्यों में टीबी कंट्रोल के कार्यक्रम को लेकर पहले स्थान पर आया है, हालांकि ओवर ऑल रैंकिंग में इसका चौथा स्थान है। उन्होंने बताया कि जिला कांगड़ा में हर वर्ष करीब चार हजार, जबकि प्रदेश भर में 17 हजार क्षय रोग के मरीज सामने आते हैं। प्रदेश में टीबी के मरीजों की पहचान को लेकर अब आयुर्वेद विभाग द्वारा भी स्वास्थ्य विभाग का सहयोग किया जा रहा है।

ओवर ऑल रैंकिंग में चौथा स्थान

हालांकि ओवर ऑल रैंकिंग में हिमाचल की चौथी रैंकिंग है, जिसमें हिमाचल से पहले तीन केंद्र शासित छोटे राज्य हैं। इसमें दमन और दीव, पुड्डुचेरी तथा दादरा और नगर हवेली हैं।

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