डेढ़ साल से आशियाना बने तंबू में भी अब छेद

हरिबैहना के लंगेहड़ निवासी प्रकाश चंद को नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ, 40 हजार में सिर्फ नींव ही रखी

सरकाघाट  -सरकाघाट की ग्राम पंचायत हरिबैहना के गांव लंगेहड़ में पिछले डेढ़ वर्ष से गरीब प्रकाश चंद का परिवार बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है। प्रकाश चंद अपनी लाचारी की गाथा पंचायत प्रधान से लेकर मुख्यमंत्री तक को कई बार सुना चुका है। बावजूद इसके अभी तक प्रकाश चंद अपनी पत्नी व दो बेटियों सहित तंबू में रहने को मजबूर है। बता दें कि अगस्त, 2017 में भारी बरसात में प्रकाश चंद का कच्चा मकान ढह गया था। प्रशासन ने अगस्त 2017 में एक तिरपाल देकर पल्ला झाड़ दिया था और उसके बाद छह माह बाद 40 हजार दिए, जिससे प्रकाश चंद मकान तो नहीं बना पर मकान की नींव जरूर भर दी। अगस्त, 2019 में फिर से प्रशासन ने 10 हजार व एक तिरपाल देकर पल्ला झाड़ लिया। अगस्त, 2017 से  लेकर आज तक यह परिवार उसी तिरपाल के तंबू में जीवन व्यतीत कर रहा है। अब तो तंबू भी फट गया है और प्रकाश चंद तब से लेकर आज तक प्रशासन से बार-बार मदद की गुहार लगाता आ रहा है। प्रकाश चंद ने मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत गृह निर्माण के लिए एक वर्ष पूर्व फार्म भी भरे थे, लेकिन डेढ़ वर्ष का समय हो गया, इस योजना का लाभ प्रकाश चंद को आज तक नहीं मिला है। आखिर सरकार के बडे़-बडे़ दावे खोखले साबित हो रहे हैं। प्रकाश चंद दिहाड़ी मजदूरी लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। लाचारी इतनी है कि वह बेटियों को पढ़ा पाने मंे भी असमर्थ है। उसकी एक बेटी अपने मामा के घर रहती है और एक बेटी उसके साथ तंबू मंे रहती है। प्रकाश चंद के पास एक कच्चा मकान था वह भी  डेढ़ वर्ष पूर्व बरसात की भेंट चढ़ गया।  हरि बैहना पंचायत के उपप्रधान जगदीश चंद, लंगेहड वार्ड मेंबर कमला देवी व अमृत लाल आदि का कहना है कि परिवार अत्यंत गरीब है और सरकारी योजनाओं के लिए पात्र है। उपप्रधान ने बताया कि प्रकाश चंद का रिहायशी मकान और गोशाला दोनों पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और पिछले डेढ़ वर्ष से तिरपाल के बने तंबू में रहता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से उक्त गरीब परिवार की सहायता करने की गुहार लगाई है।

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