दर्शनीय है मैसूरमें मां चामुंडेश्वरी का दरबार

कर्नाटक राज्य की राजधानी एवं आईटी कंपनियों के हब के रूप में मशहूर बंगलूर से लगभग 150 किलोमीटर दूर मैसूर शहर स्थित है। यहां से 13 किलोमीटर दूर चामुंडी पहाडि़यों में हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक स्थल एवं आस्था और भक्ति का केंद्र भगवती दुर्गा की अवतार मां चामुंडेश्वरी का भव्य मंदिर स्थित है। वर्ष पर्यंत कर्नाटक सहित भारतवर्ष के अन्य राज्यों से आने वाले भक्तों एवं श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहता है, तो वहीं बड़ी संख्या में मैसूर आने वाले विदेशी पर्यटक भी यहां अपनी हाजिरी लगाते हैं। जैसे ही आप चामुंडी हिल में प्रवेश करते हैं, तो वहां पार्किंग से पहले चौक में महिषासुर की बड़ी प्रतिमा दिखाई देती है। ऐसी मान्यता है कि इसी क्षेत्र में मां दुर्गा ने महिषासुर राक्षस का वध किया था। जनश्रुतियों के अनुसार यहां देवी सती के बाल गिरे थे और पौराणिक काल में यह क्षेत्र क्रौंचपुरी कहलाता था। इस शक्तिपीठ की रक्षा के लिए काल भैरव यहां सदा ही विराजमान रहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार महिषासुर को ब्रह्मा जी का वरदान प्राप्त था कि उसकी मृत्यु एक स्त्री द्वारा होगी और कोई पुरुष उसका कुछ भी नहीं बिगाड़ पाएगा। वर प्राप्ति के बाद महिषासुर ने ऋषि-मुनियों और देवताओं को सताना प्रारंभ कर दिया। आखिर में परेशान होकर देवताओं ने मां दुर्गा की भक्ति आराधना की और उनसे इस राक्षस के अत्याचारों से मुक्ति की प्रार्थना की। तदुपरांत मां भगवती और महिषासुर के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें देवी मां ने आसुरी सेना का खात्मा करके अंत में महिषासुर का सिर काट दिया और लोगों को अभय प्रदान किया। यहां पूजा पाठ एवं तांत्रिक क्रियाओं के द्वारा लोग अपने लिए सुखी एवं स्वस्थ जीवन का वरदान प्राप्त करते हैं। मां चामुंडेश्वरी का मुख्य मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का सुंदर नमूना है। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित मां चामुंडेश्वरी की प्रतिमा शुद्ध सोने की है। चामुंडी हिल समुद्र तल से 1065 मीटर की ऊंचाई पर है। 11वीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर का 1827 में मैसूर के राजाओं ने मरम्मत एवं जीर्णोद्धार करवाया था। मंदिर की इमारत 7 मंजिला है, जिसकी ऊंचाई 40 मीटर है। मंदिर के बाहर लंगर स्थल भी है जहां लोग प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण करते हैं। रोजाना हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन कर अपने मन की मुरादे मांगते हैं और आसपास की पहाडि़यों के सुंदर दृश्यों का आनंद लेते हैं। वापसी पर रास्ते में एक ही पत्थरशिला को तराशकर बनाई गई नंदी की मूर्ति के दर्शन भी करते हैं। सप्ताह के आखिरी दिनों में और नवरात्रों में यहां भारी भीड़ रहती है। मैसूर का राज महल भी दर्शनीय है यहां मनाया जाने वाला दशहरा उत्सव विश्व प्रसिद्ध है। यह स्थल रेल सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। मैसूर में मां चामुंडेश्वरी मंदिर में दर्शनों के उपरांत पर्यटक अन्य दर्शनीय स्थलों यथा सेंड मॉडल, चिडि़याघर, मैसूर बाजार, चर्च, वृंदावन गार्डन, श्रीरंगपट्टनम में टीपू सुल्तान का महल और समाधि स्थल, मैसूर का राजमहल और कृष्णा सागर बांध आदि जाकर अपनी यात्रा को यादगार बनाते हैं। बंगलूर और मैसूर का मौसम साल भर सुहावना रहता है।

– अनुज कुमार आचार्य, बैजनाथ

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