नशे में जवानी गंवा रहा शिक्षा का हब

हमीरपुर-शिक्षा का हब कहे जाने वाले हमीरपुर का युवा अब नशे की गर्त में जा रहा है। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि आठ महीनों के आंकड़े बता रहे हैं। आठ माह में पुलिस ने एनडीपीएस के 43 मामले दर्ज किए हैं। पिछले वर्षों के मुकाबले यह आंकड़ा अधिक है। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि नशा युवा वर्ग की रगों में कैसे दौड़ रहा है। हाल ही में सामने आए कई मामलों में सिर्फ युवा वर्ग ही घातक नशे के साथ पकड़ा गया है। नशे से समाज को बचाना पुलिस के लिए वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। आमजन भी अपने बच्चों को लेकर पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। समाज में बढ़ रहे नशे के प्रचलन से अपने बच्चों को महफूस रखना परिजनों के लिए भी आफत बना हुआ है। एक के बाद एक पकड़े जा रहे नशे के सौदागरों व नशेडि़यों से समाज का बुद्धिजीवी वर्ग चिंतित हो उठा है। जवानी की दहलीज से पूर्व ही नशे की गर्त में जा रही युवा पीढ़ी हमीरपुर जिला व प्रदेश के लिए खतरे की घंटी बजा रही है। केवल हमीरपुर जिला में पिछले साढ़े आठ माह के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 43 मामले दर्ज कर करीब 55 नशे के आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है। इन 55 आरोपियों में अधिकतम आरोपियों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच है। पुलिस का आरोपियों को पकड़ सलाखों के पीछे धकेलना तो सराहनीय कदम माना जा रहा है, लेकिन नशे का मुख्य सरगना अभी तक सलाखों से बाहर है। पुलिस द्वारा अलग-अलग मामलों में पकड़े गए युवाओं से सात ग्राम से लेकर पांच किलोग्राम तक नशा पकड़ा गया है। साढ़े आठ माह में सात किलोग्राम से अधिक चरस, 350 ग्राम से अधिक चिट्टा पुलिस पकड़ चुकी है। इसके अलावा एक मामला भुक्की तो एक अफीम का नशा पकड़े जाने पर दर्ज किया गया। समाजसेवी शांतनु कुमार का कहना है कि नशे की समस्या को राजनीतिक रंग न देकर इसे एक सामाजिक समस्या समझा जाए। नशे के आरोपियों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि इसे जड़ से मिटाने के लिए इसके मुख्य सरगना को भी पुलिस दबोचे। शांतनु के अनुसार अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर पूरी नजर रखनी चाहिए तथा संस्कारयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी जानी चाहिए।

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