नालागढ़ में गुरु नानक देव की महिमा का गुणगान

नालागढ़-गुरुनानक देवजी के 550 साल प्रकाश पर्व को समर्पित नालागढ़ स्थित इंदिरा अनाज मंडी में 11वां महान कीर्तन दरबार आयोजित हुआ। यहां रागी व डाडी जत्थों ने गुरु की महिमा का गुणगान कर संगत को निहाल किया। इस दौरान दीवान सजाया गया और भारी संख्या में संगत ने हाजिरी भरी और शीश झुकाया। इस दौरान रक्तदान शिविर भी आयोजित हुआ, वहीं गुरमति मुकाबले हुए। भाई घनईया सेवा सोसायटी के तत्वावधान में आयोजित इस कीर्तन दरबार में एसजीपीसी सदस्य डा.दिलजीत सिंह भिंडर का सहयोग रहा। इस दौरान भाई सुखजीत सिंह, भाई सतनाम सिंह भाई सुखविंदर सिंह, भाई गुरप्रीत सिंह, भाई सरूप सिंह कडियाना, ज्ञान मान सिंह, भाई जबरतोड़ सिंह के डाडी व रागी जत्थों ने शब्द-कीर्तन के माध्यम से गुरु की महिमा का गुणगान किया। कथावाचक, रागी व डाडी जत्थों ने गुर का दर्शन देखदेख जीवां, खालसा मेरो रूप है खास, तू मेरा पिता, तू है मेरी माता, तुम सच्चे पाताशाह, मन क्यों वैराग करे सतगुरू मेरा पूरा, वाहेगुरु वाहेगुरु, उच्ची सुच्ची वाणी बाबे नानक दी, लखखुशियां पाताशाही जय सद्गुरु नजर करें, वाहेगुरु जी का खालसा, वाहे गुरुजी की फतह, हरजिओ-हरजिओ निमाणयांनू निमाण, जित्थे मेहर तेरी उत्थे सब खुशियां आदि की प्रस्तुतियों से गुरु की महिमा का सुंदर वर्णन किया और गुरवाणी के माध्यम से गुरु के उपदेश पर चलने का आह्वान किया। इस अवसर पर भाई घनईया सेवा सोसायटी के प्रधान चरणजीत सिंह, गुरमत प्रचार ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नसीब सिंह, महेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, पूर्व चेयरमैन बावा हरदीप सिंह, गुरुद्वारा सिंघ सभा के प्रधान परमजीत सिंह जॉली, हरबंस सिंह, गुरचरण चन्नी, परमजीत ग्रेवाल सहित भारी संख्या में संगत उपस्थित रही। एसजीपीसी मेंबर डा.दिलजीत सिंह भिंडर व गुरुद्वारा सिंघ सभा नालागढ़ के प्रधान परमजीत सिंह ने कहा कि गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में हुआ था और उनका जीवन क्रांतिकारी व भक्तिमयी रहा है। उन्होंने विपरीत स्थितियों में विपरीत स्थानों में जाकर परमात्मा की बात लोगों तक पहुंचाई। उन्होंने ऊंच-नीच का भेदभाव खत्म किया। गुरु नानक देव जी ने अपने उपदेश में सभी धर्मों को एक समान बताया और परमात्मा एक है का संदेश दिया, इसलिए उन्हें हिंदू लोग अपना गुरु, मुस्लिम अपना पीर मानते थे। मोदी खाने में नौकरी कर सभी को 13-13 तोलकर सभी को ब शीश बांटी। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी के बताए रास्तों और उनके उपदेशों को सभी को अपने जीवन में अनुग्रहण करना चाहिए।

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