पवनहंस को 50 लाख रुपए जुर्माना

सात साल में 42 बार ब्लैकलिस्ट हुई कंपनी को समझौता तोड़ने पर सरकार ने भेजा नोटिस

शिमला – सात साल में 42 बार हिमाचल सरकार को गच्चा देने पर ब्लैकलिस्ट हुई पवनहंस एयरवेज को 50 लाख का जुर्माना देना पड़ेगा। सोमवार को आयोजित प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया है। इसमें कहा गया है कि पवनहंस एयरवेज को एग्रीमेंट के खिलाफ ब्रीच ऑफ ट्रस्ट करने पर जुर्माना किया जाए। इस आधार पर राज्य सरकार ने पवनहंस एयरवेज को नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया है कि पवनहंस एयरवेज के साथ वर्ष 2012 के दौरान पांच साल की हवाई सेवा का समझौता किया था। इस समयावधि के बाद दो साल के लिए एक्सटेंशन दी गई थी। नोटिस में कहा गया है कि इन सात सालों की हवाई सेवाओं के दौरान 42 बार पवनहंस एयरवेज अपने समझौते के खिलाफ गई है। कई बार हेलिकॉप्टर समय पर नहीं पहुंचा और कई दफा बिना सूचना के ही गायब रहे। इसके चलते पवनहंस को 50 लाख के जुर्माने का नोटिस भेजा गया है। ब्लैकलिस्ट कर हेरिटेज कंपनी का छह सीटर (छुटकू) हेलिकॉप्टर हायर किया था। अब अचानक सरकार ने पवनहंस का हेलिकॉप्टर दोबारा हायर कर सबको चौंका दिया है। हालांकि ब्लैकलिस्टेड कंपनी का चौपर किसी भी सूरत में हायर करना संभव नहीं है। बावजूद इसके राज्य सरकार को पवनहंस का 24 सीटर एमआई-17 हेलिकॉप्टर दोबारा हायर करना पड़ा है। हिमाचल सरकार लंबे समय से पवनहंस एयरवेज की सेवाएं ले रही थी। वीरभद्र सरकार से शुरू हुई यह कवायद जयराम सरकार तक चलती रही। इसके लिए कई बार पवनहंस एयरवेज का एग्रीमेंट एक्सटेंड किया गया। पिछले साल पवनहंस का एमआई-17 चौपर खराब हो गया। इसके चलते मरम्मत के लिए भेजे गए चौपर के बदले पवनहंस कंपनी बड़ा जहाज विकल्प के रूप में नहीं भेज पाई। कुछ समय बाद कंपनी ने चौपर की तकनीकी खराबी का हवाला देकर दूसरा हेलिकॉप्टर भेजने के नाम पर हाथ खड़े कर दिए। इस कारण सरकार को महंगी दरों पर हेरिटेज कंपनी का छुटकू चौपर हायर करना पड़ा।

नए सिरे से होंगे टेंडर

हिमाचल सरकार ने पवनहंस कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के बाद चौपर हायर करने के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया अपनाई है। इसके तहत स्काई वन कंपनी का नाम फाइनल हुआ है। यह कंपनी हिमाचल सरकार के लिए रशिया में नया चौपर बना रही है। यह कंपनी जनवरी से सेवाएं देगी।

नहीं भर पा रहा था ऊंची उड़ान

हेरिटेज कंपनी का छह सीटर चौपर रोहतांग तथा ऊंचाई वाले इलाकों में उड़ान भरने में सक्षम नहीं था। इस कारण इस चौपर में सिर्फ दो ही सवारियां अधिकृत की जा रही थीं। इससे जनजातीय क्षेत्रों की उड़ानें प्रभावित होने और मुख्यमंत्री के प्रवास में भी दिक्कतें आ रही थीं। लिहाजा सरकार को ब्लैकलिस्टेड कंपनी पवनहंस का चौपर मजबूरी में दोबारा लेना पड़ा।

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