पीटरहॉफ में मजबूत हिमाचल का निर्माण

‘दिव्य हिमाचल’ के मंच पर एकजुट हुए अभियंता-विशेषज्ञ-प्रशासनिक अधिकारी-नेता

मौका : इंजीनियर्स-डे

स्थान : पीटरहॉफ

मंच : दिव्य हिमाचल

विषय : सेविंग हिमाचल फ्रॉम नेचुरल कैलामिटीज़

इंजीनियर्स-डे के विशेष अवसर पर प्रदेश के अग्रणी मीडिया ग्रुप ‘दिव्य हिमाचल’ के सौजन्य से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीटरहॉफ में सजे ‘दिव्य हिमाचल’ के मंच का हिस्सा बने अभियंता, विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और गणमान्य मंत्रियों ने मजबूत हिमाचल के निर्माण के लिए मंथन किया। ’सेविंग हिमाचल फ्रॉम नेचुरल कैलामिटीज़ यानि हिमाचल को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए आयोजित यह सेमिनार दो चरणों में आयोजित किया गया। इस दौरान प्रदेश भर के अभियंताओं को पेश आ रही दिक्कतों और हिमाचल के सामने खड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। खासतौर पर यहां पहुंचे विशेषज्ञों ने इंजीनियर्स को बिना पर्यावरण का नुकसान पहुंचाए भवन निर्माण के कई तरीके बताए। अभियंताओं ने कई सवाल किए, जिसका विशेषज्ञों ने न सिर्फ जवाब दिया, बल्कि उसके साथ-साथ उससे निपटने का सुझाव भी दिया। अभियंताओं के वीडियो के माध्यम से कई कांसेप्ट्स क्लीयर करवाए गए…

आपदा से निपटने को प्रकृति से न हो छेड़छाड़

श्रीकांत बाल्दी, मुख्य सचिव

शिमला। इंजीनियर्स डे पर ‘दिव्य हिमाचल’ के सौजन्य से आयोजित सेमिनार के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि हर साल मानसून के दौरान हिमाचल को करोड़ों का नुकसान होता है। बादल फटने, भू-स्खलन, बाढ़ आने से सड़कों से लेकर पेयजल स्कीमों को नुकसान हो रहा है। इसके साथ-साथ लोगों की जान चली जाती है। हिमाचल जैसा राज्य काफी संवेदनशील है। भवन निर्माण सही एवं प्रकृति के मुताबिक न होने से हर साल सैकड़ों भवनों के गिरने से लोगों की जानें भी चली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल को आपदा से बचाने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तैयार है। आपदा ने निपटने के लिए प्रकृति के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए।

लकड़ी के घरों में नहीं था भूकंप का डर

दिल्ली से पहुंचे विशेषज्ञ शैलेष बोले, बिना प्लानिंग इमारतें चढ़ा रहे लोग

शिमला  –इंजीनियर्ज-डे पर हिमाचल प्रदेश के इंजीनियर्ज को भूकंपरोधी स्ट्रक्चर के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि यहां किस तरह का निर्माण होना चाहिए, जिससे भवन भूकंप के बावजूद खड़ा रहे और कोई नुकसान न हो। खासतौर पर यहां पहुंचे भारत सरकार के कार्यकारी निदेशक बिल्डिंग, मटीरियल एंड टेक्नोलॉजी प्रोमोशन काउंसिल के एक्सपर्ट शैलेष अग्रवाल ने बताया कि भुज में आए भूकंप से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। यहां से सीख लेकर आज निर्माण को बेहतर बनाने की सोच मिली है, जिससे भवन भूकंपरोधी बनाए जा सकें। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी इंजीनियर की सबसे पहली ड्यूटी पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए भवनों का निर्माण करना है। लोग इस तरह के मकान बना देते हैं, जो प्रीप्लांड नहीं होते और प्राकृतिक आपदा में सबसे पहले वे ध्वस्त होते हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पुराने समय में होने वाले लकड़ी के निर्माण को बेहतरीन बताया और कहा कि यह भूकंपरोधी प्रणाली  है।  शैलेष ने बताया कि हिमाचल का 35 फीसदी भू-भाग भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील है और यहां भूकंप के समय बड़ा नुकसान हो  सकता है। इसलिए हिमाचल के अभियंताओं की जिम्मेदारी इसमें बढ़ जाती है। डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए केंद्र सरकार ने नेशनल बिल्डिंग  कोड लाया है, जिसके बारे में आम जनता को जागरूक किया जाना चाहिए। इसके साथ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट-2005, नेशनल पॉलिसी फॉर डिजास्टर-2009 बनाया गया है।

ऊपरी इमारत तोड़ नई बनाने में है खतरा

श्री शैलेष ने बताया कि विशेषज्ञों ने वल्नेरेबिलिटी एटलस बनाया है, जिस पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने इंजीनियर्ज को भूकंपरोधी भवन निर्माण पर टिप्स दिए और उनके सुझाव अभियंताओं ने गंभीरता से लिए। उन्होंने भवनों में पैरापिट वॉल की बात कही। साथ ही भवन की ऊपरी इमारतों को तोड़कर उसमें नया निर्माण करने को घातक बताया। इसके अलावा निर्माण के लिए साइट सिलेक्शन को महत्त्वपूर्ण पहलू बताते हुए कहा कि साइट सिलेक्शन सबसे अधिक जरूरी है। किस तरह जमीन पर निर्माण किया जा रहा है, इसे देखना चाहिए।

पेरिस-हॉलैंड से सीखनी होगी डिजास्टर मैनेजमेंट

शिमला। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुंडू ने दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आपदा से निपटने के लिए पेरिस और हॉलैंड जैसे देश से सीखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इन राष्ट्रों में भवन निर्माण प्रकृति के नियमों के मुताबिक हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में आपदा का खतरा बना रहा है। इससे बचने के लिए प्रदेश सरकार हर पहलुओं पर काम कर रही है। संजय कुंडू ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ हिमाचल में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में आपदा को खतरा हो रहा है। उन्होंने कहा कि पेरिस, होलैंड के साथ-साथ स्विट्जरलैंड राष्ट्र में भी भौगोलिक परिस्थिति के मुताबिक निर्माण हुए हैं। दूसरे सत्र में सवाल-जवाब का दौर भी चलता रहा। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजय कुंडू ने कहा कि हिमाचल में डैम सुरक्षा के लिए इंटीग्रेटिड रेजरवायर ऑपरेशन शुरू हो चुका है।

सस्ता और टिकाऊ निर्माण चुनौती

आईएएस जेसी शर्मा, प्रधान सचिव, पीडब्ल्यूडी

शिमला –लोक निर्माण विभाग के प्रधान सचिव  (आईएएस) जेसी शर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर में सस्ता और टिकाऊ निर्माण बड़ी चुनौती है। आधुनिक भारत में निर्माण की तकनीक बदल चुकी है और ऐसे कई उपकरण आ चुके हैं, जो मददगार साबित होते हैं, मगर प्राकृतिक आपदाओं के नुकसान से बचने के लिए बेहद जरूरी है कि उसकी तकनीक को भी निर्माण में अपनाया जाए। हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से सिज़्िमक ज़ोन-4 व 5 में आता है, जो कि गंभीर है। ऐसे में यहां निर्माण कार्यों को  भूकंपरोधी बनाया जाना सबसे अहम है। श्री शर्मा ने कहा कि भवन निर्माण चाहे सरकारी क्षेत्र का हो या फिर निजी क्षेत्र का, दोनों में प्राकृतिक आपदा को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। भवन में कई तरह की दूसरी आधारभूत सुविधाएं भी रखी जाती है।  विभाग के प्रधान सचिव ने निर्माण कार्यों के डिजाइन पर अधिक तवज्जो देने की बात कही। उन्होंने कहा कि निर्माण का डिजाइन सबसे महत्त्वपूर्ण है और राज्य सरकार के  विभाग इसमें पूरा ध्यान रख रहे हैं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग का भी पूरा प्रावधान सरकार ने रखा है। उन्होंने इस विषय को बेहद गंभीर बताया।

एक्सपर्ट्स एडवाइस

बिल्डिंग बनाने से पहले बनाएं मल्टी डिजास्टर प्लान

अंशुमन शुक्ला, एक्सपर्ट

शिमला –देश व प्रदेश में आज क्लाइमेट चेंज के साथ-साथ आपदा की राह में खतरे की घंटी बज रही है, जिससे निपटने के लिए हमें पर्यावरण बचाना पड़ेगा और पहले ही तैयार रहना होगा। यह बात आपदा प्रबंधन के विशेषज्ञ अंशुमन शुक्ला ने कही। इंजीनियर्स-डे के दूसरे सत्र के दौरान प्रेजेंटेशन देते हुए शुक्ला ने आपदा से निपटने के बेहतर टिप्स दिए। उन्होंने सभी इंजीनियर्स को अवगत करवाया कि भवन निर्माण से पहले मल्टी डिजास्टर प्लान तैयार करना होगा। भौगोलिक परिस्थिति और क्लाइमेट को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य शुरू करना होगा। अंशुमन शुक्ला ने कहा कि हिमाचल में 1905 के बाद भयंकर भूकंप नहीं आया, लेकिन हमें वह समय भी याद करना चाहिए। ऐसी स्थिति में भवन निर्माण से लेकर अन्य विकासात्मक कार्यों को भौगोलिक स्थिति के मुताबिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण-2005 से शुरू हुआ और आज की तारीख में कोंपोनेंट भी शुरू हो चुका है। इसी के आधार पर हमें निर्माण कार्य शुरू करने की आवश्यकता है। अंशुमन शुक्ला ने कहा कि गरीब आदमी घर बना रहा है, उसे किस तरह से तैयार होना है, इसके बारे वह पहले ही सतर्क रहता है। उसके पास पैसे की कमी होती है और छोटा सा मकान तैयार करता है। जहां गरीब का आवास है, उसी क्षेत्र में एक अमीर व्यक्ति का मकान भी होता है। अचानक आपदा आने पर सबसे अधिक नुकसान उसी अमीर व्यक्ति को होता है। कारण यह है कि उस व्यक्ति ने आपदा से बचने के लिए और पर्यावरण के मुताबिक मकान निर्माण नहीं किया।

भूकंपरोधी भवनों को बनें नियम

एक्सपर्ट अंशुमन शुक्ला ने वीडियो के माध्यम से आपदा के बारे अवगत करवाया। उन्होंने एक मिनट में भूकंप के बारे अवगत करवाया। हाल ही में हिमाचल प्रदेश सहित देश के अन्य इलाकों में भूंकप के बारे जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भूकंपरोधी भवन निर्माण के लिए देश के सभी राज्यों में रूल्स बनने चाहिए।

‘दिव्य हिमाचल’ ने कर दिखाया

गोविंद ठाकुर, वन मंत्री

शिमला। वन मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने इंजीनियर्स को संबोधित करते हुए कहा कि आज हिमाचल में 16 झीलें खतरा बन चुकी हैं। पहले पारछू और अब सर्वे के मुताबिक 15 अन्य छोटी-छोटी झीलें बन चुकी हैं, जो खतरा साबित हो सकती हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसी झीलों में दरारें आने से नदियों में बाढ़ आ जाती है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए हमें सतर्क रहना पड़ेगा। वन मंत्री ने कहा कि प्रदेश को हराभरा रखने से पर्यावरण बचेगा। पर्यावरण बचेगा, तो संभवतः हम स्वस्थ रह सकते हैं। वन मंत्री ने कहा कि प्रदेश के इंजीनियर्स हिमाचल का निर्माण करने में हरसंभव प्रयास करते हैं। इसे देखते हुए प्रकृति के नियमों के मुताबिक निर्माण होना चाहिए। नियम एवं कानून के तहत निर्माण होने से आपदा से बचा जा सकता है। उन्होंने ‘दिव्य हिमाचल’ की इस प्रस्तुति की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज तक ऐसा कार्यक्रम किसी भी संस्थानों ने नहीं किया, जिसे ‘दिव्य हिमाचल’ ने कर दिखाया।

एक काम पर बार-बार एनर्जी गंवाने की जरूरत ही न पड़े, ऐसा करें काम

सरवीण चौधरी, शहरी विकास मंत्री

शिमला  –पहले सत्र की मुख्यातिथि शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने जहां इंजीनियर्ज-डे के मौके पर अभियंताओं को बधाई दी, वहीं उन्हें हिदायत भी दी। उन्होंने कहा कि अभियंताओं को एक ही  काम पर बार-बार अपनी एनर्जी नहीं गंवानी चाहिए। पहली बार में ही इस तरह का काम किया जाए कि दोबारा वही काम करने की जरूरत न पड़े, लेकिन अभी तक ऐसा ही हो रहा है। उन्होंने सड़कों के निर्माण में कई तरह की खामियां गिनाईं और कहा कि इसमें ड्रेनेज सिस्टम पर काम नहीं किया जाता, जिस पर हिमाचल के अभियंताओं को ध्यान देना चाहिए। सरवीण चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार ने रेरा एक्ट लाया है, जिससे आम जनता को भी बेहद फायदा मिलेगा। उनके निर्माण कार्य का ढांचा कैसा होना चाहिए, इसके बारे में पूरी जानकारी मिलेगी, वहीं इससे गुणवत्ता का भी निर्धारण होगा। उन्होंने बताया कि हिमाचल में भी रेरा एक्ट लागू किया जा रहा है, जिसमें हिमाचल के मुताबिक कुछ और प्रावधान भी शामिल किए जा रहे हैं। समय के साथ तकनीक बदल रही है और उनकी शहरी विकास विभाग भी नई तकनीक को निर्माण में अपना रहा है।  उन्होंने कहा कि आज एनजीटी की वजह से भवन के निचले फ्लोर में पार्किंग बनानी पड़ती है, लेकिन पार्किंग की बुनियाद इस तरह की हो कि भवन डगमगाए नहीं। उन्होंने अभियंताओं को नसीहत दी कि नियमों पर काम करते हुए गुणवत्ता को सुनिश्चित बनाना उनकी जिम्मेदारी है। 

कट रहे जंगल; बन रहे मकान, खतरे में पर्यावरण

विपिन परमार, स्वास्थ्य मंत्री

शिमला। दूसरे सत्र के अंतिम वक्ता एवं स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश में जंगल कट रहे हैं, मकान बन रहे हैं और पर्यावरण को खतरा हो रहा है। जब से प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की सरकार बनी, तब से पेड़ कटान पर रोक लगी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि क्लाइमेट चेेंज के साथ-साथ आपदा बढ़ रही हैं। विपिन सिंह परमार ने कहा कि ‘दिव्य हिमाचल’ मीडिया ग्रुप ने आज जो मुकाम हासिल किया है, वह पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीयता का प्रतीक है। मंत्री ने ‘दिव्य हिमाचल’ के इस मंच से पूरे प्रदेश की जनता को संदेश देते हुए कहा कि पर्यावरण बचाने के लिए हमेशा आगे आने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण मित्र योजनाएं लागू कर चुकी है, ताकि पूरा प्रदेश स्वच्छ एवं सुंदर बना रहे। आपदा प्रबंधन के एक्सपर्ट अंशुमन शुक्ला को स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने सम्मानित किया।

गिरती हैं, तो सिर्फ सरकारी इमारतें

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज बोले, खुद ही नियमों का पालन नहीं करते निर्माण करने वाले

शिमला –शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि खुद नियम बनाने वाल यदि नियमों की पालना न करें, तो क्या होगा। पहले सत्र में विशेष आतिथि के रूप में आए सुरेश भारद्वाज ने कहा कि आज हाई कोर्ट का भवन सबके सामने है, जिसके नीचे से निकलने वाली सुरंग भी बंद कर दी गई है। इस तरह के निर्माण कार्य से बचना बेहद जरूरी है। शिमला अंग्रेजों का बसाया हुआ है, जहां अधिकांश मकान धज्जी वॉल से निर्मित हैं। यही वजह है कि यहां किसी भी आपदा में कोई पुराना मकान नहीं गिरा। गिरा तो  केवल आरसीसी का एक स्ट्रक्चर। सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पुराने बने धज्जी वॉल के मकान गिरते नहीं, सड़ जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र में लोग अपने मकानों को सुरक्षित रखने की दृष्टि से बनाते हैं, लेमिकन गिरती हैं, तो सरकारी इमारतें। जो भी हादसे हुए, वे सरकारी इमारतों के सामने आए हैं। लिहाजा इस पर अभियंताओं को सोचना चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों है। पहले सरकारी भवन बिना नक्शों के ही पास हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। व्यवस्थाओं में काफी ज्यादा सुधार हुआ है। उन्होंने प्रदेश में बन रहे फोरलेन को लेकर भी सवाल उठाया और कहा कि परवाणू-शिमला फोरलेन की  कटिंग ही सही नहीं हुई है, जिसके निर्माण में न जाने अभी कितने साल लग जाएंगे। इसलिए अभियंताओं के सामने इस तरह की कई चुनौतियां खड़ी हैं।  शिक्षा मंत्री ने दिव्य हिमाचल की प्रदेश के ज्वलंत मुद्दे उठाने में अहम भूमिका निभाने पर खुले मन से तारीफ की। ‘दिव्य हिमाचल’ हमेशा इस तरह के मुद्दे उठाता है और उसे हमेशा इस काम में लीन रहना चाहिए। ऐसे मुद्दे निष्कर्ष तक पहुंचाने चाहिए।

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