पीडब्ल्यूडी के काम में खोट

नेशनल व स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग की जांच में दिखा गुणवत्ता से समझौता

शिमला – निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने वाली दो बड़ी सरकारी एजेंसियों ने पीडब्ल्यूडी के कार्यों पर सवाल खड़े किए हैं। नेशनल क्वालिटी मॉनिटरिंग और स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग ने अपनी जांच में हिमाचल की सड़कों और भवनों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को असंतोषजनक बताया है। इसके चलते दोनों सरकारी एजेंसियों ने पीडब्ल्यूडी के फील्ड अफसरों तथा संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। इस आधार पर लोक निर्माण विभाग ने अपने कनिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई का चाबुक चलाने के लिए नोटिस भेजा है। इसके अलावा संबंधित ठेकेदारों के भुगतान रोकने और उनके विरुद्ध बड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है। पुख्ता सूचना के अनुसार ईएनसी पीडब्ल्यूडी आरके वर्मा ने सभी जोन के चीफ इंजीनियर्स को आगामी कार्रवाई के लिए आदेश पत्र जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि नेशनल क्वालिटी मॉनीटरिंग और स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग में राज्यभर के सड़क मार्गों और भवन निर्माण कार्यों की इंस्पेक्शन की है। दोनों सरकारी एजेंसियों की टीमों ने स्पॉट इंस्पेक्शन कर गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपल भी भरे हैं। इस आधार पर नेशनल क्वालिटी मॉनिटरिंग विंग ने अपनी रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग को भेजकर कई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए दोनों सरकारी एजेेंसियों ने लोक निर्माण विभाग के फील्ड स्टाफ तथा जवाबदेह अधिकारियों सहित निर्माण एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। इस आधार पर पीडब्ल्यूडी ने पहली प्रक्रिया के तहत संबंधित कनिष्ठ अभियंताओं से इस संदर्भ में जवाब तलब किया है।

स्टोन क्रशर पर बैन से दिक्कत

हिमाचल में स्टोन क्रशर पर बैन लगने से निर्माण कार्य में नदी-नालों का रेत-बजरी प्रयोग हो रहा है। इस कारण नेशनल क्वालिटी मॉनिटरिंग की प्रयोगशाला में पीडब्ल्यूडी के निर्माण कार्यों के सैंपल फेल हो रहे हैं। इसके अलावा टायरिंग के दौरान हल्की बूंदाबांदी के कारण भी सड़क मार्गों के सैंपल फेल हो जाते हैं। इस कारण नोटिस मिलने पर पीडब्ल्यूडी के कनिष्ठ अभियंता सकते में है।

रुक जाएगा ठेकेदारों का भुगतान

नेशनल व स्टेट क्वालिटी मॉनिटरिंग की रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदारों का भुगतान रुक सकता है। इसके अलावा जूनियर इंजीनियर के बाद सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंता भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। गुणवत्ता जांचने वाली दोनों एजेंसियों ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माणाधीन सड़कों के सैंपल भरे हैं। इसके बाद फील्ड स्टाफ तथा ठेकेदारों पर कार्रवाई शुरू हुई है।

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