फरीदकोट में सिरमौर की हाटी संस्कृति की झलक

बाबा शेख फरीद आगमन पर्व में आसरा के कलाकारों का शानदार प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम-लोकनृत्य से बांधा समां

राजगढ़-संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सौजन्य से उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला द्वारा फरीदकोट में आयोजित बाबा शेख फरीद आगमन पर्व में आसरा संस्था के 16 कलाकारों ने बहुरंगी कलाओं के उत्सव में भाग लेकर सांस्कृतिक क्षेत्र में सिरमौरी संस्कृति की अमिट छाप छोड़ी है। यह जानकारी आसरा संस्था के प्रभारी गोपाल सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि बाबा शेख फरीद आगमन पर्व का आयोजन 18 से 28 सितंबर तक किया जा रहा है, जिसमें आसरा संस्था के लोक कलाकार जिला सिरमौर के पारंपरिक लोकनृत्यों का प्रदर्शन कर रहे हैं। पूरे भारत वर्ष से आए अनेकों सांस्कृतिक दलों में आसरा संस्था के कलाकार जिला सिरमौर की पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति देकर अलग पहचान बनाए हुए हैं। संस्था के मुख्य सलाहकार विद्यानंद सरैक व गुरु जोगेंद्र हाब्बी के निर्देशन में तैयार लोकनृत्य की आकर्षक लोक लुभावनी विधाओं का लोक कलाकार बाबा शेख फरीद आगमन पर्व में झूम-झूम कर प्रदर्शन कर रहे हैं। सांस्कृतिक प्रदर्शनों की कड़ी में 18 से 19 सितंबर को फरीदकोट में आसरा के लोक कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रदर्शन किया। इसके बाद 20 सितंबर को बाबा फरीद कालेज ऑफ नर्सिंग कोटपुरा में और 21 सितंबर को सरस्वती जीनस स्कूल जैठु में सांस्कृतिक प्रदर्शनी के पश्चात 22 सितंबर को पुनः फरीदकोट में अपनी प्रस्तुतियां दी। अंतिम प्रस्तुति गीदड़वां में 23 सितंबर को होना सुनिश्चित की गई है। जोगेंद्र हाब्बी के नेतृत्व में आसरा के लोक कलाकारों ने भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र से संबंधित परात नृत्य व देवपूजा से संबंध रखने वाले दीपक नृत्य तथा बरसात का रिहाल्टी नृत्य के साथ बूढ़ी दिवाली का हारूल नृत्य की प्रस्तुति दी। बाबा शेख फरीद मेला में प्रस्तुतियों के दौरान लोक गायक रामलाल, गोपाल तथा लक्ष्मी की मधुर स्वर लहरियों ने जनमानस की खूब वाहवाही लूटी। वहीं मनमोहन, चमन, अमीचंद, जोगेंद्र के परात नृत्य व सरोज, रंजना, लक्ष्मी, अनुजा के दीपक नृत्य ने, संदीप व रमेश की ढोल और मुकेश व सुरेंद्र की करनाल व रणसिंघा की ध्वनि की ऊंची गूंज ने दर्शकों की खूब तालियां बटोर कर सिरमौरी हाटी संस्कृति का मान बढ़ाया है।

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