महंगी दवा पर स्वास्थ्य मंत्री ने आईजीएमसी से मांगा जवाब

शिमला  – आईजीएमसी के जनऔषधि कें द्र से महंगी दवा मामले पर प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार ने आईजीएमसी से जवाब तलब किया है, जिसमें जांच के आदेश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक आईजीएसमी पिं्रसीपल से इस पूरे मसले की रिपोर्ट मांगी गई है, जिस पर अब जांच अधिकारी क जिम्मेंदारी कार्यकारी चिकित्सा अधीक्षक डा. राहुल गुप्ता को सौंप दी गई है। इसमें यह चैक किया जाने वाला है कि आखिर ऐसी क्या गलती रही है, जिसमें मरीज को दी गई दवा में एमआरपी पर जीएसटी कैसे लगाया गया। जल्द से जल्द इस केस पर पूरी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। फिलहाल इसमें यह भी चैक भी किया जा रहा है कि जीएसटी किस तरह से लगाया गया है। हालांकि शनिवार को अस्पताल प्रशासन द्वारा दवाआें का रिकार्ड खंगाला गया है, लेकिन रिपोर्ट फाइनल होने के बाद ही इसे सरकार को सौंपा जाने वाला है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाना है कि अब कोई गलती ऐसी न हो, जो मरीज की जेब पर भारी पड़े। गौर हो कि इंड्राल एलए-40 नामक दवाई, जिसकी कीमत 45 रुपए 28 पैसे प्रति 15 गोलियां हैं, इसी दवाई को मरीज को 15 गोलियां साठ रुपए में अस्पताल की जनऔषधि से थमाई गई थीं। उलझन तो यहां दिखी कि उक्त सरकारी दुकान के इस कम्प्यूटर द्वारा एक अनोखा गणित इस्तेमाल किया गया  था, जिसमें 45.28 रुपए पर 12 फीसदी की दर से 22 रुपए 64 पैसे जीएसटी जोड़ने के बाद इसका मुल्य 67 रुपए 92 पैसे दिखाया गया है और उसके बाद इस पर आठ रुपए 15 पैसे छूट देकर इसे उपभोक्ता को 60 रुपए में दिया गया है, जबकि यदि 45 रुपए 28 पैसे पर 12 फीसदी जीएसटी किसी खराब तकनीकी कारण से जुड़ता भी है, तो भी इसकी कीमत 50 रुपए 71 पैसे से अधिक होना अपने आप में एक चौंका देने वाली घटना सामने आई थी। बहरहाल अब देखना यह होगा कि इतने बड़े अस्पताल में जहां काफी मात्रा में दवाआें की खपत होती है और बेहतर से बेहतर तरह के सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाते हैं और पूरी तरह से सरकार की निगरानी में इसका निरीक्षण रहता है, आखिर कानून के विरुद्ध एमआरपी पर जीएसटी जोड़ना वह भी ज्यादा, कहां तक न्यायोचित है? इस पूरे मसले पर जांच हो रही है। 

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