मेजर सुभाष 1971 से पाकिस्तान में युद्धबंदी

धर्मशाला के जांबाज की पड़ोसी मुल्क के रेडियो से जीवित होने की मिली थी सूचना

धर्मशाला – वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला के जांबाज मेजर सुभाष गुलेरी भारत-पाकिस्तान युद्ध 1971 से अब तक पाकिस्तान में युद्धबंदी हैं। कई वर्ष पूर्व पाकिस्तान के रेडियो से उनके जीवित होने की सूचना भी परिवार को मिली थी। तब से लेकर अब तक मेजर सुभाष का परिवार भी सदमे में जी रहा है, उन्हें न अब तक उनके शहीद होने और न ही जीवित होने का समाचार मिल रहा है, लेकिन फिर भी वह एक आस लगाए हुए बैठे हैं। भारत-पाक युद्ध में 54 युद्धबंदियों में कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित श्यामनगर के जवान मेजर सुभाष गुलेरी भी नौवें क्रमांक में शामिल हैं। अब परिवार ने पाकिस्तान में युद्धबंदी जांबाजों के लिए केंद्र सरकार से उचित कदम उठाने की मांग रखी है। विंग कमांडर अभिनंदन तो 48 घंटे में वतन वापस लौट आए थे, लेकिन परिवार 1971 के दर्द में अब तक जी रहा है। मेजर सुभाष गुलेरी के 1971 के युद्ध में शहीद होने की खबर उनके परिवार को मिली, लेकिन बाद में पता चला कि मेजर पाकिस्तान लाहौर की लखपत जेल में बंद हैं। पाकिस्तान के रेडियो से उनके जीवित होने का प्रसारण भी आया था। मेजर गुलेरी 1971 में अपने विवाह के लिए छुट्टी पर आए हुए थे। विवाह के पांच दिन बाद ही उनको युद्ध के मोर्चे पर बुला लिया गया और उसके बाद आज दिन तक वापस न आ पाए। अब उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। मेजर गुलेरी के भतीजे एडवोकेट विवेक गुलेरी और परिवार के अन्य सदस्य आज भी उनके आने की खबर का नियमित रूप से इंतजार करते रहते हैं। उनका कहना है कि उनके चाचा मेजर गुलेरी जिस किसी भी हालत में हैं, वह हमें स्वीकार हैं, उन्हें वापस लाया जाए। यदि वह अब जीवित नहीं हैं, तो उनके अंतिम अवशेष ही वापस ला कर दिए जाएं।

भारत ने लौटाए 92 हजार सैनिक

1972 के शिमला समझौते के तहत भारत ने पाकिस्तान के 92 हजार सैनिक युद्धबंदी पाकिस्तान को वापस भेज दिए, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि ,शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की नाकामी की वजह से हम अपने 54 युद्धबंदी वापस भारत न ला पाए। मेजर गुलेरी के भतीजे एडवोकेट विवेक गुलेरी ने अब भारत सरकार से मांग उठाई है कि वह पाक में युद्धबंदी मेजर सुभाष गुलेरी सहित 54 सैनिक युद्धबंदियों को वापस लाए।

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