शारदीय नवरात्र पर्व 29 से शुरू

कलश स्थापना के लिए सुबह 6:16 से 7:40 बजे और 11:48 से दोपहर 12:35 बजे तक अतिशुभ मुहूर्त

पांवटा साहिब -इस बार के शारदीय नवरात्र 29 सितंबर से आरंभ हो रहे हैं। जिला सिरमौर के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कमलकांत सेमवाल ने बताया कि पर्व के लिए 29 सितंबर को सुबह छह बजकर 16 मिनट से सात बजकर 40 मिनट तक और सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच कलश स्थापित करना अतिशुभ रहेगा। पंडित सेमवाल ने बताया कि भारतीय संस्कृति में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्त्व है। नौ दिनों तक चलने वाली नवरात्र पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी एवं सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। उन्होंने बताया कि कलश स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रधान रूप मां शैलपुत्री की पूजा होगी। छह अक्तूबर को महाअष्टमी और सात अक्तूबर को नवमी रहेगी। आठ अक्तूबर को दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। वहीं नवरात्र पर क्या करें, दुर्गा पूजा के लिए लाल फूलों का ही प्रयोग करें। घी की अखंड ज्योति जलाएं। पूजन के समय ओंकार सहित श्री गणेश, ब्रह्म, विष्णु, महेश व दुर्गा इन पंचदेवों व नवग्रहों का पूजन करें और तुलसी, आक, आंवला एवं मदार के फूल न चढ़ाएं, दूर्वा न चढ़ाएं।

क्या रहेगी पूजा विधि…

स्नानादि के उपरांत घट स्थापना करें। कलश स्थापना में मिट्टी, तांबे या स्टील का कलश पूजा में रखें। घट में गंगाजल, जल, सुपारी, चावल, रोली, हल्दी, कमल गट्ठे, जौ, सिक्का व शहद आदि डालकर आम के पांच पत्ते रखंे तथा नारियल पर लाल रंग की चुन्नी लपेट कर कलश पर रखें। आसन बिछाकर अर्घ्य, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, तांबुल, नेवैद्य व फल आदि से कलश पूजा करें। मिट्टी के पात्र में रेत-मिट्टी डालकर उसमें मिलाकर जौ बीज दें तथा नित्य उसमंे जल डालें। मां दुर्गा के नौ रूपों का ध्यान करें, नित्य नौ दिनों तक पूजा पाठ करें। मां दुर्गा का ध्यान कर नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

 

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