समाज को एक सूत्र में पिरोता है संघ

श्रीकृष्ण मंदिर का लोकार्पण करने पहुंचे संघ प्रमुख ने बताया उद्देश्य

सोलन- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन राव भागवत ने बुधवार को सोलन में कहा कि भारत दुनिया में एकमात्र धर्म परायण देश है तथा धर्म आधारित देश के हम सभी वासी हैं। उन्होंने कहा कि आरएसएस का कार्य समाज को एक सूत्र में पिरोना है तथा विभिन्न संप्रदायों से संबंध रखने के उपरांत भी समाज को बिखरने न देना ही संघ के कार्यकर्ताओं का उद्देश्य है। सोलन में श्रीकृष्ण मंदिर का लोकार्पण करने पहुंचे डा. मोहन भागवत ने कहा कि विभिन्न संप्रदाय ज्ञान के आधार पर धर्म की राह जनमानस को दिखाते हैं तथा संघ कर्म के माध्यम से समाज को धर्म की ओर मोड़ने का प्रयास करते हैं। भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश है, जिसकी नींव धर्म पर आधारित है। अलग-अलग संप्रदायों से ताल्लुक रखने के उपरांत भी हम सब एक हैं। श्रीमद्भागवत गीता देश की सभी प्रकार की आध्यात्मिकता को जोड़ने वाला ग्रंथ है। सर्ब समाज को जोड़ना व उन्नत बनाने का निचोड़ उसमें है तथा कर्त्तव्यपरायण होकर निष्काम भाव से कर्म करते रहना ही इसका एक उपदेश है। संघ प्रमुख ने कहा कि संघ का प्रत्येक कार्यकर्ता निष्काम भाव से प्रेमपूर्वक कर्म करता है तथा उसी कारण कार्यकर्ताओं का धर्म के प्रति आदर स्वाभाविक रूप से हो जाता है। डा. मोहन राव भागवत ने कहा कि महानुभाव पंथ प्रेमी पंथ है तथा प्रदेश के संघ प्रमुख भी इसी पंथ को मानते हैं। उन्होंने मुझे प्रेम से सोलन में मंदिर का उद्घाटन करने के लिए बुलाया। मैं प्रेमवश यहां आया व सर्वस्व त्यागियों के बीच पहुंचकर अपने आप को सौभाग्यशाली महसूस कर रहा हूं।

भागवत ने सादगी से सबको बनाया मुरीद

श्रीकृष्ण मंदिर का लोकार्पण करने पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत की सादगी के सभी मुरीद हो गए। एक साधारण से कुर्ते-पायजामे में वह उपस्थित लोगों से बहुत प्रसन्नचित मुद्रा में मिले। दोनों हाथ जोड़कर सबका अभिवादन किया तथा हार पहनने से गुरेज करते हुए मालाओं को हाथ में ही पकड़ लिया।

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