सेना मुख्यालय में फेरबदल

कर्नल मनीष धीमान

स्वतंत्र  लेखक

पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार भारतीय सेना पर बहुत अहम निर्णय ले रही  है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री द्वारा चीफ  आफ डिफेंस स्टाफ  पद की घोषणाएं, फिर  मानवाधिकार मामलों के लिए अलग विभाग, और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए जल, थल एवं वायु तीनों सेनाओं का ज्वाइंट विजिलेंस सैल बनाने के उपरांत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सेना मुख्यालय में फेरबदल की घोषणा। आजादी के बाद सेना संगठन में यह तीसरा बड़ा बदलाव है, पहला पुनर्गठन अगस्त 1947 में, दूसरा 1954 और तीसरा 1985- 88 में हुआ था। अब लगभग 31 साल बाद सेना संगठन में कुछ अहम फेरबदल किए गए हैं। इनके अनुसार सेना के करीब 206 अधिकारी जो अभी तक सेना मुख्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे, उनको फील्ड एरिया में भेजा जाएगा। इन अधिकारियों में मेजर, लेफ्टिनेंट कर्नल, कर्नल, ब्रिगेडियर एवं मेजर जनरल रैंक के अधिकारी शामिल होंगे। इन अधिकारियों को पाकिस्तान और चीन की सरहदों पर इंटीग्रेटेड बैटल गु्रप में सेवाएं देने के लिए भेजा जाएगा। सेना मुख्यालय में पोस्ट अधिकारी पालिसी प्लानिंग एवं युद्ध नीति तथा स्ट्रैटजी बनाने का काम करते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं कि ये अधिकारी अपने काम में पूरी तरह निपुण व सक्षम होते हैं। पाकिस्तान और चीन की सीमा या फील्ड एरिया में तैनाती से यह अफसर अपनी काबिलीयत के अनुसार ग्राउंड की हकीकत व वास्तविकता  के आधार पर वहां के नागरिक, लोकल पुलिस, पैरामिलिट्री एवं तीनों सेनाओं के रोल व जरूरत को ध्यान में रखते हुए अचूक तथा विजयी युद्ध नीति या स्ट्रैटजी बना पाएंगे। हमारे पास अतीत में ऐसे उदाहरण हैं कि सेना मुख्यालय में अपने किताबी ज्ञान के आधार पर बड़ी ही कुशल और प्रभावित रणनीति या युद्धनीति बनाने वाले अधिकारी जब अपने रैंक के मुताबिक सेना की टुकड़ी को कमांड करने फील्ड में जाते हैं तो अपनी ही बनाई हुई नीति को ग्राउंड में प्रैक्टिकल न पाकर उसको सफलतम अंजाम तक नहीं पहुंचा पाते, ऐसे अधिकारियों को लंगर गप या फौजी भाषा में पेपर टाइगर के नाम से जाना जाता है। समय के साथ इस बात का एहसास हुआ है कि कोई भी नीति बनाने के लिए किताबी ज्ञान और ग्राउंड की हकीकत, दोनों का जानना अति आवश्यक है और उससे भी ज्यादा जरूरी है उस नीति को वक्त आने पर सफलता से एक सीक्यूट करने वाले अफसर, सूबेदार एवं सिपाहियों के बीच तालमेल और समन्वय स्थापित करना। भारत सरकार के इस निर्णय से ज्यादातर अधिकारियों की तैनाती मुख्यालय से हटाकर फील्ड एरिया में होगी तो इससे अफसर अपने ट्रूप्स, जवान, सूबेदार एवं अफसर अंडर कमांड के बीच फील्ड कंडीशन में अच्छा तालमेल और समन्वय बिठाकर पेपर टाइगर से असली टाइगर बन पाएंगे।

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