हंसराज रघुवंशी के सुरों की मुरीद हुई नूरां सिस्टर, उपहार में दिया गले का कीमती हार

कहते हैं हीरे की परख एक जोहरी ही कर सकता है, इन दिनों ये कहावत देवभूमि हिमाचल के पहाड़ी गबरू बाबा हंसराज रघुवंशी पर बिल्कुल सटीक बैठ रही है, दरअसल अपने फ़न से सबको भोले के भावों से भाव विभोर कर देने वाले बाबा रघुवंशी इन दिनों सुरों की महफ़िल के सागर नकोदर में हाजरियां भर रहे हैं। हाल ही में नकोदर के फिलॉर की मईया भगवान दरबार में हंसराज रघुवंशी ने प्रस्तुति दी, जिसमें जनता के साथ-साथ सूफी गायकी की फनकार नूरां सिस्टर को भी मंत्रमुग्द कर दिया। रघुवंशी की एक घंटे की प्रस्तुति में नूरां सिस्टर की जोड़ी कई बार झूमती और मंच पर आकर नोटों की बारिश करती दिखी, लेकिन आखिर में जो हुआ, वह कोई छोटी बात नहीं है। नूरां सिस्टर ज्योति ने बार बार यह भजन सुना और भाव-विभोर होकर ख़ुद मंच पर पहुंचकर अपने गले का चमचमाता बेशकीमती हार खोलकर तुरन्त हंसराज के हवाले कर दिया और भविष्य में सुरों का सरताज़ बनने की भी शुभकामना दे डाली। बाबा रघुवंशी पहले पहाड़ी गबरू हैं, जिन्हें नकोदर के बाबा सूरा पूरा दरबार और अब फिलॉर के मईया भगवान के दरबार में अपनी हाजरी भरने का अवसर प्राप्त हुआ है।

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