हिमाचल में फुटबाल का सफर 

Sep 6th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

फुटबाल संघ का इतिहास 1974 से हिमाचल में शुरू होता है जब सुकेत के राजा ललित सेन को अध्यक्ष तथा चेतराम वर्मा को महासचिव बनाया गया था। इसी वर्ष एएन तिवारी की कप्तानी में हिमाचल प्रदेश की टीम ने रोजर कप कोलकाता में प्रतिनिधित्व किया था। उस समय मंडी, धर्मशाला, नाहन, ऊना तथा चंबा के मैदानों में फुटबाल काफी लोकप्रिय था…

हिमाचल प्रदेश में इस समय सभी खेलों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड उपलब्ध हैं, मगर फुटबाल के लिए अभी तक राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्ले फील्ड का प्रावधान नहीं हो पाया है। यह अलग बात है कि फुटबाल के पदाधिकारी अपने लिए राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक प्ले को बरबाद करने से गुरेज नहीं कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण हमीरपुर के सिंथेटिक ट्रैक पर फुटबाल का नार्थ जोन करवाना है। जहां ट्रैक को कवर किए बगैर उसे स्टेड से खिलाड़ी रौंद रहे हैं। फुटबाल संघ को अपने अलग स्तरीय फील्ड के लिए सरकार को कहना चाहिए और फुटबाल को अलग कृत्रिम फील्ड मिलनी भी चाहिए। फुटबाल संघ का इतिहास 1974 से हिमाचल में शुरू होता है जब सुकेत के राजा ललित सेन को अध्यक्ष तथा चेतराम वर्मा को महासचिव बनाया गया था।

इसी वर्ष एएन तिवारी की कप्तानी में हिमाचल प्रदेश की टीम ने रोजर कप कोलकाता में प्रतिनिधित्व किया था। उस समय मंडी, धर्मशाला, नाहन, ऊना तथा चंबा के मैदानों में फुटबाल काफी लोकप्रिय था। लगभग इन्हीं महाविद्यालयों की टीमों का अंतर महाविद्यालय फुटबाल प्रतियोगिता में दबदबा रहता था। नई सदी में तो एक बार राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी संस्थान हमीरपुर की टीम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता पर भी कब्जा कर लिया था। मंडी के सुनील कुमार ने लगातार 20 वर्षों तक राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता में हिमाचल का प्रतिनिधित्व किया था। इस प्रकार दो दशक तक प्रथम श्रेणी के मैचों के लिए फिटनेस बरकरार रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक कमेटी ने मान पत्र भी दिया है।

मंडी के ही देवेंद्र कैंथ विकलांग होते हुए भी फुटबाल में राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान से फुटबाल प्रशिक्षक का डिप्लोमा पास करने का गौरव प्राप्त किए हुए हैं। राज्य में प्रशिक्षण कार्यक्रम को जारी रखने में कई प्रशिक्षकों व शारीरिक शिक्षकों का योगदान रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय टीम के साथ एवी ठाकुर अपनी सेवानिवृत्ति तक जाने जाते रहे। ईश्वर वैद्य जो राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्था के प्रशिक्षक थे। बाद में साई होस्टल बनने के बाद उसमें चले गए थे, उन्होंने भी अपने कार्यकाल में काफी अच्छे खिलाड़ी निकाले हैं। नाहन के शिवराज जो बिजली बोर्ड से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, यदि ये फुटबाल प्रशिक्षक होते तो और भी अच्छा प्रशिक्षण नाहन में दिलाते। वर्तमान में फुटबाल संघ के सचिव दीपक शर्मा ने भी रोहड़ू होस्टल के खिलाडि़यों को अपने कार्यकाल में काफी अच्छा प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाया था। मंडी के नरेंद्र सैणी जो पहले राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान के प्रशिक्षक थे, नौकरी छोड़कर मंडी में शारीरिक शिक्षक पद पर नौकरी से अब सेनानिवृत्त हो चुके हैं। उन्होंने भी फुटबाल में प्रशिक्षण व प्रबंधन में काफी योगदान दिया है। एक समय में हिमाचल प्रदेश पुलिस की टीम भी हिमाचल प्रदेश की अच्छी टीमों में गिनी जाती थी। प्रशिक्षक रोशन ने वर्षों तक इस टीम का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया था। हिमाचल फुटबाल संघ पर कई टर्म के लिए सचिव पद पर एएन तिवारी का कहना रहा है, उस समय फुटबाल संघ के अध्यक्षों में धर्मपुर के भूतपूर्व विधानसभा सदस्य ठाकुर नभा सिंह तथा किन्नौर के तत्कालीन विधायक जगत सिंह नेगी के हाथों में अलग-अलग टर्म के लिए कमान रही है। नई सदी में फिर फुटबाल संघ के सचिव का कब्जा अब दीपक शर्मा के पास है। उसके साथ पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के ओएसडी संजीव हटवाल अध्यक्ष पद पर बिठाए गए थे। उसके बाद दूसरे कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र के ओएसडी अमितपाल सिंह को हिमाचल प्रदेश फुटबाल संघ का अध्यक्ष बनाया गया था। वर्तमान में फुटबाल संघ के अध्यक्ष पद पर बलदेव तोमर विराजमान हैं।

हिमाचल फुटबाल संघ को चाहिए कि वह सरकार से किसी भी जिले में जहां फुटबाल के लिए पूरा मैदान अलग से है, वहां पर एक आधुनिक फुटबाल फील्ड तैयार करवाई जाए। आज सब लगभग सभी खेलों के लिए आधुनिक प्ले फील्ड राज्य के हर जिले में नहीं तो कई जगह तैयार है। उसी तरह फुटबाल के लिए भी प्ले फील्ड अनिवार्य रूप से बनाई जाए। आज का किशोर व युवा जब नेश की चपेट में आ चुका है, तो खेल ही ऐसा माध्यम है जिससे हम अपने नौनिहालों को बचा सकते हैं। एथलेटिक्स व फुटबाल जैसी स्पर्धाओं में एक साथ दर्जनों खिलाडि़यों को प्रारंभिक दौर में प्रशिक्षण दिया जा सकता है।

ऐसे में हम अधिक से अधिक किशोरों व युवाओं को खेल मैदान तक पहुंचा सकते हैं। फुटबाल संघ हिमाचल में और अधिक फुटबाल को लोकप्रिय करने के लिए अच्छे प्रशिक्षकों को प्रोत्साहित करे, ताकि हिमाचल भी राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर सके। साथ ही बाहरी खिलाडि़यों को खिलाने से गुरेज करे। हिमाचल के खिलाड़ी जब हाकी, एथलेटिक्स मुक्केबाजी आदि कई खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकते हैं, तो फुटबाल में भी यह कमाल किया जा सकता है। कनिष्ठ लड़कियों ने इस बार काफी अच्छा प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर किया है। प्रदेश में फुटबाल के प्रचार-प्रसार के लिए फुटबाल संघ को शुभकामनाएं।

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