15 वर्षों में 50 से अधिक मौतें, बचाव के इंतजाम शून्य

पांवटा साहिब में यमुना नदी में डूबने हर साल हो रही मौतें, प्रशासन के पास नहीं है सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

पांवटा साहिब -पांवटा साहिब से होकर बह रही यमुना नदी में एक ओर युवक डूब गया। इस गर्मी में हालांकि यमुना नदी मंे डूबने की यह पहली घटना हुई है, लेकिन इससे पहले अप्रैल माह में सतौन की गिरि नदी में एक युवक की डूबने से मौत हो चुकी है, परंतु प्रशासन की तरफ से बचाव के अभी तक भी पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं। पांवटा साहिब में यमुना नदी में डूबने की घटनाओं पर नजर डालें तो बीते 15 वर्षों में करीब चार दर्जन मौतें नदी में डूबने से हो चुकी हैं। बावजूद इसके न तो स्नानघाट व अन्य नहाने वाले स्थानों के आसपास फेंसिंग की व्यवस्था है और न ही प्रशासन के पास अपने गोताखोर। जानकारी के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में करीब 50 से अधिक लोग यमुना में डूबकर काल के मुंह में समां चुके हैं। हर वर्ष प्रशासन के कुप्रबंधन के कारण औसतन दो से तीन लोग यमुना नदी मंे डूबकर मौत की आगोश में चले जाते हैं, लेकिन प्रशासन इससे कोई सीख न लेकर वही लापरवाहीपूर्ण रवैया अपनाए हुए है। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबकि वर्ष 2003 से 2019 तक करीब 50 से अधिक मौतें नदी में डूबने से हो चुकी हैं। इसमें वर्ष 2003 मंे तीन, 2004 मंे एक, 2005 में चार, 2006 में चार, 2007 मंे चार, 2008 में तीन, 2009 में तीन, 2010 मंे दो, 2011 में एक, 2012 में तीन तथा 2013 मंे करीब तीन लोग यमुना नदी में डूबकर मौत का शिकार हो चुके हैं। वर्ष 2014 मंे डूबने के दो मामले सामने आए। ऐसे ही 2015 से 2019 के बीच भी हर साल औसतन दो से तीन लोग नदी में डूबकर मौत का शिकार हुए हैं। ऐसे में यह आंकड़ा 50 पार कर रहा हैै। जानकारों की मानें तो पांवटा नगर चारों ओर से नदियों से घिरा हुआ है। ऐसे में यहां नदियों मंे होने वाले हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए प्रशासन ने न तो स्थानीय तौर पर गोताखोर की तैनाती की है और न ही कोई आपदा प्रबंधन टीम यहां पर मांगी है। अब इसे प्रशासन की नाकामी कहें या भाग्य की बिडंबना कि हर साल नदी में मौतें होने पर भी आज तक पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं।

 

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