50 लाख से बनेगा भैरो बाबा मंदिर

पहाड़ी गिरने से चट्टान ने तहस-नहस कर दिया था मंदिर, जोरों-शोरों से चल रहा काम, गर्मियों से पहले जनता को करेंगे समर्पित

ज्वालामुखी –ज्वालामुखी के प्राचीन भैरों बाबा मन्दिर कैंथला जो भारी बरसात के दिनों में  भारी चट्टान के गिरने से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके निर्माण के लिए मंदिर न्यास ज्वालामुखी ने पचास लाख रुपए का प्रावधान किया  है । इसका निर्माण शुरूहो गया है और जोरों से चल रहा है। इसका निर्माण अत्याधुनिक तरीके से हो रहा है और आने वाली गर्मियों से पूर्व ही मंदिर जनता को समर्पित भी कर दिया जाएगा। भैरो बाबा मंदिर न्यास ज्वालामुखी के ही अधीन है। यहां पर लगभग एक करोड़ रुपए की सराय, भवन, रसोई, रेन शेल्टर, शौचालय, स्नानागार, हवन कुंड व आवास आदि से सुसज्जित भवन हाल में ही बनकर तैयार हुआ है। भवन निर्माण के दौरान ही भारी बरसात के चलते भैरों बाबा मंदिर की छत व पिल्लर भारी चट्टान की वजह से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे। बाबा की कृपा से साथ के ही कमरों में सो रहे लेबर के लोगों व मंदिर के पुजारी व सेवादार को कोई नुकसान नहीं हुआ था। तभी मंदिर न्यास ने यहां पर भव्य मंदिर बनाने का निर्णय लिया था। यहां पर भैरों बाबा मंदिर की बाबा की मूर्ति को आंच तक नहीं आई थी, जबकि मंदिर पूरी तरह से ध्वस्त व क्षतिग्रस्त हो गया था। इसे लोग बाबा की शक्ति व चमत्कार मानते है। शनिवार व मंगलवार को बाबा के भक्तों का यहां पर मेला लगता है। आने वाले दिनों में यहां पर और भी विकास होने वाला है। यहां से रास्ता आगे अंबिकेश्वर महादेव से होता हुआ ऐतिहासिक टेढ़ा मंदिर को जाता है। इस मार्ग को भी शीघ्र पक्का करके यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा, ताकि यहां पर आने वाले यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

मंदिर सहायक आयुक्त के बोल

इस संदर्भ में सहायक मंदिर आयुक्त अंकुश शर्मा  ने कहा कि भैरों बाबा मंदिर का निर्माण पचास लाख की लागत से किया जा रहा है, जिसका काम चल रहा है। शीघ्र ही काम पूरा हो जाएगा, उसकेबाद इसका लोकार्पण करवाया जाएगा। इसके साथ ही शहनशाह अकबर की नहर का भी जीर्णोद्वार किया जाएगा, जिसके लिए दस लाख का प्रावधान कर दिया गया है, यह ऐतिहासिक कार्य है जो लोगों की आस्था व श्रद्वा से जुड़े हुए है। मंदिर अधिकारी बीडी शर्मा ने कहा किभैरों मंदिर में यात्रियों के लिए वर्षाशालिका का निर्माण भी किया गया है, जहां मंगलवार व शनिवार को भक्तजन बैठकर बाबा जी की पूजा व आराधना करते है।

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