अंतरराष्ट्रीय वालीबाल प्रशिक्षक विद्यासागर

Oct 11th, 2019 12:06 am

भूपिंदर सिंह

राष्ट्रीय एथलेटिक प्रशिक्षक

20 जुलाई, 1945 को हमीरपुर जिला के भरेड़ी डाकघर के खरीयंणी गांव में स्वर्गीय दुर्गा राम शर्मा व सैना देवी शर्मा के घर जन्मे इस हमेशा हंसमुख, जिंदा दिल इनसान व भारत के बेहतरीन वालीबाल प्रशिक्षक विद्यासागर शर्मा की मैट्रिक राजकीय हाई स्कूल भोरंज से हुई। यहीं पर इनके पिता जी शिक्षक थे। प्राथमिक शिक्षक के रूप में अपनी पहली नौकरी टौणी देवी तहसील के उल्ह से शुरू करने वाले विद्यासागर ने पांच वर्ष तक यह नौकरी की…

हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक संरचना को देखते हुए यहां पर बड़े मैदान बहुत ही कम हैं, मगर हर शिक्षा संस्थान के पास लगभग इतनी तो समतल जगह है ही जहां वालीबाल की प्ले फील्ड आ सके। आज जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता अधिकतर इंडोर हो रही है तो हिमाचल प्रदेश में भी कई जगह वालीबाल के लिए इंडोर सुविधा है। यही कारण है कि हिमाचल प्रदेश का राज्य खेल भी वालीबाल है, राज्य में वालीबाल गांव स्तर तक लोकप्रिय है। हिमाचल प्रदेश की कई संतानें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक वालीबाल में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं चाहे खिलाड़ी हो या प्रशिक्षक। विद्यासागर शर्मा भी एक ऐसा नाम है जो वालीबाल जगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। 20 जुलाई, 1945 को हमीरपुर जिला के भरेड़ी डाकघर के खरीयंणी गांव में स्वर्गीय दुर्गा राम शर्मा व सैना देवी शर्मा के घर जन्मे इस हमेशा हंसमुख, जिंदा दिल इनसान व भारत के बेहतरीन वालीबाल प्रशिक्षक विद्यासागर शर्मा की मैट्रिक राजकीय हाई स्कूल भोरंज से हुई यहीं पर इनके पिता जी शिक्षक थे। प्राथमिक शिक्षक के रूप में अपनी पहली नौकरी टौणी देवी तहसील के उल्ह से शुरू करने वाले विद्यासागर ने पांच वर्ष तक यह नौकरी की और फिर एक दिन हिमाचल खेल उत्थान के परोधा स्वर्गीय सुरेश पठानिया के सुझाव व प्रेरणा से राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला पहुंचे। यहां से 1972 में वालीबाल प्रशिक्षक का शिक्षण प्रशिक्षण उत्तीर्ण कर राजकीय कन्या महाविद्यालय पटियाला को अपना कर्म क्षेत्र बनाया, मगर भाग्य ने अभी और अधिक ऊंचा उठाना था।

1975 में विद्यासागर शर्मा ने राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला के शिक्षण विंग में प्रशिक्षक के रूप में अपना अगला कार्यकाल शुरू किया। राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला में रहकर कई अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों व अन्य प्रशिक्षण शिक्षण की गतिविधियों में भाग लिया। भारत सहित कई विदेशी खिलाडि़यों को प्रशिक्षक बनने के गुर यहां पर कई वर्षों तक सिखाए। 1982 एशियाई खेलों मे वालीबाल एरिना के प्रमुख रहते हुए उत्तम प्रतियोगिता प्रबंधन का परिचय दिया। बंगलूर के प्रशिक्षण केंद्र में रहते हुए सोवियत खेल विज्ञानियों के साथ काम करते हुए बहुत कुछ सीखा जो प्रशिक्षण जीवन में खिलाडि़यों को दिया। राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान के पूर्वी केंद्र कोलकाता व दक्षिणी केंद्र बंगलूर के शिक्षण विंग में भी कई वर्षों तक कार्य किया। राष्ट्रीय क्रीड़ा संस्थान पटियाला से वालीबाल में स्नातकोत्तर उपाधि भी सेवाकाल में ही उत्तीर्ण की। 1992 में पहली बार भारतीय वालीबाल टीम के मुख्य प्रशिक्षक नियुक्त हुए। इस पुरुष वालीबाल टीम ने इंडोनेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। इसी वर्ष नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिवांन्थी गोल्ड कप में भारतीय विजेता टीम के प्रशिक्षक की भी भूमिका निभाई। 1999 में  नेपाल में आयोजित दक्षिणी एशियाई खेलों में भारतीय महिला वालीबाल टीम के मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका अदा करते हुए भारत को इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। थाईलैंड सहित अन्य कई देशों में भारतीय महिला टीम के प्रशिक्षक के रूप में भारत का प्रतिनिधित्व भी किया। राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविरों को कई बार प्रशिक्षित किया।

90 के दशक के अंतिम वर्षों में भारतीय खेल प्राधिकरण खेल छात्रावास धर्मशाला व बिलासपुर में रहते हुए हिमाचली खिलाडि़यों को भी यहां कई वर्षों तक प्रशिक्षित किया तथा बिलासपुर साई खेल छात्रावास के प्रभारी भी रहे। हिमाचल प्रदेश वालीबाल संघ के तत्कालीन अध्यक्ष ठाकुर रामलाल के साथ पांच वर्षों की एक पारी सचिव के रूप में भी पूरी की है। सेवानिवृत्ति के बाद अपने पैतृक कस्बे भरेड़ी में जहां विद्यासागर शर्मा स्कूली व कालेज स्तर के विद्यार्थी खिलाडि़यों को खेल के गुर सिखाते हैं, वहीं पर वरिष्ठ नागरिक संघ के सचिव के रूप में भी क्षेत्र की कई सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहते हैं। आप के भरे पूरे घर को पत्नी सुंदेश शर्मा संभालती है, वहीं पर आपके दोनों बेटे में राजेंद्र शर्मा जिला सहायक शारीरिक शिक्षा अधिकारी हमीरपुर हैं। भारतीय बैडमिंटन प्रबंधन में आज राजेंद्र शर्मा जाना-पहचाना नाम है। छोटा बेटा विनोद शर्मा मोती लाल नेहरू खेल स्कूल राई हरियाणा में लान टेनिस प्रशिक्षक है। बेटी अंजना शर्मा हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग में स्कूली प्रवक्ता है। प्रशिक्षक डाक्टर व वैज्ञानिक के पास 60 वर्ष के बाद बहुत अधिक अनुभव होता है। हिमाचल प्रदेश वालीबाल संघ व हिमाचल प्रदेश खेल परिषद को चाहिए कि वे इतने उत्कृष्ट अनुभव वाले प्रशिक्षक की मान्य सेवाएं हिमाचल के खिलाडि़यों को उपलब्ध करवाने तथा नए प्रशिक्षकों व शारीरिक शिक्षकों को प्रशिक्षण की बारीकियां सिखाने में मिला ही सकते हैं।

हिमाचली लेखकों के लिए

लेखकों से आग्रह है कि इस स्तंभ के लिए सीमित आकार के लेख अपने परिचय तथा चित्र सहित भेजें। हिमाचल से संबंधित उन्हीं विषयों पर गौर होगा, जो तथ्यपुष्ट, अनुसंधान व अनुभव के आधार पर लिखे गए होंगे। 

-संपादक

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