अढ़ाई मंजिल से अधिक निर्माण पर सुनवाई टली

शिमला – प्लानिंग एरिया शिमला में अढ़ाई मंजिला से अधिक भवन निर्माण पर लगी रोक संबंधित केस पर अब 18 नवंबर को सुनवाई होगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में केस लगा था। प्रदेश सरकार ने भी एनजीटी के आदेशों के खिलाफ कोर्ट में अपना पक्ष प्रमुखता से रखा। अब मामले पर अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी। जानकारी के मुताबिक अगली सुनवाई के दौरान प्रदेश सरकार को शपथ पत्र दायर करना होगा। एनजीटी के उन आदेशों को प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें अढ़ाई मंजिला से अधिक भवन निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। बताया गया कि जब तक एनजीटी के आदेश लागू हैं, तब तक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर काम होना संभव नहीं है। प्रदेश सरकार ने हाल ही में एनजीटी के आदेशों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर सुनवाई अगले महीने होनी है। उल्लेखनीय है कि पर्यावरण को बचाने के लिए और आपदा की दृष्टि को देखते हुए 16 जुलाई, 2018 यानी पिछले साल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राजधानी शिमला में भवन निर्माण मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। एनजीटी ने शिमला के कोर और ग्रीन  एरिया में कंस्ट्रकशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है और कोर एरिया के बाहर भी सिर्फ अढ़ाई मंजिला भवन निर्माण हो सकते हैं। दिल्ली में 16 जुलाई, 2018 को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने प्रदेश सरकार की रिव्यू पटिशन को खारिज कर अपना फैसला सुनाया था। इसके साथ कोर और ग्रीन एरिया में अब तक जितने भी अवैध भवन निर्माण हुए हैं, उन्हें तोड़ने के भी आदेश दिए थे। एनजीटी ने प्रदेश के प्लानिंग एरिया में अवैध भवनों को रेगुलर नहीं करने का भी फैसला किया है। एनजीटी ने 16 नवंबर, 2017 को शिमला में भवन निर्माण मामले पर जो फैसला सुनाया था, उसी को ही अंतिम फैसला करार दिया गया।

13 नवंबर, 2017 से पहले के भवन रेगुलर

पिछले साल एनजीटी ने प्रदेश के अन्य भागों में हर तरह के अवैध निर्माणों को नियमित करने पर प्रतिबंध लगाते हुए साफ  किया था कि यदि किसी ने शिमला के कोर, ग्रीन व फोरेस्ट एरिया से बाहर अवैध निर्माण को नियमित करने का आवेदन 13 नवंबर, 2017 से पहले कर रखा है तो ही वह नियमित हो सकेगा। 13 नवंबर, के पश्चात किए किसी भी अनाधिकृत निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा। वहीं, ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पूरे प्रदेश में सड़कों से तीन मीटर की दूरी के भीतर किसी भी प्रकार की निर्माण पर रोक लगा दी है। इसके साथ-साथ प्रदेश में बिना अनुमति के पेड़ों व जमीन की कटिंग करने वाले पर कम से कम पांच लाख का जुर्माना बतौर पर्यावरण नुकसान भरपाई मुआवजा वसूलने के आदेश भी जारी किए गए थे।

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