अपनी हल्दी भरेगी किसानों की जेब

टीहरा –धर्मपुर उपमंडल की टिहरा तहसील में बंदरों की समस्या के कारण धान मक्की व गेहंू की फसलें उगाना छोड़ चुके किसानों के लिए अब हल्दी की खेती नकदी फसल बन कर सामने आई है। क्षेत्र के ज्यादातर किसानों ने कई वर्ष पहले से पारंपरिक फसलें उगाना बंद कर दिया था और किसान थोड़ी बहुत जमीन पर हल्दी की खेती कर रहे थे, लेकिन मंडी साक्षरता व जन विकास समिति, नाबार्ड और क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य भूपेंद्र सिंह के प्रयासों से अब किसानों ने हल्दी की खेती को बडे़ स्तर पर लाकर हल्दी का अपना उद्योग ही स्थापित कर दिया है। क्षेत्र के किसानों ने एक मिसाल पेश करते हुए अपनी हल्दी के नाम से हल्दी का ब्रांड भी लांच कर दिया है। धर्मपुर विकास खंड की डरवाड़ ग्राम पंचायत में गठित 15 महिला स्वयं सहायता समूहों ने यह कारनामा कर दिखाया है। पंचायत में अब बडे़ स्तर पर किसान हल्दी उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन की मात्रा अधिक होने के कारण अब किसानों ने नाबार्ड के सहयोग से एक हल्दी पाउडर बनाने की एक यूनिट ही शुरू कर दी है। नाबार्ड ने इसके लिए साढ़े छह लाख रुपए की परियोजना मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति के माध्यम से पंचायत की ग्रामीण विकास समिति के लिए स्वीकृत की थी, जिसने की अब काम करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण विकास समिति के अध्यक्ष सुरेश पठानिया, महासचिव सूरत सिंह सकलानी व कोषाध्यक्ष सागर चंद ने बताया कि इस हल्दी पिसाई व बिक्री केंद्र स्थापित किया गया है, जिसमें एक किलो हल्दी पाउडर पिसाई की दर बीस रुपय तय किया गया है। इसके साथ ही किसानों से समिति कच्ची हल्दी बीस रुपए किलोग्राम के हिसाब से खरीद रही है, जबकि सूखी हल्दी 70 रुपए में खरीदी जा रही है, जिसके बाद समिति इसका पाउडर बना कर मेरी हल्दी नाम के ब्रांड से अब बाजार में बेच रही है। नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक डा. सोहन प्रेमी ने बताया कि जो किसान खेती छोड़ चुके थे, अब वह भी हल्दी की खेती करना चाह रहे हैं। उचित मूल्य मिलने से किसानों की आमदनी बढ़ गई है। इसके साथ ही कई लोगों को रोजगार भी मिला है। उन्होंने कहा कि अपनी हल्दी ब्रांड को सभी जरूरी लाइसेंस प्रदान करवाए जाएंगे। इसके साथ इसे बिक्री हेतु विभिन्न मेलों, प्रदर्शनियों व बाजारों में प्रचारित किया जाएगा। उन्हांेने कहा कि अगर यह प्रयास सफल रहा तो जिला की अन्य पंचायतों में भी ऐसे प्रयास किए जाएंगे।  

 

 

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