अब केंद्र ने रोके हिमाचल के एनएच

एक और झटका, स्वीकृत सभी 69 नेशनल हाई-वे की मेंटेनेंस खुद करनी होगी

शिमला – केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्रालय ने हिमाचल के फोरलेन मार्गों को लटकाने के बाद अब यहां के नेशनल हाई-वे से भी पल्ला झाड़ लिया है। राज्य के लिए स्वीकृत सभी 69 नेशनल हाई-वे का मेंटेनेंस हिमाचल सरकार को करना होगा। केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में यह आदेश जारी कि हैं कि एनएच पॉलिसी बनने तक हिमाचल सरकार इन सड़क मार्गों का अपने स्तर पर रख-रखाव करे। केंद्र सरकार ने जून 2016 में हिमाचल के 69 सड़क मार्गों को नेशनल हाई-वे घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। इस आधार पर इन सड़क मार्गों की डीपीआर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने 163 करोड़ स्वीकृत किए थे। इस प्रक्रिया के तहत हिमाचल सरकार ने दिसंबर 2019 तक 58 नेशनल हाई-वे की डीपीआर तैयार कर इसके ड्राफ्ट एलाइनमेंट की केंद्रीय मंत्रालय से एप्रूवल मांगी है। तब से यह मामला केंद्रीय सड़क मंत्रालय के अधीन लटका है। अब मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार देशभर में प्रस्तावित नेशनल हाईवे के निर्माण के लिए पालिसी तैयार कर रही है। इसके तहत पहले चरण में प्राथमिकता के आधार पर फिजिबल और जरूरी सड़क मार्गों का ही निर्माण होगा। केंद्रीय मंत्रालय ने यह भी संकेत दिए हैं कि सैद्धांतिक रूप से मंजूर किए गए 69 हाई-वे में से पहले चरण में 15 से 18 सड़क परियोजनाओं का निर्माण ही संभव है। इसी बीच, केंद्रीय मंत्रालय ने इन सड़क मार्गों की मेंटेनेंस को लेकर यू-टर्न ले लिया है। इसके तहत केंद्र सरकार की पालिसी बनने तक हिमाचल के नेशनल हाई-वे बीच में लटके रहेंगे। इन सड़क मार्गों का गंभीरता से राज्य सरकार रख-रखाव नहीं कर पाएगी और न ही इन घोषित एनएच के लिए केंद्रीय मंत्रालय फूटी कौड़ी देगा। इस कारण अब इन सड़क मार्गों की हल्की-फुल्की मेंटेनेंस का सारा दायित्व राज्य सरकार के कंधों पर आ गया है। बताते चलें कि सितंबर 2016 में केंद्र सरकार ने हिमाचल के दो महत्त्वाकांक्षी नेशनल हाई-वे को फोरलेन नोटिफाई किया है। इस आधार पर मटौर-शिमला और पठानकोट-मंडी फोरलेन निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हैरत है कि मटौर-धर्मशाला फोरलेन के लिए पहले पैकेज में ज्वालाजी-धर्मशाला के बीच प्रस्तावित 40 किलोमीटर तक के सड़क मार्ग के लिए टेंडर भी कॉल कर लिया गया था। अप्रैल 2018 को इस टेंडर की बिड खुलनी थी। इसी तर्ज पर पठानकोट-मंडी फोरलेन का प्रोजेक्ट भी लटका दिया है। अब केंद्रीय सड़क मंत्रालय इन दोनों फोरलेन परियोजनाओं को डी-नोटिफाई कर टू-लेन बनाना चाहता है। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इन फोरलेन परियोजनाओं का मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ प्रमुखता से उठाया है। इसके चलते बद्दी-बरोटीवाला फोरलेन के निर्माण के लिए केंद्रीय मंत्रालय ने हामी भर दी है। इसके चलते अब राज्य सरकार मटौर-शिमला और मंडी-पठानकोट फोरलेन के निर्माण कार्यों को शुरू करवाने के लिए गंभीरता दिखाएगी। 

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